तालिबानियों से सामना करने को तैयार है यह महिलाएं, किसी भी हाल में नहीं रोकेगी अपना काम

तालिबानियों से सामना करने को तैयार है यह महिलाएं, किसी भी हाल में नहीं रोकेगी अपना काम

इन अफगान महिलाओं का भविष्य 15 अगस्त को अफगानिस्तान में तालिबान शासन की शुरुआत के बाद से ठहर गया है। कई लोग डर के मारे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। लेकिन अट्टाई 20 साल से बनी हुई जमीन को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान की हुकुमत के बाद से देश की महिलाओं की हालत काफी दयनीय है। महिलाओं के कामाकाज में रोक लगाई जाने के बीच तालिबान के हेरात प्रांत में भगवा मसाला कारोबार में शामिल अफगान महिलाओं ने यह साफ कर दिया है कि, तालिबान के डर से उन्हें नजरबंद नहीं किया जाएगा। वह लंबे समय से कारोबार कर रहे है और सत्ता में आने के बाद तालिबान के डर से अफगान महिलाएं किसी भी हाल में अपना काम नहीं रोकेगी।

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साल 2006 तक सफी अट्टाई ने हेरात के पश्तून जरघन जिले में 25 हेक्टेयर भूमि पर केसर मसाला कारखाना स्थापित किया था। इसी भूमि पर केसर के फूल उगाए जाते हैं और कारखाने में दुनिया का सबसे महंगा 'केसर क्रोकस' मसाला बनाया जाता है। अट्टाई की कंपनी में काम करने वाले लगभग सभी लोग महिलाएं हैं। संगठन की एक हजार से ज्यादा अफगान महिलाएं केसर के फूल तोड़ने में शामिल हैं।

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इन अफगान महिलाओं का भविष्य 15 अगस्त को अफगानिस्तान में तालिबान शासन की शुरुआत के बाद से ठहर गया है। कई लोग डर के मारे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। लेकिन अट्टाई 20 साल से बनी हुई जमीन को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, हम आज बड़ी मुश्किल से इस जगह पर आए हैं,। हम किसी भी हाल में घर पर नहीं बैठेंगे। नई अफगान सरकार में महिला प्रतिनिधि होने की बात तो दूर, तालिबान ने अभी तक लड़कियों को स्कूल या कॉलेज जाने की स्पष्ट अनुमति नहीं दी है। 20 साल की लड़ाई और कड़ी मेहनत के बाद अफगान महिलाओं ने अपनी जमीन खुद बनाई है। उस जमीन पर तालिबान दोबारा कब्जा कर रहा है।