8000 KM दूर बैठा दोस्त भारत के लिए खोलेगा खजाना! इस गरीब देश से मोदी ने गैस भंडार की कौन सी डील कर ली?

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अभिनय आकाश । Apr 1 2026 1:17PM

अंगोला अफ्रीका का एक गरीब देश जरूर है लेकिन इस देश के पास 11 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस के भंडार हैं। भारत पहले से ही अंगोला के साथ थोड़ा बहुत गैस और तेल व्यापार करता रहा है। जिससे दोनों देशों के बीच कनेक्शन बना रहे। अब यही कनेक्शन भारत के काम आ रहा है।

ईरान अमेरिका जंग शांत होने की जगह आग पकड़ती जा रही है। पूरी दुनिया में इस वक्त दो समुद्री ट्रेड रूट्स को लेकर बवाल मचा है। स्टेट ऑफ होर्मूज के पास चल रही जंग से दुनिया पहले ही परेशान थी। लेकिन ईरान के समर्थन में यमन के हूती विद्रोहियों ने भी जंग में कदम रख दिया है। जिसकी वजह से रेड सी में मौजूद बाब अल मंदेव स्ट्रेट के बंद होने का खतरा भी पैदा हो गया है। आपको बता दें कि बाब अल मदेब स्ट्रेट बंद हो गया तो पूरा यूरोप बर्बाद हो सकता है। यह शिपिंग लिंक ही एशिया को यूरोप से जोड़ता है। बाब अल मंदेब स्टेट भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस से आने वाला ज्यादातर तेल यहीं से भारत पहुंचता है। लेकिन जिस वक्त इन दोनों समुद्री रास्तों को लेकर दुनिया दहशत में है। ठीक उसी वक्त भारत ने एक ऐसा रणनीतिक और कूटनीतिक दांव खेल दिया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। भारत अफ्रीका के एक गरीब मगर नेचुरल रिसोर्सेज से भरे देश में ऐसा खेल कर आया है जिसके बारे में एक-एक भारतीय को पता होना चाहिए। भारत ने एक तरफ तो एलपीजी और पेट्रोल की सप्लाई को जारी रखने का शानदार जुगाड़ ढूंढ लिया है। लेकिन इसी के साथ भारत ने दो बेहतरीन ट्रेड रूट्स भी तैयार कर लिए हैं। सबसे पहले जानते हैं कि भारत अब किस नए रूट से एलपीजी गैस ला रहा है। भारत ने एलपीजी गैस के लिए अफ्रीका महाद्वीप में एक नया कतर ढूंढ लिया है। भारत की सरकारी कंपनियां अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सुनानगोल से एलपीजी इंपोर्ट्स शुरू करने जा रही है। अंगोला अफ्रीका का एक गरीब देश जरूर है लेकिन इस देश के पास 11 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस के भंडार हैं। भारत पहले से ही अंगोला के साथ थोड़ा बहुत गैस और तेल व्यापार करता रहा है। जिससे दोनों देशों के बीच कनेक्शन बना रहे। अब यही कनेक्शन भारत के काम आ रहा है।

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भारत ने नए रास्तों की ओर हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया

भारत का 90% एलपीजी आयात ठप होने की कगार पर है। दिल्ली के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पीएम मोदी खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। स्थिति कंट्रोल में रहे उसके लिए लगातार मोदी सरकार काम कर रही है। तमाम देशों से बातचीत चल रही है। पर्दे के पीछे ईरान से बातचीत कर हॉर्मूज से धीरे-धीरे गेट खुलवाकर भारत के जहाज निकलवाए जा रहे हैं। लेकिन क्या तीन से चार चार से पांच जहाजों का आना काफी है? बिल्कुल नहीं। वहीं दूसरी तरफ युद्ध थमता नजर नहीं दिख रहा है बल्कि और भी भयानक होता जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या भारत के करोड़ों घरों के चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे या फिर भारत ने इस संकट का कोई ऐसा मास्टर प्लान तैयार कर लिया है जो दुनिया को हैरान करे। क्योंकि अब भारत की नजरें खाड़ी देशों से हटकर एक नए और अनजान दोस्त पर आकर टिक गई है। दरअसल जब हॉर्मूज के दरवाजे बंद हुए तो भारत ने अपने पुराने दोस्तों और नए रास्तों की ओर हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया। 

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अर्जेंटीना से लेकर अमेरिका और नॉर्वे तक से गैस मंगाना शुरू

