कैसे गिग इकोनॉमी भारतीय रोजगार में एक अहम भूमिका निभा रही है

कैसे गिग इकोनॉमी भारतीय रोजगार में एक अहम भूमिका निभा रही है

गिग का अर्थ है प्रत्येक असाइनमेंट के लिए पहले से निर्धारित भुगतान राशि। इस गिग इकोनॉमी में आप प्रति असाइनमेंट के आधार पर कमाई करते हैं। दरअसल, गिग इकॉनमी में फ्रीलान्स कार्य और एक निश्चित अवधि के लिये प्रोजेक्ट आधारित रोज़गार शामिल हैं।

किसी भी देश की जो स्थिति होती है वो दो बातों से पता चलती है। प्रजा कितनी सुरक्षित है और प्रजा कितनी संपन्न है। पिछले कुछ महीनों से आपने सुना होगा कि देश में आर्थिक मंदी आ गई है। देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है। इसे समझाने के लिए आपको अर्थव्ययवस्था से जुड़े कई भारी-भरकम आंकड़े भी बताए गए होंगे। और लगातार ऐसी बातें सुनकर आपको भी लगता होगा कि इसी वजह से आपकी जेब में भी आजकल पैसा न तो आ रहा है और न ही रुक रहा है। इस बार के बजट में देश की अर्थव्यवस्था की सेहत के नए आंकड़े जारी करेगी। आज आपको बजट से जुड़े कुछ रोचक जानकारी देंगे। पहले आपको बताते हैं देश में तेजी से बढ़ती एक अर्थव्यव्स्था के बारे में जिसे गिग इकानामी के नाम से जाना जाता है। अर्थव्यवस्था के आंकड़ों से जुड़ी भाषा इतनी मुश्किल होती है कि आम आदमी को ये अक्सर समझ में ही नहीं आती है। इसलिए आज आपको आसान भाषा में बताएंगे कि इसका आपके जीवन पर क्या असर होगा। 

क्या है गिग इकोनॉमी?

इंटरनेट एक बहुत शक्तिशाली व्यापार मंच है। बहुत से लोग नेटवर्क के माध्यम से अच्छी आमदनी सृजित करने में सक्षम हैं, आज डिजिटल होती दुनिया में रोज़गार की परिभाषा और कार्य का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। एक नई वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से उभरकर सामने आ रही है, जिसको नाम दिया जा रहा है 'गिग इकॉनमी’ का। गिग का अर्थ है प्रत्येक असाइनमेंट के लिए पहले से निर्धारित भुगतान राशि। इस गिग इकोनॉमी में आप प्रति असाइनमेंट के आधार पर कमाई करते हैं। दरअसल, गिग इकॉनमी में फ्रीलान्स कार्य और एक निश्चित अवधि के लिये प्रोजेक्ट आधारित रोज़गार शामिल हैं। आप यहां अपनी सहूलियत के अनुसार काम कर सकते हैं। गिग इकोनॉमी एक कर्मचारी को वे सारी सुविधाएं देती है, जो वह चाहता हैं, जैसे कि फ्लेक्सिबिलिटी, पसंदीदा काम, वर्क-लाइफ बैलेंस और अच्छी कमाई। इस प्रकार गिग इकोनॉमी प्रोफेशनल तनावपूर्ण नौकरी का एक पर्याय बनकर उभर रहा है। दरअसल, अमेरिका, जर्मनी, यूरोप में गिग अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में भी लगभग एक तिहाई श्रमिक स्वतंत्र उद्यमी बनने की दिशा में स्थानांतरित हो रहे हैं। गिग इकोनॉमी प्रोफेशन भारत और दुनिया भर में मुख्यधारा के पेशे, करियर या व्यापार के रूप में लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। इसके तहत दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग सोलो-प्रेन्योर या सूक्ष्म उद्यमी बन रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: IMF प्रमुख का दावा, भारत में आर्थिक सुस्ती अस्थायी,जल्द सुधार होने की उम्मीद

