लड़ाई-लड़ाई माफ करो! ट्रंप ने मानी हार, सबसे ताकतवर ग्रुप में भारत को किया शामिल

ट्रंप के दूत ने ऐलान किया है कि अमेरिका भारत को सबसे ताकतवर ग्रुप में शामिल करने वाला है। जी हां, अमेरिका ने भारत को अपनी सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी टेक्नोलॉजी रणनीति पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्योता दिया है।
12 जनवरी को सुबह शेयर मार्केट खुला और देखते ही देखते सेंसेक्स धड़ाम से नीचे गिर गया। इन्वेस्टर्स के चेहरे उतर गए। अब क्या होगा? टाइप बातें चलने लगी। लेकिन दोपहर के 1:00 बजते ही लगा जैसे किसी ने स्विच दबा दिया। सेंसेक्स में अचानक उछाल आ गया। मार्केट ने यू टर्न लिया और फिर गिरावट गायब। फिर सवाल आया कि अचानक ऐसा हुआ कैसे? तो वजह पता चली अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गर ने एक बयान दिया है। 12 जनवरी को नई दिल्ली में अपना पदभार संभालने के बाद सर्जियो ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा जरूरी देश कोई और नहीं है। जिसके बाद से चर्चाएं तेज हो गई। कहा जाने लगा कि अमेरिका और भारत के रिश्तों में आज एक ऐसा मोड़ आया है जिसे 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी पॉलिटिक्स का गेम चेंजर कहा जा रहा है। वही ट्रंप जिन्होंने टेरिफ की वजह से भारत के साथ अपने रिश्तों में खटास पैदा कर ली थी अब उसे सुधारने की कोशिश में जुट गए हैं। कोशिश इसलिए क्योंकि ट्रंप के दूत ने ऐलान किया है कि अमेरिका भारत को सबसे ताकतवर ग्रुप में शामिल करने वाला है। जी हां, अमेरिका ने भारत को अपनी सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी टेक्नोलॉजी रणनीति पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्योता दिया है। यह वही रणनीति है जो आने वाले समय में यह तय करेगी कि दुनिया में चिप्स कौन बनाएगा। एआई पर किसका कंट्रोल होगा और भविष्य की टेक्नोलॉजी किसके भरोसे रहेगी। तो सवाल यह है पैक सिलिका क्या है? डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को इसमें क्यों चुना? भारत को इससे क्या फायदा मिलेगा? और सबसे अहम सवाल इससे किस देश को सबसे ज्यादा मिर्ची लगेगी? सभी सवालों का आज एमआरआई स्कैन करेंगे।
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क्या है पैक्स सिलिका
बेसिकली पैक्स सिलिका एक न्यूली लॉन्च्ड यूएस लेड इंटरनेशनल कोलेशन है। अमेरिका ने इसे 12 दिसंबर 2025 को शुरू किया था। जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, UAE, इजरायल और ऑस्ट्रेलिया इसका हिस्सा है। एक प्रकार से ट्रस्टेड सिक्योर और इनोवेशन ड्रिवन ग्लोबल सप्लाई चेन को बिल्ड किया जा रहा है। मतलब एक सप्लाई चेन दुनिया भर में बिल्ड किया जा रहा है अलग-अलग देशों के साथ मिलकर। ताकि जो टेक्नोलॉजीस और मटेरियल हैं जो 21 सेंचुरी में 21 सेंचुरी की इकॉनमी में बहुत ज्यादा हेल्पफुल होते हैं। उदाहरण के लिए हम बात करते हैं सेमीकंडक्टर्स की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की। तो इसमें जो मटेरियल्स का इस्तेमाल होता है, जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, उसका सप्लाई चेन सिक्योर हो सके। वो ट्रस्टेड और सिक्योर तरीके से आए। और इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि चीन जिस तरह से अभी चीजें की थी। गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई के ऊपर रोक लगा दिया था। पूरी दुनिया खतरे में आ रही थी। क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई है, प्रोसेसिंग है, ये सब कुछ में चीन डोमिनेट करता है। अमेरिका को भी इस बात का डर हो गया कि चीन तो कभी भी इस चीज को रोक सकता है, इसका फायदा उठा सकता है। अब अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, भारत को भी शामिल किया जाएगा। अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत को अमेरिका की अगुवाई वाली रणनीतिक पहल पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा। इस का मकसद दुनिया की सिलिकॉन और तकनीकी सप्लाई चेन को सुरक्षित, मजबूत, आधुनिक बनाना है। इसमें अहम खनिज, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स और जुड़ी तकनीकें शामिल हैं।
क्यों जरूरी है पैक्स सिलिका ?
