दगाबाज रे! अंसारुल्लाह से US की सीक्रेट मीटिंग, ट्रंप ने हूतियों से कर ली सेटिंग, सऊदी को छोड़ा अकेला

ओमान में हुई गुप्त बैठक के बाद अमेरिका ने हूती विद्रोहियों से समझौता कर सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया है। इस डील के तहत हूती अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और अमेरिका इस जंग से दूर रहेगा। अमेरिकी मदद रुकने और हूतियों के हमलों से सऊदी अरब अब खुद को लाचार और अकेला महसूस कर रहा है।
ऐसे दोस्त से तो दुश्मन ही भले। जिस वाशिंगटन के भरोसे सऊदी अरब ने पूरे खाड़ी में अपनी गर्दन फंसाई। उसी अमेरिका ने अपने सबसे करीबी सहयोगी के सबसे बड़े दुश्मन यानी अंसारुल्लाह के साथ अंदर ही अंदर सेटिंग कर ली है। ओमान में हुई एक सीक्रेट मीटिंग के बाद अमेरिका ने जंग के मैदान में सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया है। हूतियों की मार से बेहाल सऊदी अरब अब अमेरिका पर भरोसा करने की तमाम सीमा रेखाओं को पार कर चुका है। इसराइल के एनल्फ चैनल और अंतरराष्ट्रीय सूत्रों के हवाले से रियाद के शाही गलियारों से खबर आ रही है। सऊदी अब कह रहा है कि वाशिंगटन के फैसले ना लेने की कीमत हम अपनी जमीन पर चुका रहे हैं। यमनी सूत्रों के मुताबिक और टाइम्स ऑफ इसराइल के मुताबिक हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूं प्रतिनिधियों के बीच एक बेहद गोपनीय बैठक की गई।
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बैठक में हूती प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अब्दुल सलाम और अब्दुल मलिक अल अजरी शामिल थे। इस मीटिंग में अंसारउल्ला ने अमेरिकी अधिकारियों को साफ आश्वासन दे दिया। वे अमेरिकी या अन्य कमर्शियल जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और मई 2025 में हुए दोनों के बीच सीज फायर समझौते को मानेंगे। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक कड़ी शर्त भी रख दी जिस जाल में अमेरिका फंस तो गया लेकिन सऊदी अकेला पड़ गया। हुतियों ने डिमांड की कि अमेरिका सऊदी अरब के खिलाफ जारी उनकी जंग से पूरी तरीके से दूर रहेगा और सोचिए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो अमेरिका सऊदी के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की कसमें खाता फिरता था उस अमेरिका ने पल भर में ही हूतियों से यह डील कर ली। याद कीजिए मार्च 2025 में ट्रंप सरकार ने हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर लाल सागर में 2 महीने तक भीषण बमबारी की। लेकिन मई 2025 के सीज फायर के बाद अब ट्रंप प्रशासन ने चुपचाप सऊदी अरब को हूतियों के रहमोकरम पर छोड़ दिया। यानी मोहम्मद बिन सलमान अब अकेले पड़ चुके हैं। केएसए माने किंगडम ऑफ सऊदी अरबिया बुरी तरीके से फंस चुका है।
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इजरायली नेटवर्क एंटल को सऊदी शाही परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि रियाद इस समय खुद को बेहद लाचार महसूस कर रहा है। होतियों के लगातार होते मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के बेहद महंगे पेट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार को खाली कर दिया। सऊदी रक्षा विभाग ने अमेरिका से तुरंत अतिरिक्त सैन्य मदद और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग कर डाली। लेकिन वाशिंगटन ने हाथ खड़े कर दिए। शाही घर आने से जुड़े एक सूत्र ने गुस्से में कहा, "जब तक वाशिंगटन कोई अमली कदम नहीं उठाता, तब तक हम जमीन पर इसकी कीमत चुका रहे हैं। मदद ना मिलने पर सऊदी ने पाकिस्तान और तुर्की का दरवाजा भी खटखटाया। लेकिन दोनों ही देशों ने सिर्फ हथियारों के सौदे में दिलचस्पी दिखाई, और सीधी सैन्य मदद देने से पीछे हट गए। इससे सऊदी अरब में अकेले छोड़ दिए जाने का एहसास और गहरा हो गया। सऊदी अरब के लिए मुसीबतें यहीं खत्म नहीं होती। हूतियों ने यमन के अलहाजम और अमारी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। और बाबल मंदिर स्टेट पर खंदके खोदकर नाकेबंदी कर डाली। तनाव इस कदर बढ़ गया है कि इतिहास में पहली बार मक्का शहर के पास एयर रेड सायरन बजाए गए।
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