US का EA-37B Compass Call सीक्रेट वेपन, ईरान के कमांड सेंटर को कर दिया अंधा

US
AI Image
अभिनय आकाश । Apr 7 2026 12:11PM

यह एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट है जिसका मुख्य काम है दुश्मन के कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर देना। रडार सिग्नल को ब्लॉक कर देना। मिसाइल गाइडेंस को गड़बड़ कर देना।

आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ मिसाइल, टैंक और फाइटर जेट से ही नहीं लड़ी जा रही हैं। मॉर्डन डे वॉरफेयर में असली लड़ाई तो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की है। यानी दुश्मन को मारने से पहले उसे अंधा और बहरा बना देना। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने एक ऐसा हथियार तैयार किया है जो बिना गोली चलाए ही दुश्मन की पूरी डिफेंस सिस्टम को बेकार कर सकता है। इसका नाम है EA37B कंपास कॉल। अब क्या है यह खतरनाक सिस्टम? दरअसल यह एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट है जिसका मुख्य काम है दुश्मन के कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर देना। रडार सिग्नल को ब्लॉक कर देना। मिसाइल गाइडेंस को गड़बड़ कर देना।

इसे भी पढ़ें: दम है तो बीजिंग आकर ले जाओ! अमेरिका-इजरायल की नाक के नीचे से चीन उठा ले गया ईरान का यूरेनियम?

यानी दुश्मन के पास हथियार तो होंगे, लेकिन वह उन्हें सही से इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इस एयरक्राफ्ट में लगे होते हैं हाई पावर इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स। जब यह एक्टिव होता है तो रेडियो फ्रीक्वेंसी पर हमला करता है। 

सिग्नल को डिस्टर्ब कर देता है और फिर फेक सिग्नल जनरेट कर देता है। इसका असर यह होता है कि रडार गलत जानकारी दिखाने लगता है। असली टारगेट की पहचान मुश्किल हो जाती है और मिसाइल गलत दिशा में जाने लगती है। यानी बिना बम गिराए ही पूरा डिफेंस सिस्टम ठप। अब ईरान ने पिछले कुछ सालों में अपनी मिसाइल और ड्रोन ताकत को काफी बढ़ाया। लेकिन अमेरिका की रणनीति बहुत अलग है। सीधे टकराने के बजाय पहले दुश्मन के सिस्टम को कमजोर करो। अगर रडार ही काम नहीं करेगा तो मिसाइल किसे रोकेगी? अगर कम्युनिकेशन ही बंद हो जाएगा तो कमांड कौन देगा? यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर आज के समय में सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। यह ताकत नहीं दिमाग की लड़ाई है। अगर दुश्मन को यह पता ही ना चले कि हमला कहां से हो रहा है, तो उसकी पूरी तैयारी बेकार हो जाती है। यानी आंख बंद मतलब रडार जाम, कान बंद यानी कि कम्युनिकेशन जाम और दिमाग कंफ्यूज यानी कि फेक सिग्नल। 

इसे भी पढ़ें: ईरान का 10-पॉइंट काउंटर-प्रपोजल क्या है, होर्मुज से हिजबुल्लाह तक शामिल, ट्रंप हो गए राजी?

अब सबसे जरूरी सवाल भारत इससे क्या सीख सकता है? दरअसल भारत पहले से अग्नि मिसाइल सीरीज पर काम कर रहा है और लगातार अपनी स्ट्राइक क्षमता बढ़ा रहा है। लेकिन भविष्य की लड़ाई में सिर्फ मिसाइल काफी नहीं होगी। जरूरत होगी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, साइबर अटैक, रडार, डिसरप्शन। सोचिए अगर भारत एक मिसाइल लॉन्च करे और उसी समय दुश्मन का रडार जाम हो जाए तो क्या होगा? एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल को देख ही नहीं पाएगा। इंटरसेप्ट लॉन्च नहीं हो पाएगा। टारगेट हिट होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। यानी यह एक डबल अटैक है। भारत भविष्य में अपनी सबमरीन आधारित मिसाइलों से भी ऐसी टेक्नोलॉजी जोड़ सकता है। सोचिए समुंदर के अंदर से मिसाइल लॉन्च, ऊपर से रडार जाम, दुश्मन को कुछ पता नहीं चला और यही होगी असली साइलेंट स्ट्राइक। खैर EA37 कंपास कॉल जैसी टेक्नोलॉजी यह दिखाती है कि भविष्य की लड़ाई अब सिर्फ हथियारों की नहीं रही बल्कि इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल की है। जो देश दुश्मन के सिस्टम को जाम कर सकता है वही असली विजेता होगा।

All the updates here:

अन्य न्यूज़