आज की आधुनिक तकनीकें जैसे AI, 5 जी, डेटा सेंटर, रोबॉटिक्स, सेमीकंडक्टर सिलिकॉन और दूसरे अहम खनिजों पर टिकी हैं। अभी इनका बड़ा हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। पैक्स सिलिका का मकसद इसी निर्भरता को कम करना है। इसके तहत भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी। संसाधन, तकनीक और निवेश को साझा किया जाएगा। साथ ही AI और नई तकनीकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद नेटवर्क तैयार किए जाएंगे।
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इसका नाम पैक्स सिलिका क्यों है?
लैटिन वर्ड है पैक्स। पैक्स का मतलब होता है पीस। मतलब कि चीजों को स्टेबल करना। एक प्रकार से जो इकोनॉमिक इंटरेस्ट है सबके जिन-जिन देशों के आपस में इकोनॉमिक इंटरेस्ट शेयर होते हैं वहां पर कोऑपरेटिव तरीके से चीजों को बिल्ड करना। तो पीस लेकर आना और सिलिका सिलिका तो सिंपल सी बात है सिलिकॉन की हम बात कर रहे हैं जो क्रिटिकल मिनरल्स हैं। जो कि सेमीकंडक्टर सोलर पैनल एआई चिप्स मॉडर्न टेक्नोलॉजी हर चीज में इस्तेमाल किया जाता है। तो एक प्रकार से ये कोलेशन फॉर पीस है जहां पर इकोनॉमिक और टेक्नोलॉजिकल कोपरेशन के थ्रू ये लाने की कोशिश की जा रही है। मतलब दुनिया भर में शांति लाने की कोशिश की जा रही है टेक्नोलॉजी और इकोनॉमिक कोपरेशन के थ्रू।
भारत के लिए क्यों खास है?
गोर ने ऐलान किया कि भारत को अगले महीने इस पहल में शामिल किया जाएगा, जिससे भारत-अमेरिका तकनीकी और सप्लाई चेन सहयोग को और आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। यह कदम विशेष रूप से भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करने में मदद करेगा।
सप्लाई चेन और रणनीतिक प्रभाव क्या है?
इसके जरिए अमेरिका एक नई तरह की आर्थिक सुरक्षा रणनीति बना रहा है, जिसमें टेक्नोलॉजी, देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ी होंगी। यह कोई पारंपरिक सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि तकनीक और उद्योग पर आधारित साझेदारी है। इसका उद्देश्य मिलकर प्रोजेक्ट करना, निवेश करना और रिसर्च करना है, ताकि एक भरोसेमंद टेक इकोसिस्टम बने और चीन के बढ़ते दबदबे को संतुलित किया जा सके।
चीन को मिर्ची लगनी तय
एआई और हाईटेक पर चीन की पकड़ कमजोर होगी। यही वजह है कि पैक सिलिका को अक्सर चीन के टेक एकाधिकार के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो पैक सिलिका सिर्फ एक टेक्नोलॉजी अलायंस नहीं बल्कि भविष्य की शक्ति संतुलन की लड़ाई है और इस लड़ाई में भारत अब सिर्फ दर्शक नहीं बल्कि मुख्य खिलाड़ी बन चुका है। अमेरिका के साथ यह नई साझेदारी भारत को टेक्नोलॉजी, रोजगार और रणनीतिक ताकत तीनों मोर्चों पर नई ऊंचाई पर ले जा सकती है। दोनों नेताओं की दोस्ती अब चिप्स और एआई की दुनिया में बदल रही है।
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