Loksabha में अमित शाह बोले- निगमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है दिल्ली सरकार

Loksabha में अमित शाह बोले- निगमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है दिल्ली सरकार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली सरकार पर राजधानी के तीनों नगर निगमों के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तीनों निगमों की नीतियों और संसाधनों में विसंगतियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार इनके एकीकरण के लिए विधेयक लेकर आई है।

संसद के दोनों सदनों में आज सामान्य रूप से कामकाज हुआ। हालांकि आज भी महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर विपक्ष हमलावर रहा। इन सबके बीच आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में दिल्ली नगर निगम संशोधन (विधेयक) 2022 को चर्चा एवं पारित होने के लिए रखा। इस दौरान अमित शाह ने दिल्ली सरकार और कांग्रेस पर जबरदस्त तरीके से निशाना साधा। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार पर हमले किए। कांग्रेस का दावा है कि केंद्र एक बार फिर से दिल्ली पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, राज्यसभा में जनजातीय मंत्रालय से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा करते हुए भारतीय जनता पार्टी की एक महिला सदस्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगवान कृष्ण से करते हुए कहा कि उनके पास भी 16 कलाएं हैं। इसके साथ ही सरकार ने बताया कि जम्मू कश्मीर सरकार ने ऐसा कोई नया नियम अधिसूचित नहीं किया है जिसके तहत उस सरकारी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त किया जा सके जो स्वयं या उसके परिवार के सदस्य आतंकवाद के आरोपी लोगों के प्रति ‘‘सहानुभूति’’ रखते हैं। 

लोकसभा की कार्यवाही

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली सरकार पर राजधानी के तीनों नगर निगमों के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तीनों निगमों की नीतियों और संसाधनों में विसंगतियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार इनके एकीकरण के लिए विधेयक लेकर आई है। शाह ने लोकसभा में यह भी कहा कि 10 वर्ष पहले दिल्ली नगर निगम को ‘आनन-फानन’ में तीन निगमों में विभाजित करने के पीछे तत्कालीन कांग्रेस सरकार की मंशा अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ‘‘एक ही परिवार, एक ही पार्टी सत्ता भोगती रहे इसलिए आनन-फानन’’ में निगम को तीन हिस्सों में बांट दिया गया था। दक्षिण दिल्ली से सांसद बिधूड़ी ने कहा कि 2011-12 में दिल्ली नगर निगम के विभाजन के समय केंद्र और दिल्ली दोनों जगह कांग्रेस सरकार की थी। 

इसे भी पढ़ें: ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार से संसद पहुंचे नितिन गडकरी, बोले- जल्द भारत में आएगी ये गाड़ी

कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के तीनों नगर निगमों के एकीकरण के लिए सरकार द्वारा संसद में विधेयक लाने का कदम दिल्ली पर फिर से नियंत्रण पाने का प्रयास है और यह विधेयक लाना उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। लोकसभा में ‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि 1991 में दिल्ली में विधानसभा बनाकर उसे विधायी अधिकार दिये गये थे, लेकिन केंद्र सरकार, दिल्ली को संचालित करने की शक्ति फिर अपने पास वापस ले रही है। 

लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (ओआरओपी) का विषय उठाया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीति के चलते आज लाखों पूर्व सैनिक ओआरओपी के लाभ से वंचित हैं। शून्यकाल इस विषय को उठाते हुए चौधरी ने कहा कि 17 फरवरी, 2014 को सदन में तत्कालीन संप्रग सरकार ने कहा था कि कोश्यारी समिति की सिफरिशों के अनुसार ओआरओपी आरंभ किया जा रहा है। 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि करीब सात करोड़ वरिष्ठ नागरिक करीब दो वर्षों से बिना किसी छूट के ट्रेनों से यात्रा कर रहे हैं और अभी इस छूट को बहाल करने की कोई योजना नहीं है। 

सरकार ने बुधवार को संसद में कहा कि केंद्रीय विद्यालयों में कोटा व्यवस्था के बारे में कोई फैसला सभी सांसदों के साथ विमर्श के बाद किया जाएगा। शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। 

वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार का चार्टर्ड एकाउंटेंट, लागत एवं संकर्म लेखापाल तथा कंपनी सचिव से संबंधित तीनों संस्थानों के कामकाज में हस्तक्षेप करने या इन्हें कमतर करने का कोई इरादा नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। लोकसभा में ‘चार्टर्ड एकाउंटेंट, लागत एवं संकर्म लेखापाल और कम्पनी सचिव (संशोधन) विधेयक, 2021’ पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि चार्टर्ड एकाउंटेंट, लागत एवं संकर्म लेखापाल तथा कंपनी सचिव से संबंधित संस्थान अलग-अलग काम करते हैं।

इसे भी पढ़ें: तीन इकाइयों के कामकाज का अध्ययन कर रहे, उसके बाद लेंगे कोई फैसला: पीयूष गोयल

राज्यसभा की कार्यवाही

रोजगार सुरक्षा को वर्तमान में एक बड़ी चुनौती बताते हुए राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर कामगारों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया वहीं सत्ता पक्ष ने दावा किया कि विकास के क्रम में हर क्षेत्र में रोजगार सृजित हुए हैं जिससे कामगारों को लाभ हुआ है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम के सदस्य एम षणमुगम ने कहा कि संविदा पर नियुक्ति के बाद कामगार का शोषण होता है और अपने रोजगार को खोने की आशंका के चलते इसे बर्दाश्त करना उसकी मजबूरी होती है। उन्होंने कहा कि आज यह चल रहा है। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि चार श्रम संहिता में अब समस्त कानून आ गए हैं। दो संहिताओं पर अभी विचार जारी है।

राज्यसभा ने बुधवार को एक विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें झारखंड में भोगता समुदाय को अनुसूचित जातियों (एससी) की सूची से हटाकर अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में डालने तथा कुछ अन्य समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने के प्रावधान हैं। उच्च सदन ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा पेश किए गए संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। 

राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस के एक सदस्य ने जम्मू एवं कश्मीर के विस्थापित कश्मीरी पंडितों का मुद्दा उठाया और उनके लिए सभी राज्यों से समान वित्तीय सहायता नीति बनाने का आह्वान किया। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में पलायन की पीड़ा झेलनी पड़ी। 

इसे भी पढ़ें: मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा :सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का सम्मान करें

राज्यसभा में बुधवार को भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) जैसी कोल इंडिया की सहायक इकाइयों द्वारा वित्तपोषित स्कूलों और उसमें काम करने वाले शिक्षकों की बिगड़ती आर्थिक हालत का मुद्दा उठाया। शून्यकाल के दौरान उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए शिवसेना सदस्य संजय राउत ने स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं पर चिंता जताई और सरकार से उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

सरकार ने बुधवार को संसद में कहा कि 2016 से 2020 के बीच देश में बाल विवाह के सामने आए मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने एक प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।