जानें वास्तु के हिसाब से जूतों को घर में कहां रखना चाहिए

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  नवंबर 21, 2020   16:40
  • Like
जानें वास्तु के हिसाब से जूतों को घर में कहां रखना चाहिए
Image Source: Google

वास्तुशास्त्री यह भी कहते हैं कि बिना पहने हुए जूते जिन्हें आप अगले कुछ समय बाद पहनने वाले हैं, उन्हें भी आप अपने बेड के बॉक्स के अंदर कभी भी ना डालें, क्योंकि इससे स्वास्थ्य हानि की संभावना बनी रहती है।

प्राचीन समय से ही हमारे देश में परंपरा रही है कि जूते और चप्पल घर के बाहर उतार कर घर में प्रवेश करना चाहिए। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें, तो बाहर से पहन के आए हुए जूते चप्पलों को घर के अंदर ले जाना गलत बताया गया है। चूंकि बाहर से आये जूते चप्पलों में बहुत सारी गन्दगी और कीटाणु लगे रहते हैं और गंदगी को घर में लेकर जाना किसी भी एंगल से सही नहीं है। 

यूं भी हमारे यहाँ वास्तु में जूते-चप्पलों को लेकर कई सारे नियम बताये गए हैं। वास्तु के हिसाब से घर के जूतों को कहां रखना चाहिए, हम इसके बारे में बताएंगे।

इसे भी पढ़ें: इस तरह से 'क्रिस्टल बॉल' पलट देगी आपकी किस्मत

वास्तु में हर एक चीज के लिए सही स्थान निश्चित किया गया है, वहीं जूते चप्पलों के लिए थी स्थान निश्चित किया गया है। अगर आप घर के अंदर जूते चप्पलों के स्टैंड को या फिर जूते चप्पलों को सही दिशा में नहीं रखते हैं तो आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं होता है। चूंकि जहां नकारात्मक शक्तियां रहती हैं, वहां मां लक्ष्मी का निवास नहीं होता है। 

वास्तु के हिसाब से जूते चप्पलों को घर के बाहर खोलना उचित होता है। अगर आप अपने जूतों को स्टैंड में रखते हैं तो उन्हें मुख्य द्वार से 2-3 फीट की दूरी पर रखें। यह ध्यान रखें कि जूते का स्टैंड दरवाजे वाला हो अथवा ढका हुआ हो, क्योंकि खुले हुए जूते घर में सकारात्मक ऊर्जा को अपने में खींच लेता है और घर में प्रवेश करने में बाधा उत्पन्न करता है, इसीलिए जूतों के स्टैंड का ढका होना आवश्यक है। 

इसके साथ ही वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं कि जूते का स्टैंड कभी भी ऐसी दिशा में न रखें, जहां से घर का किचन अथवा पूजा घर की दीवार लगी हुई हो। 

इसके साथ ही आपके घर के पूर्व, उत्तर, ईशान या आग्नेय कोण की तरफ भी जूते चप्पलों को कभी भी नहीं रखना चाहिए। वास्तु - विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉकर या आपकी अलमारी जिसमें आप पैसे -रुपए रखते हैं उसके नीचे कभी भी जूते चप्पल नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे धन हानि होती है। इसके अलावा अपने बेडरूम में, बेड के नीचे भी जूते चप्पलों को इकट्ठा ना करें, क्योंकि इस तरीके के कार्य से घर के मुखिया या उस बेड पर सोने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य में कमी नजर आती है और वह लगातार बीमार रहता है। 

बेड के नीचे कई सारे जूते चप्पल इकट्ठा करने की वजह से रिश्ते में खटास उत्पन्न होती है जो कलह की वजह बनती है। वास्तुशास्त्री यह भी कहते हैं कि बिना पहने हुए जूते जिन्हें आप अगले कुछ समय बाद पहनने वाले हैं, उन्हें भी आप अपने बेड के बॉक्स के अंदर कभी भी ना डालें, क्योंकि इससे स्वास्थ्य हानि की संभावना बनी रहती है। 

जूते चप्पल रखने की सही दिशा 

वास्तु में जूते रखने की सही दिशा भी बताई गई है। इसके अनुसार आप अपने घर की बालकनी या पश्चिम या दक्षिण दिशा में जूते चप्पलों की अलमारी रख सकते हैं। इसके अलावा वायव्य यानि कि उत्तर-पश्चिम दिशा का कोण और नेत्रत्व यानी कि दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोण पर भी जूते चप्पल की अलमारी बना सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: खिड़की बनाने से पूर्व जान लें वास्तु के 'यह नियम'