भारत ने अर्जेंटीना से लेकर अमेरिका और नॉर्वे से लेकर रूस तक से गैस मंगानी शुरू कर दिया। लेकिन इसमें दूरी और समय बहुत बड़ी चुनौती है। अमेरिका से गैस आने में हफ्तों लग जाते हैं। जब देश में मांग चरम पर है। इतनी दूरी से आने वाली सप्लाई ऊंट के मुंह में जीरे जैसा सामान है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक और चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है। तो ऐसे में सरकार की पूरी मशीनरी इस कोशिश में जुटी है कि किसी भी कीमत पर सप्लाई चेन टूटने ना पाए। कतर और सऊदी अरब जैसे पारंपरिक ठिकानों से संपर्क कटने के बाद भारत की तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और गेल अब ग्लोबल मार्केट में एक ऐसे पार्टनर की तलाश कर रही हैं जो संकट के इस समय में भारत की ढाल बन सके। और यहीं से शुरू होता है एक नया अध्याय। एक ऐसा नाम जो अब तक सिर्फ तेल और हीरों के लिए जाना जाता था। लेकिन अब वो भारत की रसोई का रखरखाव करने जा रहा है। इस पूरे संकट के बीच एंट्री हुई है अफ्रीका के दिग्गज देश अंगोला की। जी हां, वही अंगोला जो नाइजीरिया के बाद अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। 

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अंगोला की सरकारी कंपनी के साथ बातचीत 

भारतीय ऊर्जा कंपनियां अब अंगोला की सरकारी कंपनी सोनान गोल के साथ हाई लेवल बातचीत कर रही हैं। और यह डील साधारण नहीं होगी। अगर यह बातचीत सफल हो जाती है तो अंगोला भारत को कुकिंग गैस सप्लाई करने वाला पहला मध्य अफ्रीकी देश बन जाएगा। लेकिन अंगोला ही क्यों? इसका जवाब छिपा है भूगोल और गणित। एक्सपर्ट का मानना है उत्तरी अमेरिका के मुकाबले अंगोला से भारत तक गैस पहुंचने में 10 से 15 दिन कम लगेंगे। यह 15 दिन भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होंगे। अंगोला के पास 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वित्त वर्ष 2025 में अंगोला ने भारत को पहले ही 924 मिलियन की एलएजी सप्लाई की है। अब इसी दोस्ती को एलपीजी तक ले जाने की तैयारी है। यह सिर्फ एक बिजनेस रील नहीं है बल्कि एक कूटनीतिक जीत है। जहां एक तरफ हॉर्मूज में बारूद बरस रहा है। हॉर्मूज का रास्ता बंद पड़ा है। तो वहीं दूसरी तरफ भारत ने हजारों मील दूर अफ्रीका में अपनी ऊर्जा सुरक्षा का नया किला तैयार कर लिया है। 8000 किमी की दूरी है हवाई। तो सोचिए कितना डिस्टेंस पड़ रहा है। भारत और अंगोला का रिश्ता आज का नहीं है। इसकी जड़े 1985 में जमी थी। आज अंगोला में करीब 8000 भारतीय वहां की अर्थव्यवस्था की रीड बने हुए हैं। चाहे वो रिटेल हो, खेती हो या हॉस्पिटिलिटी। भारत आज अंगोला का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच 4.2 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार भी होता है। हम उनसे सिर्फ गैस ही नहीं ले रहे हैं बल्कि हम उन्हें डिफेंस दवाएं कृषि तकनीक भी दे रहे हैं। हम साथ मिलकर अंतरिक्ष और माइनिंग के क्षेत्र में इतिहास रचने जा रहे हैं। 

क्या भारत इस युद्ध के स्थाय से बाहर निकल पाएगा? 

हालात तो यही बता रहे हैं कि अब भारत में स्थिति नॉर्मल हो जाएगी। हालांकि नॉर्मल स्थिति करने के लिए मोदी सरकार लगातार काम कर रही है। लोगों तक सप्लाई भी पहुंचा रही है। लेकिन संकट खड़ा ना हो। यही वजह है कि मोदी सरकार की डायवर्सिफिकेशन की नीति रंग ला रही है क्योंकि हॉरमूज बंद होने से भारत पर जो संकट खड़ा हो सकता है अंगोला उसका मरहम बनता दिख रहा है। भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि संकट कितना भी बड़ा क्यों ना हो अगर हौसला और विज़न सही हो तो रास्ते समंदर के बीच से ही निकल आते हैं। 

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