अपाचे पर हमले का अमेरिका ने लिया बदला, Iran के एयर डिफेंस को किया तबाह!

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अभिनय आकाश । Jun 10 2026 12:42PM

अमेरिका का दावा था कि इसके पीछे ईरान समर्थित ताकतों या खुद ईरान का हाथ था। अमेरिका में एक नियम बहुत साफ है। अगर आप किसी अमेरिकी सैनिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उसका अंजाम बुरा होगा और राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए और अगले ही दिन ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।

9 जून की रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तभी खाड़ी के देशों में आसमान आग उगल रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति के एक आदेश ने मिडिल ईस्ट की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी। अमेरिका ने सीधे ईरान के सैन्य ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है और यह हमला इतना सटीक और इतना घातक था कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ताश की पत्तों की तरह ढह गए। लेकिन आखिर अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया? दरअसल अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक पूरी कर ली है। यह कोई मामूली झड़प नहीं थी। 

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अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स ने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे। अब निशाने पर क्या था यह जान लीजिए। दरअसल सबसे पहला था एयर डिफेंस साइट्स ताकि ईरानी जवाबी हमला ना कर सके। इसके अलावा ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन जहां से ड्रोन और मिसाइलें ऑपरेट की जाती है। इसके अलावा सर्िलांस रडार स्टेट ऑफ हॉर्मोज के पास स्थित वो रडार जो हर समुद्री हलचल पर नजर रखते थे। अब इस भीषण हमले के पीछे की कहानी शुरू होती है 8 जून से। उस दिन अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था। 

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अमेरिका का दावा था कि इसके पीछे ईरान समर्थित ताकतों या खुद ईरान का हाथ था। अमेरिका में एक नियम बहुत साफ है। अगर आप किसी अमेरिकी सैनिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उसका अंजाम बुरा होगा और राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए और अगले ही दिन ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। ईरान पर यह हमले स्टेट ऑफ हॉर्मुज के पास किए गए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह जगह क्यों? देखिए दुनिया का करीब 20 से 30% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।

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ईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता रहता है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहा है। और यह हमला ईरान को एक कड़ा संदेश है कि समुद्र पर उसकी दादागिरी नहीं चलेगी। पेंटागन ने इसे एक प्रपोशनल रिस्पांस यानी आुपातिक प्रतिक्रिया कहा है। इसका मतलब है जितना नुकसान अमेरिका का हुआ उतना ही सटीक जवाब उन्होंने दिया। पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। लाल सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तनाव चरम पर है। अमेरिका का कहना है कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं। लेकिन अगर उनकी सुरक्षा पर आंच आई तो वह चुप नहीं बैठेंगे। 

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