इसके अलावा वास्तु में जूते चप्पलों को लेकर कहा गया है कि जिन पर शनि की दशा भारी चल रही है और शनि का प्रकोप चल रहा है, उन व्यक्तियों को गरीब और निर्धन लोगों को जूते चप्पल दान करना चाहिए। इसके लिए यह आवश्यक नहीं है कि आप नए जूते ही खरीदें, बल्कि आप अपने पहने हुए या रखे हुए जूते भी गरीब लोगों को दान कर सकते हैं। हालाँकि, नए जूते दान करना आधुनिक युग के हिसाब से उचित रहेगा।

इसके साथ ही वास्तु के अनुसार विद्यार्थियों को परीक्षा देने जाते समय कभी भी सफेद रंग के जूतों को पहनने से वर्जित किया गया है, क्योंकि सफेद रंग के जूते एकाग्रता को भंग करते हैं और परीक्षा एकाग्र मन से नहीं देंगे तो परीक्षा के परिणाम उचित नहीं आएंगे। वास्तु में यह भी बताया गया है कि किसी भी शुभ अवसर पर, किसी भी रिश्तेदार या दोस्त को, या मित्र को कभी भी जूते चप्पल उपहार के रूप में नहीं देना चाहिए। इससे लेने वाले की आर्थिक समस्या शुरू हो जाती है। इसके अलावा भी ध्यान रखें कि टूटे-फूटे चप्पलों को पहनने से भाग्य में कमी आती है। 

चुराए हुए जूते चप्पलों को कभी नहीं पहनना चाहिए, इससे शनि की कुदृष्टि आपके ऊपर पड़ जाती है और आपके ऊपर शनि का प्रकोप चालू हो जाता है। वहीं शनिवार के दिन भूलकर भी जूते चप्पलों की खरीददारी नहीं करनी चाहिए। वास्तुशास्त्री यह भी कहते हैं कि अगर आपके जूते-चप्पल चोरी हो गए हैं, तो आपके भाग्य में कुछ फायदा लिखा हुआ है।

- विंध्यवासिनी सिंह 







छठ पर्व में खास महत्व है पहले दिन की 'नहाय खाय' प्रथा का

  •  प्रज्ञा पाण्डेय
  •  नवंबर 18, 2020   15:13
  • Like
छठ पर्व में खास महत्व है पहले दिन की 'नहाय खाय' प्रथा का
Image Source: Google

नहाय खाय के दिन से घर की साफ-सफाई होती है। आज के दिन घर में छठ करने वाला व्रती सात्विक भोजन करता है। उस दिन से घर में भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन व्रती केवल एक बार भोजन करता है।

आस्था तथा सूर्योपासना का पर्व छठ आज से शुरू हो गया है। आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। इस दिन का छठ पर्व में खास महत्व है तो आइए हम आपको नहाय खाय के बारे में बताते हैं। 

नहाय खाय क्या है

चारदिवसीय छठ पर्व की शुरूआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होता है। इस दिन व्रत पूर्ण रूप से शुद्ध होकर व्रत से शुरूआत करता है इसलिए छठ के पहले दिन नहाय खाय का खास महत्व होता है।

इसे भी पढ़ें: छठ पूजा में की जाती है सूर्य देव की उपासना

नहाय खाय नाम क्यों पड़ा

इस दिन छठ करने वाले श्रद्धालु अर्थात व्रती शुद्धता पूर्वक स्नान कर सात्विक भोजन करता है। उसके बाद वह छठ सम्पन्न होने के बाद ही भोजन करता है इसलिए इसे नहाय खाय कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन छठ में चढ़ने वाला खास प्रसाद जिसे ठेकुआ कहते हैं उसके अनाज को धोकर सुखाया भी जाता है। 

नहाय खाय में व्रती खाते हैं सात्विक भोजन

नहाय खाय के दिन से घर की साफ-सफाई होती है। आज के दिन घर में छठ करने वाला व्रती सात्विक भोजन करता है। उस दिन से घर में भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन व्रती केवल एक बार भोजन करता है। नहाय खाय के दिन व्रती तैलीय चीजें जैसी पूरी और पराठे का सेवन नहीं करता है। साथ ही घर के अन्य सदस्य व्रत करने वाले को भोजन करने के बाद ही अन्न ग्रहण करते हैं। इसके अलावा आमतौर पर घर में बिस्तर पर नहीं सोता बल्कि वह चार दिन तक जमीन पर सोता है। 

