उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: 13 जनपदों में 293 गांव बाढ़ से प्रभावित, फूड पैकेट किए जा रहे वितरित

उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: 13 जनपदों में 293 गांव बाढ़ से प्रभावित, फूड पैकेट किए जा रहे वितरित

प्रदेश के वर्षा से प्रभावित जनपदों में सर्च एवं रेस्क्यू हेतु एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा पीएसी की कुल 59 टीमें तैनाती की गयी है, 6696 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगायी गयी है तथा 1310 मेडिकल टीमें लगायी गयी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ द्वारा 58151 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने वर्षा की स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि गत 24 घंटे में प्रदेश में 3.3 मिमी औसत वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा से 4.4 मिमी के सापेक्ष 75 प्रतिशत है। इस प्रकार प्रदेश में 1 जून, 221 से अब तक 716.8 मिमी औसत वर्षा हुए, जो सामान्य वर्षा 766.5 मिमी के सापेक्ष 94 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि शारदा-खीरी तथा क्वानों-गोंडा में खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है। प्रदेश में वर्तमान में 13 जनपदों में 293 गांव बाढ़ से प्रभावित है। प्रदेश के वर्षा से प्रभावित जनपदों में सर्च एवं रेस्क्यू हेतु एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा पीएसी की कुल 59 टीमें तैनाती की गयी है, 6696 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगायी गयी है तथा 1310 मेडिकल टीमें लगायी गयी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ द्वारा 58151 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। 

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प्रसाद ने बताया कि अब तक कुल 349657 ड्राई राशन किट वितरित किए गये हैं। अब तक कुल 642828 फूड पैकेट वितरित किए गए हैं। प्रदेश में 286363.58 मी त्रिपाल, पीने के पानी का पाउच 27868 ली, ओआरएस के 256952 पैकेट तथा क्लोरीन के 282715 टेबलेट वितरित किया गया है। प्रदेश में 1134 बाढ़ शरणालय तथा 1327 बाढ़ चौकी स्थापित की गयी है। प्रदेश में अब तक कुल 1886 पशु शिविर स्थापित किये गये हैं। विगत 24 घंटों में पशु टीकाकरण की संख्या 435 तथा अब तक कुल पशु टीकाकरण की संख्या 974344 है।

शैक्षिक सत्र-2021-22

वित्तीय वर्ष/शैक्षिक सत्र-2021-22 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति कक्षा 11-12 एवं अन्य दशमोत्तर कक्षाओं से सम्बन्धित पाठ्यक्रमों का मास्टर डाटाबेस तैयार करने, सत्यापन, लॉक करने हेतु संशोधित समय-सारिणी निर्गत की गयी है।

प्रमुख सचिव समाज कल्याण के रविन्द्र नायक ने इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश जारी किये हैं जो इस प्रकार है। प्रदेश में स्थित मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों द्वारा मास्टर डाटा बेस में सम्मिलित होने के लिए आवेदन करने की कार्यवाही शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जाना, जिला समाज कल्याण अधिकारी से पासवर्ड प्राप्त करना (नवीन संस्थायें) एवं मास्टर डाटा में सम्पूर्ण सूचनायें भरकर/अपलोड करके डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करना। समस्त संस्थाओं द्वारा पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार, पाठ्यक्रमवार कुल सीटों की संख्या, सक्षम स्तर से निर्धारित शुल्क, पाठ्यक्रमवार पूर्णांक (सेमेस्टर की दशा में दो सेमेस्टर के अंकों को मिलाते हुये), पाठ्यक्रमवार एफिलियेटिंग एजेन्सी/विश्वविद्यालय के नाम आदि सूचनाओं को अंकित/अद्यतन करके डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करने हेतु 27 सितम्बर 2021 तक, प्रदेश के बाहर की नवीन शासकीय ;ळवअजद्ध व शासकीय सहायता ;ळवअज ।पकमकद्ध प्राप्त संस्थायें योजनाधिकारी (वाह्य प्रदेश छात्रवृत्ति) निदेशालय, समाज कल्याण, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से पासवर्ड प्राप्त करने हेतु आनलाइन एवं हार्डकापी स्पीड पोस्ट (निदेशक, समाज कल्याण, उत्तर प्रदेश, 3-प्राग नरायन रोड, कल्याण भवन, लखनऊ-226001) से भेजकर पासवर्ड प्राप्त करने हेतु 27 सितम्बर 2021 तक निर्धारित किया गया है।

