NDA सरकार के 7 साल: कितना बरकरार है मोदी मैजिक ?

NDA सरकार के 7 साल: कितना बरकरार है मोदी मैजिक ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील पर लोग कोरोना योद्धाओं के लिए ताली और थाली बजाते हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लोगों ने कोरोना संकट के दौरान कोरोना योद्धाओं का उत्साहवर्धन करने के लिए दिवाली तक मना डाली। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही जादू है जो अब भी लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को सत्ता में आए 7 साल पूरे हो रहे है। 2019 के आम चुनाव में भाजपा को 2014 के मुकाबले भी ज्यादा सीटें हासिल हुई थी। ऐसे में मोदी सरकार 2.0 को सत्ता में आए 2 साल पूरे हो रहे है। पिछले 2 सालों की बात करें तो पहला साल काफी उपलब्धियों भरा रहा लेकिन दूसरे साल में कोरोना संकट ने उपलब्धियों पर कहीं ना कहीं ब्रेक लगा दिया। हालांकि पिछले साल कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए फैसलों से सरकार की खूब वाहवाही हुई। अब तक नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार खुद को मजबूत सरकार के तौर पर पूरे विश्व में उभारने में कामयाब रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण और बड़े फैसले लिए हैं जिससे कि इसकी मजबूती का प्रमाण मिलता है। राजनीतिक तौर पर आज जब मोदी सरकार के 7 साल पूरे हो रहे हैं तो एक सवाल हम सबके मन में खूब उठ रहे होंगे। सवाल यह है कि आज मोदी की लोकप्रियता कितनी बरकरार है? क्या 2019 में जो हमने मोदी लहर देखा, क्या वह अब भी बरकरार है? 2019 के आम चुनाव के बाद मोदी मैजिक कितना बरकरार है?

2019 के आम चुनाव के बाद से मोदी मैजिक कितना बरकरार है, आज हम इसी पर बात करेंगे। 2019 के आम चुनाव के बाद से महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव हुए। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना ने एक साथ चुनाव लड़ा था। भाजपा-शिवसेना गठबंधन को भारी बहुमत भी हासिल हुई थी। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदली और वहां शिवसेना ने दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार बना ली। महाराष्ट्र के चुनाव में यह जरूर देखने को मिला कि कहीं ना कहीं मोदी का मैजिक बरकरार है। तभी तो एनडीए गठबंधन को भारी सफलता हाथ लगी थी। हरियाणा में भाजपा को नुकसान जरूर हुआ। हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताबड़तोड़ चुनावी प्रचार किए थे। लेकिन पार्टी अपने बलबूते सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी। उसे दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा का साथ लेना पड़ा। झारखंड में रघुवर दास के नेतृत्व में चल रही सरकार दोबारा चुनाव नहीं जीत सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी झारखंड में खूब चुनाव प्रचार किए थे। झारखंड और हरियाणा के चुनावी नतीजों पर बात करें तो ऐसा लगता है कि मोदी का मैजिक कारगर साबित नहीं हुआ। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि मोदी अभी उतने ही इन राज्यों में लोकप्रिय हैं जितना 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान थे। हरियाणा और झारखंड के नतीजे वहां के स्थानीय सरकार की नाराजगी की वजह से थी।

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दिल्ली में 2020 में हुए विधानसभा के चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। लेकिन इसके लिए भी एक तर्क दिया गया कि दिल्ली वाले हमेशा से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार चाहते है और स्थानीय स्तर पर केजरीवाल बढ़िया कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें मौका देने के पक्ष में है। दिल्ली चुनाव के बाद से देश में कोरोना संक्रमण बढ़ने लगा और हमने देखा किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरा देश एकजुट हो गया। यह मोदी मैजिक ही है कि प्रधानमंत्री की अपील पर लोग घरों से बाहर नहीं निकलते हैं। जनता कर्फ्यू का सख्ती से पालन करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील पर लोग कोरोना योद्धाओं के लिए ताली और थाली बजाते हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लोगों ने कोरोना संकट के दौरान कोरोना योद्धाओं का उत्साहवर्धन करने के लिए दिवाली तक मना डाली। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही जादू है जो अब भी लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है।