नहाय खाय के दिन खासतौर से लौकी से सब्जी बनती है। इसे पीछे मान्यता है हिन्दू धर्म में लौकी को बहुत पवित्र माना जाता है। इसके अलावा लौकी में पर्याप्त मात्रा में जल रहता है। इसमें लगभग 96 फीसदी पानी होता है जो व्रत को आगे आने वाले दिनों में ताकत देता है। इसके अलावा लौकी खाने से बहुत से बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। इसके अलावा खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इस दिन चने की दाल खाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि चने की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध होती है तथा वह व्रती को ताकत भी देती है।

इसे भी पढ़ें: छठ पूजा 2020 की महत्वपूर्ण तिथियाँ, पूजन विधि और व्रत कथा

नदियों और तालाब के किनारे शुरू होती है पूजा

नहाय खाय के दिन व्रती तालाब या नदी के किनारे के स्नान करते हैं इसलिए नदियों के किनारों बहुत भीड़ होती है। स्नान से पहले वह पवित्र लकड़ी के दातुन से मुंह धोकर नदी में स्नान करते हैं। उसके बाद पवित्र नदी का जल लेकर घर आते हैं और उससे छठ का प्रसाद बनता है। लेकिन शहरों में तालाब तथा नदी की कमी के कारण लोग अपने घर में ही पवित्रता पूर्वक स्नान कर लेते हैं।

मिट्टी के चूल्हे पर बनता है खाना 

इसके अलावा नहाय खाय के दिन खाना आम दिनों की तरह रसोई के चूल्हे पर नहीं बल्कि हमेशा लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि चूल्हे में केवल आम की लकड़ी से का इस्तेमाल किया जाता है। इस दिन खाना बनाकर पूजा की जाती है उसके बाद सूर्य भगवान को भोग लगाया जाता है। इस प्रकार पूजा के बाद व्रत सबसे पहले व्रत करने वाला व्यक्ति खाता है फिर परिवार के दूसरे सदस्य खाते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय







दीवाली के दिन करें 'यह उपाय', मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  नवंबर 13, 2020   12:05
  • Like
दीवाली के दिन करें 'यह उपाय', मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
Image Source: Google

माता लक्ष्मी को दीवाली के दिन प्रसन्न करने के लिए जब पूजा शुरू करें तो माता लक्ष्मी की आसनी में लकड़ी के आसन का प्रयोग करें और इस पर आप लाल रंग के बिछौना बिछाने के बाद माता की मूर्ति स्थापित करें, तो मां बेहद प्रसन्न होती हैं।

दीवाली के दिन धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी को भला कौन प्रसन्न नहीं करना चाहता है? हर कोई चाहता है कि वह माता को खुश करके अपनी सम्पन्नता का आनंद प्राप्त करे। ऐसे में अगर आप भी माता को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो शास्त्रों में इसके कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनके प्रयोग से आप माता की प्रसन्नtता के उपाय कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: वास्तु के अनुसार दीवाली में माँ लक्ष्मी का करें ऐसे स्वागत

पूजा की तैयारी

माता लक्ष्मी को दीवाली के दिन प्रसन्न करने के लिए जब पूजा शुरू करें तो माता लक्ष्मी की आसनी में लकड़ी के आसन का प्रयोग करें और इस पर आप लाल रंग के बिछौना बिछाने के बाद माता की मूर्ति स्थापित करें, तो मां बेहद प्रसन्न होती हैं।

माँ का प्रिय मंत्र

मां लक्ष्मी की पूजा 'लक्ष्मी महामंत्र' से करें तो मां लक्ष्मी अवश्य ही प्रसन्न होंगी। आप महालक्ष्मी के महामंत्र 'ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:' का कमलगट्टे की माला से कम से कम 108 बार जप करेंगे तो महालक्ष्मी आपसे प्रसन्न होंगी।

माता का शृंगार

मां लक्ष्मी का श्रृंगार आज के दिन बहुत सुंदर तरीके से करना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि मां लक्ष्मी को श्रृंगार में कमल और गुलाब के पुष्प जरुर चढ़ाएं। चूंकि कमल और गुलाब के सुगंधित पुष्प मां लक्ष्मी को बेहद प्रिय हैं, तो वहीं माता को लाल श्रृंगार करें।

मां का भोग

दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा में भोग का बहुत महत्व होता है। कहते हैं कि मां लक्ष्मी को जो चीजें प्रिय हैं, उनका भोग चढ़ाएं तो आपको मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आप इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा में खीर, मिठाई और हलवे जरूर भोग लगाएं। इससे माँ लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