इसी क्रम में योजनाधिकारी (वाह्य प्रदेश छात्रवृत्ति) से पासवर्ड प्राप्त करके (नवीन संस्थायें) मास्टर डाटा में सम्पूर्ण सूचनायें भरकर/अपलोड करके डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करना। समस्त संस्थाओं (नवीन एवं पूर्व से पासवर्ड प्राप्त पुरानी संस्थाओं) द्वारा पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार, पाठ्यक्रमवार कुल सीटांे की संख्या, सक्षम स्तर से निर्धारित शुल्क, पाठ्यक्रमवार पूर्णांक (सेमेस्टर की दशा में दो सेमेस्टर के अंकों को मिलाते हुये), पाठ्यक्रमवार एफिलियेटिंग एजेन्सी/विश्वविद्यालय के नाम आदि सूचनाओं को अंकित करने हेतु 30 सितम्बर 2021 तक, प्रदेश के अन्दर सम्बन्धित विश्वविद्यालय एवं अन्य एफिलियेटिंगएजेन्सी के नोडल अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक (कक्षा 11-12 हेतु) द्वारा शिक्षण संस्था, पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार, सीटों की संख्या एवं फीस आदि को अंकित करना तथा उसकी प्रमाणिकता को ऑनलाईन सत्यापित करने हेतु 28 सितम्बर 2021 से 11 अक्टूबर 2021 तक, प्रदेश के अन्दर सम्बन्धित विश्वविद्यालय एवं अन्य एफिलियेटिंग एजेन्सी के नोडल अधिकारी पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार एवं अंकित फीस आदि की प्रमाणिकता को संबंधित शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा ऑनलाईन सत्यापित करने हेतु 12 अक्टूबर 2021 से 29 अक्टूबर 2021 तक निर्धारित किया गया है।

इसी क्रम में योजनाधिकारी, वाह्य प्रदेश छात्रवृत्ति (अन्य प्रदेशों में स्थित शासकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों हेतु) द्वारा सभी संस्थानों के प्रकार, पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार, सीटों की संख्या एवं फीस का विवरण प्राप्त अभिलेखों के आधार पर आनलाइन लाक किये जाने हेतु 01 अक्टूबर 2021 से 29 अक्टूबर 2021 तक, जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के सहयोग से सभी संस्थानांे के प्रकार, पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम का प्रकार, सीटों की संख्या एवं फीस का विवरण (विश्वविद्यालय/अफिलियेटिंग एजेन्सी द्वारा लॉक की गयी सीट संख्या एवं फीस से अधिक लॉक न की जाय) आनलाइन लाक किया जाना एवं जनपदीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति से पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम के प्रकार, सक्षम स्तर से अनुमोदित सीटों की संख्या तथा सत्यापित फीस का आनलाइन प्रारूप पर अनुमोदन प्राप्त करने हेतु 12 अक्टूबर 2021 से 29 अक्टूबर 2021 तक निर्धारित किया गया है।

पं. दीनदयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजनान्तर्गत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में बड़े नगर निकायों की तर्ज पर छोटे नगर निकायों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वर्ष 2018 में महत्वपूर्ण एवं जनहित की योजना ’पडित दीनदयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजना’ शुरूआत की गई। योजना के तहत प्रतिवर्ष प्रदेश के सभी 75 जिलों से एक नगर पंचायत का चयन आदर्श नगर पंचायत के रूप में होता है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष हर जिले से प्रस्ताव मंगाया जाता है। इसके बाद चयनित निकायों में सभी घरों में शुद्ध पेयजल की पाइप वाटर सप्लाई की व्यवस्था, सेप्टेज मैनेजमंेट की व्यवस्था, आंतरिक गलियों, सड़कों में डामर रोड, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, साइट पटरी, दोनों साइड नालियों, जल निकासी, फुटपाथ का निर्माण, सुधार, सड़कों के निर्माण से पूर्व विद्युत तथा टेलीफोन के तारों को अंडरग्राउंड करना, सड़क-मार्ग में प्रकाश की व्यवस्था आदि विकास कार्य कराए जाते हैं।

