Annapurna Devi ने बेटों में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता के संस्कार विकसित करने पर दिया जोर

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने घरेलू हिंसा के मामलों में संवेदनशीलता और कड़े कानूनों के साथ सामाजिक बदलाव को जरूरी बताया है। राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हर पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाना साझा लक्ष्य होना चाहिए।

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बुधवार को घरेलू हिंसा का सामना कर रही महिलाओं के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समानता के मूल्य बेटों में बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा घरेलू हिंसा के मामलों में संरक्षण और न्याय व्यवस्था मजबूत करने के लिए आयोजित संरक्षण अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को समाप्त करने के लिए कड़े कानूनों के साथ समाज में सांस्कृतिक और व्यवहारगत बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा साझा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है..हर घर सुरक्षित हो, हर व्यवस्था संवेदनशील हो और हर पीड़ित को त्वरित न्याय मिले।’’ संरक्षण अधिकारी 2005 के घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त अधिकारी होते हैं और संकट में फंसी महिलाओं को शुरुआती स्तर पर सहायता उपलब्ध कराते हैं।

अन्नपूर्णा देवी ने सम्मेलन में जारी पुस्तक ‘फ्रॉम वॉयस टू प्रोटेक्शन’ का भी उल्लेख किया और कहा कि जब कोई महिला अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती है तो पूरी व्यवस्था को उसकी सुरक्षा और सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने संरक्षण अधिकारियों से कहा कि पीड़ित महिला की पहली बात सुनने से लेकर जोखिम का समय पर आकलन, प्रभावी सुरक्षा योजना और घरेलू हिंसा रिपोर्ट तैयार करने तक, हर कदम बेहद महत्वपूर्ण है। मामले की लगातार निगरानी भी जरूरी है, ताकि महिला के खिलाफ हिंसा दोबारा न हो।

मंत्री ने कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भूमिका अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विकास की दिशा तय करने वाली प्रमुख शक्ति बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कानून मौजूद होने के बावजूद उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करना जरूरी है। उन्होंने संरक्षण अधिकारियों के काम को एक मजबूत और संवेदनशील सेतु बताया, जो पीड़ित महिलाओं को न्याय व्यवस्था से जोड़ता है।

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