इसे भी पढ़ें: धनतेरस पर राशि अनुसार खरीदें वस्तुएं, जानिए शुभ मुहूर्त

दीपक

दीवाली के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अपने घर के इन प्रमुख स्थानों पर दीपक अवश्य जलाना चाहिए। आप तिजोरी के पास, नल या पानी के स्रोत के पास दीपक जलाएं और घर के मुख्य दरवाजे पर दो दीपक लगाना ना भूलें। इसके अलावा किचन और भंडारे घर में भी आपको दीवाली के दिन दीपक अवश्य जलाना चाहिए। आप उस जगह भी दीपक अवश्य जलाएं, जहां आप अपने वाहन रखते हैं। कहा जाता है कि वाहन धन-संपदा के प्रतीक हैं और यहां पर रोशनी करने से मां लक्ष्मी की कृपा साल भर आपके ऊपर बनी रहती है।

इसके साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा करते हुए आपको यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मुख्य पूजा में सम्मिलित व्यक्ति सफेद या गुलाबी वस्त्र पहने, तो इसका फल शुभ दायक होता है।

दीवाली की रात पूजा में कमल के पुष्प चढ़ाएं तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। मां लक्ष्मी के पूजन में इत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है और कहा जाता है कि इत्र चढ़ाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आप के ऊपर बना रहता है।

लक्ष्मी पूजन में एक मुख्य दीपक का प्रयोग करें जो आकार में बड़ा हो। आप इस दीपक में 9 बातियाँ लगाएं और इस में घी डालकर रातभर के लिए जलने दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहती है।

- विंध्यवासिनी सिंह







वास्तु के अनुसार दीवाली में माँ लक्ष्मी का करें ऐसे स्वागत

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  नवंबर 12, 2020   15:38
  • Like
वास्तु के अनुसार दीवाली में माँ लक्ष्मी का करें ऐसे स्वागत
Image Source: Google

वास्तु के अनुसार दीवाली की पूजा से पूर्व अपने घर में बेकार पड़ी चीजों जिसमें पुराने फर्नीचर, पुराने कपड़े जो लम्बे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, टूटे -फूटे बर्तन, ख़राब हो चुके इलक्ट्रोनिक सामान जैसी चीज़ों को घर से निकाल दें क्योंकि इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है।

दीवाली माता लक्ष्मी के विशेष पूजन के लिए जानी जाती है। पर क्या आप यह जानते हैं कि दीवाली के दिन वास्तु के अनुसार किए गए कुछ काम आप को साल भर समस्याओं से दूर रख सकते हैं? साथ ही आपके घर में धन-धान्य की भी कमी नहीं होने देते हैं। ऐसे में हम आपको वास्तु के कुछ अचूक उपाय बताने वाले हैं, जिनके प्रयोग से मां लक्ष्मी का स्वागत भव्य एवं योग्य तरीके से कर पाएंगे।

इसे भी पढ़ें: दिवाली पर धनवर्षा के लिए आजमाएं यह टोटके, माता लक्ष्मी भी होंगी प्रसन्न

सफाई

दीवाली पर सफाई का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए आपका घर साफ-सुथरा और स्वच्छ होना अनिवार्य है। मां लक्ष्मी को साफ-सुथरी चीजें बेहद पसंद हैं और शास्त्रों में भी कहा गया है कि लक्ष्मी का निवास वहीं होता है, जहां सफाई होती है। इसीलिए पुराने समय से घर में दीवाली के समय साफ सफाई और रंगाई पुताई का चलन चलते आ रहा है। 

तो अगर आप भी माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो दीवाली से पूर्व ही अपने घर को अच्छी तरीके से साफ कर लें और कोने-कोने से गंदगी निकाल दें। अगर आपके घर का रंग फीका पड़ गया है तो आप अपने घर में रंगाई पुताई भी अवश्य करवाएं।

पुराने कबाड़ को बाहर निकलना

वास्तु के अनुसार दीवाली की पूजा से पूर्व अपने घर में बेकार पड़ी चीजों जिसमें पुराने फर्नीचर, पुराने कपड़े जो लम्बे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, टूटे-फूटे बर्तन, ख़राब हो चुके इलक्ट्रोनिक सामान जैसी चीज़ों को घर से निकाल दें क्योंकि इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है।