नगर विकास विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक इस योजनान्तर्गत कुल 290 नगर निकायों का चयन किया जा चुका है। चयनित निकायों को अब तक कुल 485.15 करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में इस योजनान्तर्गत रूपया 200 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।

फखरूद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी की कार्यकारिणी परिषद का गठन

उत्तर प्रदेश सरकार ने फखरूद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी की कार्यकारिणी परिषद का गठन कर दिया है। इस कार्यकारिणी परिषद में गैर सरकारी व सरकारी सदस्यों को मिलाकर 11 सदस्य होंगे। कार्यकारिणी परिषद के गैर सरकारी सदस्य में से अध्यक्ष के रूप में अतहर सगीर जैदी ‘‘तूरज‘‘ तथा पदेन सदस्य में से कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में प्रमुख सचिव/सचिव, भाषा विभाग या उनके द्वारा नामित नामिनी होंगें।

भाषा विभाग के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार द्वारा इस सम्बन्ध में आवश्यक आदेश जारी कर दिया गया है। कार्यकारी परिषद के अन्य पदेन सदस्यों में प्रमुख सचिव/सचिव शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव/सचिव वित्त विभाग, निदेशक दूरदर्शन, निदेशक आकाशवाणी अथवा इन विभागों के नामित नामिनी के साथ सचिव, फखरूद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी परिषद के पदेन सदस्य होंगे। कार्यकारिणी परिषद के गैर सरकारी सदस्यों में से प्रयागराज की डा जहां आरा, सहारनपुर के इ मोहम्मद अनवर, कासंगज के तारिक सिद्दीकी तथा देवरिया के डा शम्स परवेज सदस्य होंगे।

बुलन्दशहर खण्ड गंगा नहर मरम्मत कार्य

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बुलन्दशहर खण्ड गंगा नहर बुलन्दशहर के अन्तर्गत राजवाहों पर निर्मित पुलियों के निर्माण हेतु प्राविधानित धनराशि 25,000 लाख रूपये में से 774.99 लाख की वित्तीय स्वीकृति तथा चालू वित्तीय वर्ष में परियोजना के लिए 02 करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

इस संबंध में विशेष सचिव सिंचाई मुश्ताक अहमद की ओर से 21 सितम्बर, 2021 को आवश्यक शासनादेश जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि सक्षम स्तर से तकनीकि स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात ही कार्य शुरू कराया जाये। विभाग द्वारा नियमानुसार समस्त आवश्यक वैधानिक आपत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस सक्षम स्तर से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य कराया जाये।

इसके अलावा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूरा कराने के साथ ही धनराशि व्यय करते समय शासन द्वारा समय-समय पर जारी सुसंगत शासनादेशों का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाये। धनराशि का व्यय स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की अनियमितता के लिए विभाग की जिम्मेदारी होगी। स्वीकृत धनराशि का उपयोग स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये। ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर समस्त उत्तरदायित्व विभाग का होगा। 

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पुल/पुलियों की मरम्मत एवं पुनर्स्थापना हेतु धनराशि अवमुक्त

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा जनपद गाजीपुर में जमानिया पम्प नहर प्रणाली पर सिंचाई खण्ड वाराणसी के अन्तर्गत नहरों पर पुल/पुलियों की मरम्मत एवं पुनर्स्थापना की परियोजना हेतु प्रावधानित धनराशि 10,000 लाख रूपये में से परियोजना के कार्यों हेतु 78.23 लाख रूपये अवमुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

इस संबंध में विशेष सचिव सिंचाई मुश्ताक अहमद की ओर से 21 सितम्बर, 2021 को आवश्यक शासनादेश जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि सक्षम स्तर से तकनीकि स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात ही कार्य शुरू कराया जाये। विभाग द्वारा नियमानुसार समस्त आवश्यक वैधानिक आपत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस सक्षम स्तर से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य कराया जाये।

इसके अलावा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूरा कराने के साथ ही धनराशि व्यय करते समय शासन द्वारा समय-समय पर जारी सुसंगत शासनादेशों का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाये। धनराशि का व्यय स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की अनियमितता के लिए विभाग की जिम्मेदारी होगी। स्वीकृत धनराशि का उपयोग स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये। ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर समस्त उत्तरदायित्व विभाग का होगा।

