भगवान जीमूतवाहन की पूजा और दान के बाद ही खोलें Jitiya Vrat, ये है पारण की सही विधि

संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए जितिया का 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस व्रत का पारण 4 अक्तूबर को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा। पारण से पहले भगवान जीमूतवाहन की विधिवत पूजा, दान और सात्विक भोग लगाने का विधान है।
हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत को रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस शुभ दिन पर महिलाएं अपनी संतान की तरक्की, लंबी आयु, अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
इस व्रत को 36 घंटे तक रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 4 अक्तूबर को जितिया व्रत का पारण किया जा रहा है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कब और कैसे करें जितिया व्रत का पारण।
जितिया व्रत 2026 पारण का शुभ मुहूर्त
जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि के दिन किया जाता है। 4 अक्तूबर को व्रत का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जा सकता है।
जितिया व्रत की पारण विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
- फिर घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें और इसे शुद्ध करें।
- अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और उनका आशीर्वाद लें।
- इसके बाद दीपक जलाकर भगवान जीमूतवाहन की विधिवत रुप से पूजा-अर्चना करें।
- अब भगवान जीमूतवाहन से संतान की लंबी आयु, सुखी जीवन और श्रेष्ठ स्वास्थ्य की कामना करें।
- पारण करने से पहले ब्राह्मण या गरीब लोगों को अन्न-धन आदि का दान करें।
- फिर नोनी के साग और रागी की रोटी का भोग लगाएं। अब सात्विक भोजन को ग्रहण करें और व्रत का पारण करें।
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