इसे भी पढ़ें: सुख-समृद्धि में और वृद्धि की कामना का महापर्व है धनतेरस

सफाई की चीजों को बदल दें

दीवाली के दिन घर के सफाई में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें जिनमें झाड़ू, पोछा, डस्टपैन यहां तक कि आप के मुख्य द्वार पर लगने वाले डोरमैट को भी संभव हो तो बदल दें। चूंकि साल भर तक इस्तेमाल की जाने के बाद यह चीजें लगभग पुरानी हो चुकी होती हैं और इन चीजों से घर की सफाई नहीं करनी चाहिए।

सेंधा नमक का प्रयोग

अपने घर में या ऑफिस में, चाहे जहाँ भी आप आर्थिक गतिविधियों को करते हैं वहां पर ऊर्जा की वृद्धि के लिए पोछे के पानी में सेंधा नमक मिलाकर पोंछा लगवाएं। इससे घर में या दफ्तर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सकारात्मकता का वास होता है।

लाइट का विशेष ध्यान

दीपावली का त्यौहार ऐसे ही प्रकाश का त्यौहार नहीं कहा जाता है। इस दिन विशेष तौर पर रोशनी की जाती है ताकि मां लक्ष्मी प्रसन्न हों। तो अगर आप धनवृद्धि चाहते हैं तो अपने दफ्तर या घर के उत्तर दिशा में नीले, पीले और हरे रंग के बल्ब लगाएं। इससे माता प्रसन्न होंगी। पूर्व दिशा में लाल, नारंगी रंग के बल्ब लगा सकते हैं या पीले बल्ब भी लगा सकते हैं। दक्षिण दिशा की बात करें तो आप दक्षिण दिशा में सफेद, जामुन और लाल रंग के बल्ब लगाएं। वहीं पश्चिम दिशा में पीले, नारंगी, गुलाबी या ग्रे कलर के बल्ब लगा सकते हैं। ऐसा करना वास्तु के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है और कहा जाता है कि इससे आपके घर या ऑफिस में ऊर्जा की वृद्धि होती है।

वंदनवार

दीवाली के दिन वंदनवार का लगाने का बहुत महत्व है।  वैसे तो हमारे यहां परंपरा रही है कि प्राकृतिक चीजों से वंदनवार का निर्माण किया जाए, जिसमें आम और अशोक के पत्तों तथा खूबसूरत फूलों से वंदनवार तैयार किया जाता है। लेकिन अगर आपके पास यह चीजें मौजूद नहीं हैं, तो आप बाजार से रेडीमेड वंदनवार ले आकर अपने मुख्य द्वार को बेहद खूबसूरत तरीके से अवश्य सजाएं। क्योंकि इसी मुख्य द्वार से मां लक्ष्मी आपके घर में प्रवेश करेंगी।

शुभ चिन्ह

दीवाली के दिन मुख्य द्वार पर शुभ चिन्हों या प्रतीकों को लगाने का भी वास्तुशास्त्र में जिक्र किया जाता है। इसमें आप स्वास्तिक, माता लक्ष्मी के पद चिन्ह, शुभ -लाभ या मां लक्ष्मी की प्रतिमा को अपने मुख्य द्वार पर लगा सकते हैं, जिससे माता प्रसन्न होंगी और आप पर कृपा बनाए रखेंगी।

इसे भी पढ़ें: धनतेरस के दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरी और यम की पूजा का महत्व

रंगोली

दीवाली के दिन मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने को लेकर वास्तु शास्त्र में यह कहा गया है कि इस दिन अगर मुख्य द्वार पर रंगोली का निर्माण किया जाए तो इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। आप चाहे तो फूलों या बाजार में मिलने वाले रेडीमेड पाउडर से एक खूबसूरत सी रंगोली मुख्य द्वार पर बना सकते हैं।  

दिया जलाना

साल भर आप चाहे जिस तरीके से दिए जलाते हों, लेकिन वास्तु शास्त्र में दीवाली के दिन दिए जलाने के कुछ नियम बताए गए हैं। वास्तु कहता है कि आप दीवाली के दिन 4 के गुणांक में दिए जलाएं, जिसमें  4, 8, 12, 16, 20 या 24 दिए हो सकते हैं।

बर्तन खरीदने के नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार दीवाली के दिन बर्तन की ख़रीददारी से बेहद शुभ परिणाम मिलते हैं। आप अपनी क्षमता के अनुसार सोने, चांदी या तांबे के बर्तन खरीद सकते हैं। अगर आपका बजट ज्यादा नहीं है तो इस दिन आप सोने या चांदी के सिक्के भी खरीद सकते हैं।

- विंध्यवासिनी सिंह