Vrindavan में Hariyali Teej पर स्वर्ण हिंडोले में विराजे बांके बिहारी, उमड़ी भारी भीड़

Banke Bihari
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हरियाली तीज के अवसर पर वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस विशेष दिन ठाकुर जी महाराज चांदी और सोने से बने ऐतिहासिक स्वर्ण हिंडोले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने पूरे वृंदावन क्षेत्र को चार सुपर जोन और 18 सेक्टरों में विभाजित किया है।

हरियाली तीज के अवसर पर शनिवार को वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री बांके बिहारी जी महाराज स्वर्ण हिंडोले पर विराजकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देते हैं। श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि स्वर्ण हिंडोले की यह परंपरा देश की आजादी के समय से चली आ रही है।

वर्तमान स्थान पर इस हिंडोले को स्थापित हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं। इतिहासकार प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, 1920 के दशक में मंदिर के खजाने में हुई लूट के बाद बचे सोने से हिंडोला तैयार कराने का निर्णय लिया गया था। वाराणसी के दो स्वर्णकारों ने वृंदावन में एक लाख तोला चांदी और 10 हजार तोला सोने से इस हिंडोले का निर्माण किया था।

इसे भी पढ़ें: Mehndi Trends 2026: जाल वर्क से लेकर फ्लोरल शेडिंग तक, Hariyali Teej के लिए बेस्ट हैं ये Pakistani Designs

इसे बनवाने की जिम्मेदारी भक्त हरगू लाल जी ने ली थी और उन्होंने अपनी ओर से भी सोना उपलब्ध कराया था। उन्होंने बताया कि इस बार होली के रंगों से हिंडोले के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत कराई गई है। हरियाली तीज के अवसर पर पूरे मंदिर को हरे रंग से सजाया जाता है और ठाकुर जी को भी हरे वस्त्र धारण कराए जाते हैं।

हिंडोले के दोनों ओर दो-दो गोपियां चंवर और पान का प्रसाद लेकर खड़ी रहती हैं। हिंडोले के पीछे सेज-सज्जा की जाती है, जिसमें शीशा और सोलह श्रृंगार की सामग्री रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हिंडोले पर झूलने से राधा रानी का श्रृंगार बिगड़ जाता है, इसलिए उनके लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है।

ज्योतिषाचार्य केशव आचार्य ने बताया कि हरियाली तीज बदलते मौसम के लिए भगवान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूर्ण हुई थी और उन्होंने केवल बेलपत्र का सेवन किया था। इस अवसर पर अधिकांश मंदिरों में प्रसाद के रूप में घेवर और फेनी अर्पित की जाती है।

इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026 पर पहली बार रख रही हैं व्रत? जानिए Puja Vidhi और Rituals का धार्मिक महत्व

श्री राधा-रमण मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के सप्त देवालयों में झूलन उत्सव 15 दिनों तक मनाया जाता है, जिसका समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। शुरुआती तीन दिनों तक शाम के समय ठाकुर जी सोने और चांदी के झूले में दर्शन देंगे। इसके बाद अलग-अलग प्रकार के झूले सजाए जाएंगे।

मदन मोहन मंदिर के सेवायत विजय किशोर गोस्वामी ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज का आयोजन एक दिन का होता है, जबकि सप्त देवालयों में 15 दिनों तक सोने-चांदी के झूले सजाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों की रचनाओं और ‘हरि भक्ति विलास’ में भी सावन में झूलन लीला का वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं।

इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026: अखंड सौभाग्य के लिए किया जाता है हरियाली तीज का पर्व, जानिए पूजन विधि और महत्व

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र को चार सुपर जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष योजना बनाई गई है।

उत्सव के दिन वृंदावन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़