लोअर दौराला डिस्ट्रीब्यूटरी सिस्टम

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा वीआरवी की परियोजना के अन्तर्गत लोअर दौराला डिस्ट्रीब्यूटरी सिस्टम हेतु प्राविधानित धनराशि में से चालू वित्तीय वर्ष में 01 करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

इस संबंध में विशेष सचिव सिंचाई मुश्ताक अहमद की ओर से 21 सितम्बर, 2021 को आवश्यक शासनादेश जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि सक्षम स्तर से तकनीकि स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात ही कार्य शुरू कराया जाये। विभाग द्वारा नियमानुसार समस्त आवश्यक वैधानिक आपत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस सक्षम स्तर से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य कराया जाये।

इसके अलावा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूरा कराने के साथ ही धनराशि व्यय करते समय शासन द्वारा समय-समय पर जारी सुसंगत शासनादेशों का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाये। धनराशि का व्यय स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की अनियमितता के लिए विभाग की जिम्मेदारी होगी। स्वीकृत धनराशि का उपयोग स्वीकृत परियोजनाओं पर ही किया जाये। ऐसा न किये जाने पर किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर समस्त उत्तरदायित्व विभाग का होगा।

महिला आयोग में पोषण अभियान

उ.प्र. राज्य महिला आयोग में ’’पोषण अभियान से सम्बन्धित जागरूकता कार्यक्रम’‘ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन उ.प्र. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम की अध्यक्षता में किया गया। उक्त कार्यशाला का शुभारम्भ आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम, मा.उपाध्यक्ष (द्वय) सुषमा सिंह, अंजु चौधरी, सदस्य सचिव अर्चना गहरवार, कमलेश गुप्ता, उप निदेशक, निदेशालय बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उ.प्र. एवं डॉ. रिचा पाण्डेय यूनीसेफ द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

जागरूकता कार्यक्रम में कमलेश गुप्ता, उप निदेशक, निदेशालय बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उ.प्र. द्वारा महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित पोषण सम्बन्धी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गयी, जिसमें सैम/मैम बच्चों का चिन्हांकन एवं पौष्टिक भोजन की जन जागरूकता, पोषण वाटिका एवं पौधारोपण, सुपोषण के लिये योगा एवं आयुष का महत्व, स्थानीय खाद्य पदार्थ पर जन जागरूकता तथा अनुपूरक पोषाहार का वितरण व बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त आंगनवाडी केन्द्रों के माध्यम से अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा (विभागीय), अनुपूरक पोषाहार (विभागीय), प्रतिरक्षण सेवायें (अन्तर्विभागीय), स्वास्थ्य जांच (अन्तर्विभागीय), पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा (अन्तर्विभागीय), निर्देशन एवं सन्दर्भन सेवायें (विभागीय), गुणवत्ता परक अन्नप्राशन व गोदभराई योजनाओं के सम्बन्ध में सम्पूर्ण जानकारी दी गयी व साथ ही कार्यशाला में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से उपस्थित मुख्य सेविकाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने पोषण मिशन में किये गये कार्यों से सम्बन्धित अपने अनुभव साझा किये।

अध्यक्ष द्वारा महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित पोषण सम्बन्धी विभिन्न योजनाओं की जानकरी हेतु इस कार्यशाला का आयोजन कराया गया जिससे आयोग के पदाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं एवं बच्चियों को इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सके। सदस्य सचिव मती अर्चना गहरवार द्वारा बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद कर बैठक का समापन किया गया। कार्यक्रम में उ.प्र. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम, उपाध्यक्ष (द्वय) सुषमा सिंह, अंजु चौधरी तथा सदस्यगण अनीता सिंह, सुमन चतुर्वेदी, सुनीता बंसल, निर्मला द्विवेदी, राखी त्यागी, निर्मला दीक्षित, मीना कुमारी, डॉं. कंचन जायसवाल, प्रभा गुप्ता, पूनम कपूर, ऊषारानी, अनीता सचान, शशि मौर्या, कुमुद वास्तव, रामसखी कठेरिया, संगीता तिवारी, सुमन सिंह, अंजू प्रजापति, अर्चना, मिथिलेश अग्रवाल, रंजना शुक्ला, वित्त एवं लेखाधिकारी स्वाती वर्मा, डॉ. रिचा पाण्डेय यूनीसेफ एवं कमलेश गुप्ता, उप निदेशक, निदेशालय बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उ.प्र. सहित अन्य गणमान्य पदाधिकारी/अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों को अपना धान बेचने से पूर्व पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा

खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में किसानों को अपना धान बेचने से पूर्व पंजीकरण अनिवार्य होगा, ताकि उनकी भूमि, उसमें बोये गये धान व बैंक अकाउंट का सत्यापन समय किया जा सके एवं उनको क्रय केंद्रों पर धान विक्रय में असुविधा न हो। धान क्रय के 72 घंटे के अंदर, उनके खाते में धान का मूल्य पीएफएमएस के माध्यम से प्राप्त हो सके। धान क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री हेतु किसानों को खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। 

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खाद्य एवं रसद विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पंजीकरण किसान द्वारा स्वयं अथवा जन सूचना केंद्र के माध्यम से अथवा साइबरकैफे के माध्यम से कराया जा सकेगा। किसानों का पंजीकरण, उनके आधार संख्या एवं पंजीकरण के समय किसान के आधार लिंक मोबाइल नंबर पर प्रेषित ओटीपी के आधार पर किया जाएगा। धान बिक्री के समय क्रय केन्द्रों पर किसान के स्वयं उपस्थित न होने की दशा में किसान द्वारा पंजीकरण के समय अपने परिवार के सदस्य का विवरण एवं आधार नम्बर फीड कराना अनिवार्य होगा।

हमारी हिंदी विषय पर कार्यक्रम का आयोजन कल

उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान द्वारा कल 23 सितम्बर, 2021 को हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत सायं 5.00 बजे से 1589, इंदिरा नगर स्थित परिसर में “हमारी हिंदी“ विषय पर दो सत्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रथम सत्र में “हमारी हिंदी“ विषय पर विचार गोष्ठी एवं द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राजनारायण शुक्ल की अध्यक्षता में सम्पन्न किया जायेगा।

यह जानकारी आज यहां उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक मो० कलीम ने दी। उन्होंनें बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अश्विनी त्यागी, (सदस्य, विधान परिषद), एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित रहेंगे। कवि सम्मेलन में कवि अमित शर्मा के संयोजन एवं संचालन में आगरा के एलैश अवस्थी, लखनऊ के पीयूष मालवीय, प्रयागराज के कार्तिक शुक्ला, बरेली की कवयित्री एकता भारती, तथा गोंडा के मनीष सिंह काव्य पाठ करेंगे।

जलवायु परिवर्तन विषय पर 45 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन

राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा (वर्ष 2021-22) में जर्मन डेवलपमेन्ट को-ऑपरेशन के सहयोग से प्रदेश में जलवायु परिवर्तन एवं अनुकूलन हेतु क्षमता संवर्द्धन विषयक 45 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें राज्य स्तरीय 05 प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टी0ओ0टी0) तथा जनपद स्तरीय 40 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिसमें 20 प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला कृषक समूहों एवं 20 प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायतीराज संस्थाओं के चयनित प्रतिनिधियों के लिए आयोजित होंगे।

ग्राम्य विकास विभाग के अन्तर्गत दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार बुन्देलखण्ड के जनपदों में 03 राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टी0ओ0टी0) एवं 07 जनपद स्तरीय औषधीय एवं सगंध पौधों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इसके अलावा क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान, झाँसी के कृषि प्रक्षेत्र पर एक एकड़ क्षेत्रफल में सीमैप के तकनीकी सहयोग से औषधीय एवं सगंध पौधो की आधुनिकतम उत्पादन तकनीकी एवं प्रोसेसिंग का प्रदर्शन वित्तीय सहयोग से प्रशिक्षणार्थियों की क्षमता संवर्द्धन हेतु विकसित किया जाना है।

औषधीय एवं सगंध पौधों के प्रशिक्षण की राज्य स्तरीय टी0ओ0टी0 में जिला उद्यान अधिकारी/वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक, कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक, अनुभवी कृषक एवं उद्यमी प्रतिभाग करेंगे तथा जनपद स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला कृषक समूहों के सदस्य, कृषि/उद्यान विभाग की योजनाओं के लाभार्थी तथा प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