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पिछले साल कोरोना संकट के दौरान हमने देखा किस तरह से प्रवासियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके कामकाज बंद हो गए। उन्हें अपने गृह राज्य की ओर लौटना पड़ा। लौटने में कई तरह की व्यवधान पैदा हुए। लोगों ने कहा कि आने वाले चुनाव में भाजपा को बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा क्योंकि उनसे मजदूर नाराज हैं। मजदूरों को कई हजार किलोमीटर पैदल चलकर अपने गृह राज्य वापस जाना पड़ा। विपक्ष का आरोप रहा कि लॉकडाउन को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई और जल्दबाजी में फैसला लिया गया जिससे की आम जनता को नुकसान झेलना पड़ा। इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बिहार चुनाव के दौरान खूब देखने को मिली। बिहार देश का ऐसा सबसे बड़ा राज्य है जहां के लोग दूसरे राज्यों में जाकर कामकाज करते हैं। जाहिर सी बात है कि लॉकडाउन के दौरान बिहार के बहुत सारे प्रवासियों को संकट का सामना करते हुए गृह राज्य लौटना पड़ा होगा। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए तो वह सभी को हैरान करने वाले थे। भले ही बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा था। लेकिन हर जगह लोकप्रियता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखी जा रही थी। खुद नीतीश की पार्टी के लोग भी मानते हैं कि 15 वर्षों के शासनकाल का anti-incumbency होने के बावजूद अगर बिहार में सत्ता मिली है तो कहीं ना कहीं वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से मिली है। हमने देखा किस तरह से लोगों में नीतीश कुमार को लेकर नाराजगी थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन नाराजगी को दूर करने में कामयाब रहे। भाजपा और एनडीए ने शानदार जीत हासिल की। खुद मंच से नीतीश कुमार यह कहते रहे कि मुझे पता है लोग प्रधानमंत्री जी को ज्यादा सुनना चाहते हैं ऐसे में मैं कम बोल रहा हूं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता उज्जवला योजना के जरिए महिलाओं को दी गई गैस सिलेंडर, कोरोना संकट के दौरान गरीबों और मजदूरों को मुफ्त में दी गई अनाज की वजह से खूब बढ़ी है। बिहार चुनाव में जीत के बाद भाजपा की ओर से साइलेंट वोटर का खूब जिक्र किया जा रहा था। यह साइलेंट वोटर वह महिलाएं थी जिन्हें उज्ज्वला योजना और मुफ्त अनाज योजना का लाभ मिला था और इन्हीं महिलाओं ने बिहार में भाजपा के लिए बढ़-चढ़कर वोट दिया। 

कोरोना संकट के कारण पूरे विश्व की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वी शेप में आगे बढ़ रहा था। एक बार फिर से भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी थी। इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही दिया जा रहा था। जिस तरह से कोरोना संकट के दौरान 20 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का ऐलान किया गया उससे उन लोगों को काफी फायदा हुआ जिन्हें लॉकडाउन के दौरान नुकसान का सामना करना पड़ा था। 2021 में पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए। असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल। तमिलनाडु और केरल में भारतीय जनता पार्टी के लिए कुछ खास नहीं हो पाया। इन राज्यों के लिए पहले भी कहा जा रहा था कि यहां भाजपा का वजूद नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की वजह से इन राज्यों में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूती भी मिली है जिसका हम ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में असर भी देखा है। लेकिन असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितने लोकप्रिय हैं इस बात का अंदाजा हमें इस चुनाव में लग गया। असम में कांग्रेस ने गठबंधन के जरिए भाजपा के समक्ष मजबूत चुनौती पेश की थी। लेकिन कहीं न कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की वजह से पार्टी असम में वह एकतरफा चुनाव जीतने में कामयाब रही। पुडुचेरी में पहली बार भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में ऊभरी है। वहां एनडीए का शासन हुआ और उसमें भाजपा भी शामिल है।

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार पर कई विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का यह दावा है कि मोदी मैजिक अब खत्म हो रहा है। दूसरी ओर भाजपा और कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि वह मोदी का मैजिक ही है जिसकी वजह से पश्चिम बंगाल में भाजपा 3 सीटों से 77 सीटों पर पहुंची है। यह अलग बात है कि 200 प्लस के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी भाजपा 100 सीट भी नहीं ला पाई। लेकिन यह बात भी सही है कि उसने कांग्रेस और लेफ्ट के वजूद को पश्चिम बंगाल में खत्म करते हुए दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और आज पश्चिम बंगाल में एक मजबूत विपक्ष के रूप में काम कर रही है। यह सब नरेंद्र मोदी की ही मैजिक का कमाल है कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जहां एक मजबूत नेता पहले से ही ममता बनर्जी के रूप में मौजूद है वहां भाजपा अपना वजूद बनाने में कामयाब हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो वह मोदी मैजिक ही है जिसका अभी विपक्ष के पास कोई तोड़ नहीं निकल पाया है। विपक्ष एक होकर भी मोदी को शिकस्त नहीं दे पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को लोग ध्यान से सुनते हैं, गंभीरता से लेते हैं।





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