जयशंकर-विक्रम मिश्री और अमेरिकी अधिकारी, ट्रंप से बात के लिए भारत सरकार ने Lobbying Firm क्यों हायर किया?

पीएम मोदी ने देश की संसद में भी साफ साफ कहा था कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा। लेकिन बात सिर्फ लड़ाई रुकवाने के क्रेडिट से नहीं जुड़ी है। ट्रंप की भाषा पिछले कुछ महीनों से हिंदुस्तान के खिलाफ काफी आक्रमक रही है।
अभी तक दर्जनों दफा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच लड़ाई रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए खुद की पीठ थपथपा चुके हैं। पाकिस्तान उन्हें शुरुआत से इस मामले में क्रेडिट दे ही रहा है कि आपकी वजह से तो युद्ध रुका नहीं तो क्या अनहोनी हो जाती। पर भारत ने अब तक इस बात को नहीं माना है कि ट्रंप के दबाव की वजह से ही लड़ाई रुकी। भारत का आधिकारिक स्टैंड आज भी यही है कि हमारे पास पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर की पेशकश की गई। कॉल आया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बात हुई और यह लड़ाई रुकी। इसमें अमेरिकी सरकार की कोई दखलअंदाजी नहीं थी। पीएम मोदी ने देश की संसद में भी साफ साफ कहा था कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा। लेकिन बात सिर्फ लड़ाई रुकवाने के क्रेडिट से नहीं जुड़ी है। ट्रंप की भाषा पिछले कुछ महीनों से हिंदुस्तान के खिलाफ काफी आक्रमक रही है। उन्होंने रूस से प्रतिबंधों के बावजूद तेल खरीदने के लिए भारत की आलोचना की। भारत को डेड इकोनॉमी तक बता दिया। फिर यह भी कहा कि मैं भारत पर 200% टेरिफ लगाने की धमकी दे रहा था। इसके बाद भारत लड़ाई रोकने को मजबूर हुआ।
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भारत-पाक के बीच डिप्लोमेटिक वॉर
मई 2025 में दोनों देशों के बीच सीजफायर हो गया। फिर दोनों देशों के बीच एक डिप्लोमेटिक वॉर शुरू हुई। इसमें दोनों देश अपने-अपने एक्शन जस्टिफाई कर रहे थे। इसलिए भले ही लड़ाई रुके 7 महीने हो गए। नया साल भी आ गया। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा अब भी जारी है। कभी कोई नया खुलासा हो जाता है तो कभी किसी देश का नया दावा आ जाता है। अब नया खुलासा अमेरिका में काम करने वाली लॉबिंग फर्म की फाइलिंग से हुआ है। अमेरिका में कई देश लॉबिंग फर्म्स के जरिए अपने राजनीतिक हित साधते हैं। यह लॉबिंग फर्म्स अमेरिका के कानून में रजिस्टर की जाती हैं फॉर्मली और हर साल अपनी फाइलिंग करती हैं। इस फाइलिंग में खुलासा होता है कि कब कौन सी लॉबिंग फर्म ने किस देश के लिए क्या काम किया।
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लॉबिंग फर्म के जरिए बातचीत
इन ब्रोकर्स ने विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर,फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिश्री और ऐसे कई बड़े अधिकारियों के लिए मीटिंग्स और कॉल्स अरेंज करवाए। खुलासा हुआ है कि जब ऑपरेशन से दूर चल रहा था। उस समय भारत की सरकार अमेरिकी लॉबिंग फर्म के जरिए वहां के नेताओं और जिम्मेदार अधिकारियों से बात कर रही थी। अमेरिका की लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC ने FARA के तहत रिकॉर्ड में बताया कि उसने भारतीय एंबेसी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच कूटनीतिक संपर्क की सुविधा प्रदान की। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक फर्म ने कई ईमेल, फोन कॉल और मुलाकातें आयोजित कीं। बीते साल 24 अप्रैल को भारत सरकार ने इस फर्म के साथ करार किया था। रिकॉर्ड के मुताबिक, 10 मई को भारत पाक संघर्ष विराम के दिन एंबेसी ने वाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ, नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल और व्यापार प्रतिनिधि से संपर्क किया।
वर्षों पुरानी स्थापित प्रक्रिया
हालांकि भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में दूतावासों और बिजनेस संस्थानों की ओर से लॉबी करने वालों की सेवाएं लेना वर्षों पुरानी स्थापित प्रक्रिया है। हालांकि भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में दूतावासों, और बिजनेस संस्थानों की ओर से लॉबिंग करने वालों की सेवाएं लेना स्थापित प्रक्रिया है। भारतीय दूतावास 1950 से ऐसी फर्म्स की सेवाएं लेती रहा है। इसके अलावा विदेशी सरकारों की ओर से अमेरिका में लॉबिंग करना वहां FARA नियमों के तहत एक कानूनी तौर पर जानी-मानी परंपरा रही है। इस फर्म के साथ भारत सरकार ने बीते साल 24 अप्रैल को एक करार किया था।
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पाकिस्तान ने ट्रंप से मिलने के लिए खर्च किए 45 करोड़
पाकिस्तान पूरी तरह से मानता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो सीज फायर हुआ है उसको डोनाल्ड ट्रंप ने करवाया है। हालांकि तब उस समय खुलकर के बातें निकल के नहीं आई थी लेकिनअभी एक रिपोर्ट जारी की गई है अमेरिका के द्वारा जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इतना ज्यादा डर गया था कि किस प्रकार से उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से तत्काल में मीटिंग करने के लिए तत्काल में बैठक करने के लिए ₹45 करोड़ खर्च कर दिए और इसके अलावा वहां के अधिकारियों से चाहे वह विदेश मंत्री हो या फिर इसके अलावा वाइस प्रेसिडेंट हो, डोनाल्ड ट्रंप हो, उनसे मिलने के लिए उन्होंने लगभग 60 बार से भी ज़्यादा संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया था। इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में पैरवी और सार्वजनिक नीति प्रचार पर 9 लाख डॉलर खर्च किए। यह संस्थान पाकिस्तान स्थित एक थिंक टैंक है जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग से संबद्ध है। खुलासे के अनुसार, हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस एलएलसी को अक्टूबर 2024 में टीम ईगल कंसल्टिंग एलएलसी के उप-ठेकेदार के रूप में इस कार्य को करने के लिए पंजीकृत किया गया था। एफएआरए दस्तावेज़ में कहा गया है कि इस गतिविधि में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अमेरिकी सरकार से संपर्क करना शामिल था।
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