प्रदेश की ग्राम पचायतों हेतु विकसित किये जा रहे ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान ;ळच्क्च्द्ध में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को ग्राम पंचायत विकास योजना में समेकित करने के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम का माड्यूल विकसित करने के साथ ही संस्थान द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

उप्र उर्दू अकादमी की कार्यकारिणी परिषद के गठन हेतु 24 सदस्य नामित

उत्तर प्रदेश सरकार ने उप्र उर्दू अकादमी की कार्यकारिणी परिषद के गठन हेतु 24 सदस्यों को नामित कर दिया है। गोरखपुर के चौधरी कैफुलवरा कार्यकारिणी परिषद के गैर सरकारी सदस्य/चेयरमैन होगें। प्रमुख सचिव/सचिव, भाषा विभाग, उ0प्र0 शासन अथवा उनके प्रतिनिधि परिषद में पदेन सदस्य के रूप में होंगे।

भाषा विभाग के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार द्वारा इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिया गया है। कार्यकारिणी परिषद में अन्य पदेन सदस्यों में प्रमुख सचिव/सचिव, वित्त विभाग, उ0प्र0 शासन अथवा उनके प्रतिनिधि, प्रमुख सचिव/सचिव, शिक्षा विभाग उ0प्र0 शासन अथवा उनके प्रतिनिधि, कार्यकारी पूर्णकालीन अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान लखनऊ, निदेशक, उर्दू शिक्षा निदेशालय, लखनऊ, सचिव, उ0प्र0 उर्दू विभाग अकादमी, लखनऊ, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, पण्डित दीन दयाल विश्वविद्यालय, गोरखपुर तथा विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ होंगे।

इसके अतिरिक्त गैरसरकारी सदस्य के रूप में सै नदीम अख्तर बुलन्दशहर, सै0 इतरत हुसैन, वाराणसी, एम0 आजाद अन्सारी, सहारनपुर, डॉ0 माहे तिलक सिद्दीकी, कानपुर, राजा कासिम, बाराबंकी, सलीम बेग, कानपुर तथा डॉ0 रिजवाना, लखनऊ, डॉ0 शादाब आलम, लखनऊ, मीशम जै़दी, नोएडा, हाजी जहीर अहमद, मुरादाबाद, मोहम्मद इस्लाम सुल्तानी, बरेली तथा नवाब कम्बर कैसर, लखनऊ को नामित कि5या गया है। राज्य सरकार यह नामांकन कभी भी बिना कारण बताये निरस्त कर सकती है।

पीठासीन अधिकारियों को दिया गया अतिरिक्त प्रभार

प्रदेश सरकार ने प्रदेश में स्थापित 06 औद्योगिक न्यायाधिकरणों एवं 20 श्रम न्यायालयों में से 03 श्रम न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों के रिक्त पदों पर बाधित हो रहे कार्य के दृष्टिगत शासकीय कार्यहित में अन्तरिम/वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उनके नजदीकी जनपदों के पीठासीन अधिकारियों के कार्य निस्तारण हेतु अतिरिक्त प्रभार दिया है।

अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन सुरेश चन्द्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इन पीठासीन अधिकारियों में औद्योगिक न्यायाधिकरण (5) मेरठ के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति वीरेन्द्र कुमार द्वितीय को श्रम न्यायालय मेरठ, औद्योगिक न्यायाधिकरण (4), आगरा के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति अनन्त कुमार को श्रम न्यायालय आगरा तथा श्रम न्यायालय गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के पीठासीन अधिकारी प्रदीप कुमार गुप्ता को श्रम न्यायालय (2), गाजियाबाद को इन श्रम न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों की नियमित नियुक्ति होने तक अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। संबंधित पीठासीन अधिकारी अतिरिक्त कार्य प्रभार वाले श्रम न्यायालयों में प्रति सप्ताह 03 दिन कार्य करेंगे। इन अधिकारियों को अतिरिक्त कार्य प्रभार हेतु अलग से कोई भी पारिश्रमिक/भत्ता देय नहीं होगा।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से उद्यमों को मिल रही है आर्थिक मजबूती