आज देश में भी बड़ी तादाद में फ्लेक्सीऑर्ग तथा गेट मी एक्सपट्र्स जैसे प्लेटफॉर्म से न सिर्फ युवा बल्कि प्रोफेशनल लोग भी तेजी से जुड़ रहे हैं। उभरता फील्ड: टेक्नोलॉजी के विकास के साथ लोगों को गिग अर्थव्यवस्था में अनेक तरह के रोजगार विकल्प मिल रहे हैं। यह लोगों को उनकी कार्यकुशलता के अनुसार कार्य के अनेक विकल्प देता है। उदाहरण के लिए फ्लेक्सिओरग डॉट कॉम, फ्रीलासंर डॉट कॉम जैसे पोर्टल लोगों को उनकी कार्यक्षमता के अनुसार कंपनियों के साथ कनेक्ट कर उनके कौशल से संबंधित सेवाओं वाले काम का अवसर प्रदान करते हैं। कम शिक्षित कार्यबल के लिए ग्रैब, उबर, ओला जैसी कंपनियां बड़ी संख्या में लोगों को मौका दे रही है। स्विगी, फूडपांडा में डिलीवरी ब्वॉय जैसे कार्य के मौके सामने आ रहे हैं। इसी तरह, अमेजन, फ्रिलपकार्ट, शॉपक्लू, ईबे और अलीबाबा जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स किसी को भी व्यापारी बनने में सक्षम बनाती हैं। 

एक अनुमान के मुताबिक, गिग इकोनॉमी प्रतिवर्ष 25-30 फीसद की दर से बढ़ रही है। मानव संसाधन फर्म टीमलीज के आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली ने पिछले छह महीनों (31 मार्च तक) में अपनी विशाल अर्थव्यवस्था में 560,600 लोगों को शामिल किया है। गौरतलब है कि यह आँकड़ा पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 298,000 (88% की छलांग) था। पिछले वर्ष यह आँकड़ा 2,98,000 था।

इसे भी पढ़ें: भारत के मुसलमान विश्व में किसी अन्य स्थान से अधिक सुरक्षित हैं: पीयूष गोयल

इस बीच, बेंगलूरु की गिग इकॉनमी में शामिल होने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या पिछले छह महीनों में 29% की मामूली बढ़त के साथ 194,400 से 252,300 हो गई है।

रोज़गार की तलाश में बढ़ता प्रवास और गिग इकॉनमी को बढ़ावा देने वाली कंपनियों द्वारा प्रशिक्षण देने में तत्परता ने इस क्षेत्र को काफी हद तक बढ़ावा दिया है।

इसे भी पढ़ें: अर्थव्यवस्था के सुधार में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका: अशोक गहलोत

गिग जॉब्स

एक अध्ययन के अनुसार, इस समय सबसे अधिक भुगतान करने वाले गिग जॉब्स में ब्लॉकचेन, सिचर्स, एथिकल हैकिंग, एडब्ल्यूएस, डाटा एनालिटिक्स तथा रोबोटिक्स आदि शामिल हैं, जहां प्रति घंटे की दर से 80-120 डॉलर तक मिलते हैं। हालांकि भारत में लेखन, अनुवाद, रचनात्मक कार्य, भर्ती, बिक्री, डिजिटल डिस्ट्रिब्यूशन, ब्रांडिंग, वास्तुकला, बीआइएम, लेखा, डाटा एनालिसिस, कंसल्टिंग सर्विसेज के विकल्प अधिक प्रचलित हैं। सबसे अच्छी बात है कि गिग प्रोफेशन में आप एक साथ कई संगठनों के साथ काम कर सकते हैं।

जिस तरह से एक सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह जैसे गिग अर्थव्यवस्था के फायदें हैं तो कुछ नुकसान भी हैं।

  • गिग अर्थव्यवस्था में कार्य करने के लिए किसी भी पर्सन को अपने-अपने क्षेत्र में एक्सपर्ट होना पड़ता है।
  • कंपनियाँ उन्हें ही चुनती हैं जो किसी विषय का ज्ञाता हो।
  • इसमें आपको पेमेंट प्रोजेक्ट पूरा होने तक ही मिलेंगे।
  • इस प्रकार के अस्थायी जॉब में कोई फिक्स सैलरी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, पेमेंट में उतार-चढ़ाव रहता है जिससे कि थोड़ी परेशानी भी आ सकती है।

इसे भी पढ़ें: बजट में होगी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कार्य योजना: जावड़ेकर

