पैरलल सिनेमा और नए दौर की इंडी स्टोरीटेलिंग को समर्पित होगा 18वां एडिशन

Habitat Film Festival 2026
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फेस्टिवल में समानांतर सिनेमा के स्वर्णिम दौर को सम्मान दिया जाएगा, वहीं डिजिटल दौर के नए इंडिपेंडेंट फिल्मकार्स को भी मंच मिलेगा. दर्शकों को ऐसी फिल्मों का अनुभव मिलेगा जो समाज के जरूरी मुद्दों, मानवीय रिश्तों और व्यक्तिगत अनुभवों को बेहद संवेदनशील तरीके से पेश करती हैं।

भारत के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक, हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल (एचएचएफ) का 18वां एडिशन 15 से 24 मई 2026 तक इंडिया हैबिटैट सेंटर में आयोजित किया जाएगा। 10 दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में 20 भाषाओं की बेहतरीन भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन होगा, जिनमें 2025–2026 की चर्चित फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में शामिल होंगी।

इस साल का फेस्टिवल भारतीय सिनेमा की विविधता और बदलती कहानी कहने की शैली को खास तौर पर सामने लाएगा। महान फिल्मकार ऋत्विक घटक की रीस्टोर्ड क्लासिक फिल्मों से लेकर केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और असम जैसे राज्यों से उभर रही नई इंडी आवाज़ों तक, एचएफएफ 2026 दर्शकों को सिनेमा के कई रंगों से रूबरू कराएगा।

फेस्टिवल में समानांतर सिनेमा के स्वर्णिम दौर को सम्मान दिया जाएगा, वहीं डिजिटल दौर के नए इंडिपेंडेंट फिल्मकार्स को भी मंच मिलेगा। दर्शकों को ऐसी फिल्मों का अनुभव मिलेगा जो समाज के जरूरी मुद्दों, मानवीय रिश्तों और व्यक्तिगत अनुभवों को बेहद संवेदनशील तरीके से पेश करती हैं।

फिल्म स्क्रीनिंग्स के साथ-साथ निर्देशक, अभिनेता और फिल्मकारों के साथ इंटरैक्टिव सेशन और बातचीत भी आयोजित की जाएगी, ताकि दर्शक फिल्मों के पीछे की सोच और क्रिएटिव प्रोसेस को करीब से समझ सकें।

फेस्टिवल की खास आकर्षणों में रीस्टोर की गई कई अवॉर्ड विनिंग क्लासिक फिल्में शामिल होंगी। इनमें 'उमराव जान' की स्पेशल स्क्रीनिंग होगी, जो आशा भोसले की सदाबहार आवाज़ को श्रद्धांजलि देगी. साथ ही धर्मेंद्र और असरानी की यादगार फिल्म 'चुपके चुपके' की स्क्रीनिंग भी होगी, जिससे दर्शकों को एक बार फिर इस क्लासिक फिल्म का जादू देखने का मौका मिलेगा।

ऋत्विक घटक को समर्पित एक विशेष रेट्रोस्पेक्टिव में उनकी चार प्रसिद्ध फिल्मों— 'मेघे ढाका तारा', 'कोमल गांधार', 'सुबर्णरेखा' और 'युक्ति तक्को आर गप्पो' को भी दिखाया जाएगा। इसके अलावा समकालीन फिल्मों में 'मोहम', 'तिघी', 'द एलिसियन फील्ड' और 'वन्या' जैसी चर्चित फिल्में भी शामिल होंगी।

इस पर बातचीत करते हुए इंडिया हैबिटैट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश ने कहा, “हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल का 18वां एडिशन सिर्फ फिल्मों का उत्सव नहीं है, बल्कि उन आवाज़ों, विचारों और कहानियों का जश्न है जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती हैं। एचएचएफ हमेशा से एक ऐसा मंच रहा है जहां क्लासिक सिनेमा और नई सोच वाली कहानियां साथ आती हैं और दर्शकों को संवाद, चिंतन और कहानी कहने की कला को समझने का अवसर देती हैं।”

इस आयोजन में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) की शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएंगी। साथ ही इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईडीपीए) द्वारा तैयार विशेष फिल्म पैकेज, फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड (एफसीजी) द्वारा नॉमिनेटेड फिल्में और पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट (पीएसबीटी) की शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, ये फिल्में इंडिपेंडेंट और निजी अनुभवों से जुड़ी कहानियों को सामने लाएंगी।

फेस्टिवल के दौरान सिनेमा और एनीमेशन जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ बातचीत और मास्टरक्लास भी आयोजित किए जाएंगे। दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके फिल्मकार कामाख्या नारायण सिंह 'रिसर्च से रील तक: फीचर फिल्म कहानियों को गढ़ने की कला' विषय पर मास्टरक्लास लेंगे। वहीं एनीमेशन फिल्ममेकर ध्वनि देसाई और फिल्म समीक्षक व पत्रकार मुरतज़ा अली खान 'एनीमेशन स्टोरीटेलिंग: भारत और दुनिया का नज़रिया' विषय पर चर्चा करेंगे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में 1950 के दशक से लेकर आज तक के प्रतिष्ठित हिंदी फिल्म पोस्टर प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ दुर्लभ विंटेज विज्ञापन पोस्टर और अलग-अलग दौर के मशहूर फिल्म सितारों के ब्रांड एंडोर्समेंट भी देखने को मिलेंगे।

हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल सिर्फ एक फिल्म समारोह नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन की तरह है, जहां सिनेमा केवल समाज को दिखाता ही नहीं, बल्कि भविष्य की कल्पना भी करता है। हर साल की तरह इस बार भी यह फेस्टिवल छात्रों, फिल्म समीक्षकों, फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों के लिए एक खास मंच बनेगा।

ज़रुरी तारीखें और जानकारी

18वां हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल 15 से 24 मई 2026 तक आयोजित होगा. इसमें 2025–2026 की चुनी हुई फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में दिखाई जाएंगी। स्क्रीनिंग्स के साथ फिल्मकारों से बातचीत, रेट्रोस्पेक्टिव, वर्कशॉप, बुक डिस्कशन और प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। HFF हर साल निर्देशकों, समीक्षकों, छात्रों और सिनेमा प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है।

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