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का मुख्य उद्देश्य है कि देश के लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों का राजस्व बढ़ाने के लिए सब्सिडी के तौर पर आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा खाद्य पदार्थों में गुणवत्ता और सुरक्षा की चीजों का ध्यान रखा जाये। इस योजना के माध्यम से लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इसमें जिलों में लघु वन उद्योगों का भी ध्यान रखा जायेगा। इस योजनान्तर्गत दिए गये कर्ज पर गारण्टी की सुविधा का लाभ नेशनल क्रेडिट गारण्टी ट्रस्टी कम्पनी द्वारा किया जायेगा। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लॉकडाउन होने से देश के उद्योगों और राजस्व में कमी आना स्वाभाविक है। लोगों के बेरोजगार होने पर देश की आर्थिक व्यवस्था पर भी फर्क पड़ा। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इन्हीं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का शुभारम्भ किया है। इस योजनान्तर्गत कोई भी छोटे, लघु, सूक्ष्म उद्यमी लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवसाय का राजस्व भी बढ़ा सकेंगे। जब लोगों के उद्योग समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे तो प्रदेश के कुशल/अकुशल श्रमिकों को रोजगार भी प्राप्त होंगे।

प्रदेश में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएम एफएमई) का संचालन 60ः40 के अनुपात में केन्द्रांश: राज्यांश से किया जा रहा है। वर्ष 2020 से संचालित इस योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा प्रदेश में लगभग 42000 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना/उन्नयन/विस्तारीकरण हेतु 05 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश का परिव्यय धनराशि रू0 1700 करोड़ प्राविधानित किया गया है, जिससे प्रदेश में लगभग रू0 5 हजार करोड़ के पूंजी निवेश का अनुमान है। प्रदेश में इसके सापेक्ष 70 प्रतिशत मौजूदा उद्यमों का उन्नयन/विस्तारीकरण किया जायेगा तथा 30 प्रतिशत नए उद्यमों की जनपद हेतु चयनित ओडीओपी के अनुसार स्थापना करायी जायेगी। 

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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अन्तर्गत व्यक्तिगत एवं समूह दोनों प्रकार के लाभार्थी पात्र हैं। इसके अन्तर्गत निजी सूक्ष्म उद्यमों एवं समूहों को अनुमन्य परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अधिकतम रू0 10 लाख क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी का प्राविधान है। कार्यशील पंूजी और छोटे उपकरणों के क्रय हेतु प्रति एसएचजी सदस्य को लोन के रूप में रू0 40,000 सीड कैपिटल भी प्रदान किए जाने का प्राविधान है। प्रदेश में योजनान्तर्गत बेसलाइन स्टडी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और जनपदवार ओडीओपी का अन्तिम रूप से चयन कर लिया गया है। जनपदों में फील्ड स्तर पर कार्य संचालन हेतु 79 जनपदीय रिसोर्स पर्सन का इम्पैनेलमेण्ट किया गया है एवं 284 इकाईयों का डीपीआर स्वीकृति हेतु भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है।

प्रदेश के 75 जनपदों में असंगठित क्षेत्र में स्थापित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन हेतु स्टेट लेवेल अपग्रेडेशन प्लान (एसएलयूपी) स्टडी कराया जा रहा है। प्रदेश के 10 मण्डल मुख्यालयों पर योजनान्तर्गत 10 इन्क्यूबेसन सेन्टर/कॉमन फैसिलिटी सेन्टर की स्थापना हेतु धनराशि रू0 33.26 करोड़ के व्यय प्रस्ताव की स्वीकृति भारत सरकार द्वारा प्रदान कर दी गयी है। वर्ष 2021-22 में इस योजना के क्रियान्वयन हेतु धनराशि रू0 400 करोड़ प्राविधानित किया गया है, जिससे प्रदेश में 9301 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन का लक्ष्य है। योजनान्तर्गत 645 एस0एच0जी0 मैम्बर्स को फैसिलिटेट करने हेतु राज्य नोडल एजेंसी द्वारा अब तक सीड कैपिटल की धनराशि रू0 1.70435 करोड़ राज्य आजीविका मिशन (एस0आर0एल0एम0) को अन्तरित की जा चुकी है। प्रदेश सरकार की इस योजना से लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को प्राणवायु मिल रही है। उद्यमों की स्थापना एवं संचालन से लोगों को रोजगार भी मिलेगा और प्रदेश भी समृद्ध की ओर बढ़ेगा।





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