सरकार गिग इकॉनमी में काम करनेवाले कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अस्पतालों व डिस्पेंसरी में सब्सिडी वाली दरों पर सस्ती चिकित्सा सेवा मुहैया कराने पर विचार कर रही है। इससे गिग इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों को राहत मिल सकती है क्योंकि उन्हें अपने कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा की लागत को वहन नहीं करना होगा। संसद के पिछले सत्र में सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2019 लोकसभा में पेश किया था। इस विधेयक में गिग इकॉनमी में काम करने वाले कर्मचारियों को भारत में पहली बार सामाजिक सुरक्षा कवर देने का प्रस्ताव है। विधेयक में कहा गया है कि सरकार ईएसआईसी के तहत गिग कर्मचारियों को लाने के लिए एक योजना पेश करेगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'गिग कर्मचारियों को इलाज की सुविधा न्यूनतम उपभोग शुल्क के आधार पर देने की योजना है, न कि कर्मचारियों से अंशदान लेकर।'

आर्थिक चुनौतियों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करेंगी। यह उनका और Modi 2.0 का दूसरा बजट होगा। देश के आम लोगों, उद्यमियों एवं विश्लेषकों को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। सीतारमण ऐसे समय में यह बजट पेश करने वाली हैं, जब हाल में जारी पहले अनुमानों के मुताबिक देश की GDP Growth चालू वित्त वर्ष में पांच फीसद रहने की संभावना जतायी गई है। बजट में होने वाले ऐलान का आर्थिक गतिविधि पर व्यापक असर दिखाई देंगे। वित्त मंत्री की चुनौती दोहरी इसलिए है कि सरकारी खजाना खाली हो रहा है। ऐसे में राहत पैकेज के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। बजट शब्द का उल्लेख भले ही हर कोई करता है लेकिन क्या आपको मालूम है भारत के संविधान में 'Budget' का जिक्र तक नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में ‘Annual Financial Statement’ यानी 'वार्षिक वित्तीय विवरणी' का उल्लेख है। बजट शब्द की उत्पत्ति लातिन भाषा के शब्द बुल्गा से हुई है। बुल्गा का अर्थ होता है चमड़े का थैला। आजादी के बाद देश का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर, 1947 को आरके शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र घोषित किए जाने के बाद जॉन मथाई ने 29 फरवरी, 1950 को भारतीय गणराज्य का बजट पेश किया था। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने सबसे अधिक दस बार केंद्रीय बजट पेश किया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम इस मामले में दूसरे और प्रणब मुखर्जी तीसरे नंबर पर हैं। चिदंबरम ने नौ दफा जबकि मुखर्जी ने आठ मौकों पर संसद में केंद्रीय बजट पेश किया है।

ड्रीम बजट और ब्लैक बजट

  • एचडी देवगौड़ा की सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने वित्त वर्ष 1997-98 के बजट में व्यक्तिगत आय कर एवं कारपोरेट टैक्स में कटौती की थी। इसके अलावा कई तरह के आर्थिक सुधार किए गए थे। इसीलिए इस बजट को आज भी 'ड्रीम बजट' के नाम से जाना जाता है। 
  • तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण द्वारा 1973-74 के बजट को ब्लैक बजट कहा जाता है। बहुत अधिक घाटा होने के कारण उनके बजट को ब्लैक बजट कहा जाता है। 

भारत में 2022 तक 37 फीसदी नौकरियों के लिए नए स्किल की जरूरत पड़ेगी। फिक्की और नैसकॉम की रिपोर्ट ..फ्यूचर ऑफ स्किल एंड जॉब इन इंडिया.. के मुताबिक 2022 में 9 फीसदी भारतीय वर्कफोर्स ऐसे सेक्टरों में कार्यरत होंगे जो अभी मौजूद भी नहीं हैं। फिक्की की इस रिपोर्ट में भविष्य की नौकरियों और उनमें काम करने के लिए जरूरी स्किल्स के बारे में अध्ययन किया गया है। बहरहाल, गिग इकोनामी के रुप में भारत में रोजगार के रुप में एक नई अर्थव्यवस्था तेजी से उभर रही है। 

-अभिनय आकाश






Prabhasakshi logoखबरें और भी हैं...

राजनीति

झरोखे से...