भारत को ऑफर देकर रूस भरेगा Su-57 की पहली सफल उड़ान, पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सब हैरान!

जुलाई 2021 में जब पहली बार मॉस्को एयर शो में एक ढके हुए विमान से पर्दा उठा तो दुनिया दंग रह गई। रूस ने एक ऐसा फाइटर जेट पेश किया था जो सिंगल इंजन का था। बेहद आधुनिक था और जिसका नाम रखा गया चेकमेट। रूस के पास पहले से ही एसयू 57 जैसा भारी और दोहरे इंजन वाला पांचवी पीढ़ी का विमान मौजूद है।
दुनिया के हथियारों के बाजार में इस वक्त खलबली मची है। रूस जो पहले से ही यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। उसने एक ऐसा दांव चला है जिसने पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सबके कान खड़े कर दिए हैं। रूस की दिग्गज कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन यानी यूएसी के सीईओ वादिम बड़े खान ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि रूस के दूसरे स्टील फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट के पहले उड़ान प्रोटोटाइप का काम शुरू हो चुका है। यह सिर्फ एक विमान नहीं बल्कि पुतिन का वो चेकमेट है जिसे खासतौर पर अमेरिका के F35 और चीन के J20 को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विमान वाकई तय समय पर आसमान में उड़ान भरेगा और सबसे बड़ी बात भारत के लिए इसमें क्या छिपा है?
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दरअसल जुलाई 2021 में जब पहली बार मॉस्को एयर शो में एक ढके हुए विमान से पर्दा उठा तो दुनिया दंग रह गई। रूस ने एक ऐसा फाइटर जेट पेश किया था जो सिंगल इंजन का था। बेहद आधुनिक था और जिसका नाम रखा गया चेकमेट। रूस के पास पहले से ही एसयू 57 जैसा भारी और दोहरे इंजन वाला पांचवी पीढ़ी का विमान मौजूद है। लेकिन एसयू 75 को रूस ने लाइट टैक्टिकल एयरक्राफ्ट के तौर पर पेश किया। हालांकि साल 2021 के बाद से यह प्रोजेक्ट कई मुश्किलों में फंस गया। पहले इसकी उड़ान 2023 में होनी थी, लेकिन अब इसके 2027 तक आसमान में पहुंचने की उम्मीद है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि साल 2021 में जो मॉडल हमने देखा था असली प्रोटोटाइप उससे काफी अलग होने वाला है। रूस ने एसयू 57 को बनाने के दौरान जो कड़वे सबक सीखे और जो तकनीक विकसित की उसे अब एसयू 75 में डाल दिया जा रहा है। इसके विंग डिजाइन और टेल यानी पूंछ के हिस्से में बड़े बदलाव किए गए हैं ताकि इसकी स्टील क्षमता यानी रडार से बचने की ताकत को और बेहतर बनाया जा सके।
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एसयू 75 की सबसे बड़ी खासियत इसका ओपन आर्किटेक्चर है। इसका मतलब है कि खरीदार देश अपनी जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकता है। इसमें एक एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पायलट असिस्टेंट सिस्टम दिया गया है। यह युद्ध के दौरान पायलट के तनाव को कम करता है और एक को पायलट की तरह काम करता है। जैसे अमेरिका के पास भारी F2 और हल्का F35 है, वैसे ही रूस अब SU 57 और SU 75 की जोड़ी बना रहा है। यह इंजन हथियार और एवियनिक्स के मामले में एसयू 57 का ही छोटा लेकिन फुर्तीला वर्जन है। यह विमान अपने अंदरूनी वेपन बे में कई तरह की मिसाइलें ले जा सकता है। जिससे रडार पर इसकी पहचान करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
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