नक्सलवाद के खात्मे को लेकर भूपेश बघेल ने अमित शाह को लिखा पत्र, रोजगार के अवसर बढ़ाने की दी सलाह

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 16, 2020   15:46
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नक्सलवाद के खात्मे को लेकर भूपेश बघेल ने अमित शाह को लिखा पत्र, रोजगार के अवसर बढ़ाने की दी सलाह

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा कि बस्तर में नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान में जारी रणनीति के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाए

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की सलाह दी है, ताकि युवा नक्सली समूहों में शामिल न हों। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को यहां बताया कि बघेल ने शाह को पत्र लिखकर बस्तर अंचल में नक्सलवाद की समस्या को जड़ से समाप्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बघेल ने पत्र में लिखा कि बस्तर में नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान में जारी रणनीति के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाए, ताकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बेरोजगार लोग विवश होकर नक्सली समूहों में शामिल न हों। 

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बघेल ने कहा कि बस्तर में लौह अयस्क प्रचुरता से उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि बस्तर में स्थापित होने वाले इस्पात संयंत्रों को 30 प्रतिशत छूट पर लौह अयस्क उपलब्ध कराया जाए, तो वहां सैकड़ों करोड़ रूपए का निवेश होगा तथा हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़े भाग में अभी तक ग्रिड की बिजली नहीं पहुंच पाई है और सौर उर्जा संयंत्रों की बड़ी संख्या में स्थापना से ही आमजन की उर्जा आवश्यकता की पूर्ति तथा उनका आर्थिक विकास संभव है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि वनांचलों में लघु वनोपज, वन औषधियां तथा अनेक प्रकार की उद्यानिकी फसलें होती हैं, लेकिन उनके प्रसंस्करण एवं विक्रय की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को इनका समुचित लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों में प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड चेन के लिए उदारतापूर्वक अनुदान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन से सिंचाई तथा उर्जा क्षमता के विकास से बस्तर अंचल के बड़े भाग का कायाकल्प हो जाएगा और इस परियोजना की स्थापना के लिए भी केंद्र सरकार से सहायता अपेक्षित है। 

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मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि इस समय राज्य के आकांक्षी जिलों को केंद्र सरकार की ओर से अलग से कोई आर्थिक अनुदान नहीं दिया जा रहा। राज्य के बस्तर अंचल के सातों जिले आकांक्षी जिलों के रूप में चिह्नित हैं और उचित यह होगा कि लोगों की आजीविका के साधनों के विकास के लिए जिलाधिकारियों को कम से कम 50-50 करोड़ रूपए की राशि प्रतिवर्ष दी जाए। बघेल ने लिखा कि उन्होंने नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों के संबंध में इस वर्ष तीन सितम्बर को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर शाह का ध्यान आकर्षित किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आपने संज्ञान लेकर छत्तीसगढ़ के लिए वर्ष 2018 में आवंटित की गई सात अतिरिक्त सीआरपीएफ बटालियन में से पांच बटालियन बस्तर क्षेत्र में तत्काल तैनात किए जाने का निर्देश दिया।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्षों में भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों को सुरक्षा बल मुहैया कराने, उनके आधुनिकीकरण, बुनियादी ढांचा निर्माण तथा संचार साधनों के विकास के लिए उदारतापूर्वक सहायता उपलब्ध कराई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 

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उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाए, ताकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बेरोजगार लोग विवश होकर नक्सली समूहों में शामिल न हो। मुख्यमंत्री बघेल ने लिखा कि यदि इन सुझावों का क्रियान्वयन किया जाए, तो आगामी कुछ ही वर्षों में बस्तर अंचल से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने शाह से इन सभी गतिविधियों के संचालन के लिए केंद्र की ओर से अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया।





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किसानों के लिए खुशखबरी! झारखंड में नौ लाख किसानों का 50 हजार तक का कर्जा माफ होगा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   08:27
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किसानों के लिए खुशखबरी! झारखंड में नौ लाख किसानों का 50 हजार तक  का कर्जा माफ होगा

झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने देश के 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंगलवार को यहां घोषणा की कि राज्य सरकार अपने वादे के अनुरूप इस वर्ष 31 मार्च तक राज्य के लगभग नौ लाख किसानों के 50 हजार रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर देगी।

रांची। झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने देश के 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंगलवार को यहां घोषणा की कि राज्य सरकार अपने वादे के अनुरूप इस वर्ष 31 मार्च तक राज्य के लगभग नौ लाख किसानों के 50 हजार रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर देगी। राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस पर यहां परेड की सलामी लेने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही।

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राज्यपाल मुर्मू ने कहा कि उनकी सरकार ने ‘झारखंड राज्य कृषि ऋण माफी योजना’ की शुरूआत कर दी है और वर्तमान वित्तीय वर्ष में किसानों के 50 हजार रुपये तक के ऋण माफ करने के लिए 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार ने कोविड संक्रमण से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाये जिससे यहां इस महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की जान बचायी जा सकी। प्रधानमंत्री द्वारा कोविड-19 से निपटने के लिए 16 जनवरी से देश में शुरू टीकाकरण अभियान में झारखंड भी पूरी तैयारी के साथ शामिल हुआ है और राज्य में 48 केन्द्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण का कार्य जारी है।

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मुर्मू ने इस अवसर पर देश तथा झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस उद्देश्य से उनकी सरकार ने अनेक कदम उठाये हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की जायेंगी और इसके लिए आयोग की सभी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया जायेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार महिला सुरक्षा के प्रति भी पूरी तरह सजग है। राज्य के विकास में महिलाओं का योगदान सुनिश्चित करने के लिए 2.57 लाख सखी मंडलों का गठन कर कुल 32.2 लाख परिवारों को अब तक इससे जोड़ा गया है।





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किसानों की ट्रैक्टर रैली में की गयी हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने सात प्राथमिकी दर्ज की

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   08:14
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किसानों की ट्रैक्टर रैली में की गयी हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने सात प्राथमिकी दर्ज की

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के मामले में सात प्राथमिकी दर्ज की। अधिकारियों ने यहां इसकी जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘पूर्वी जिले में तीन प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के मामले में सात प्राथमिकी दर्ज की। अधिकारियों ने यहां इसकी जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘पूर्वी जिले में तीन प्राथमिकी दर्ज की गयी है। द्वारका में तीन तथा शाहदरा जिले में एक मामला दर्ज किया गया है।’’ उन्होंने बताया कि और प्राथमिकी दर्ज होने के आसार हैं। इससे पहले दिन में, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसानों ने पुलिस के अवरोधकों को तोड़ दिया और पुलिस के साथ झड़प की, वाहनों में तोड़ फोड़ की और लाल किले पर धार्मिक झंडे फहरा दिये।

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पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि इस हिंसा में पुलिस के 86 जवान हो गये हैं। हिंसा स्थल पर एक प्रदर्शनकारी का ट्रैक्टर पलट गया जिससे उसकी मौत हो गयी। बयान में कहा गया है कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया था। प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के संबंध में मोर्चा के साथ दिल्ली पुलिस की कई दौर की बैठक हुयी थी। बयान के अनुसार मंगलवार को सुबह करीब 8:30 बजे छह हजार से सात हजारट्रैक्टर सिंघू सीमा पर एकत्र हुए। पहले से निर्धारित रास्तों पर जाने के बदले उन्होंने मध्य दिल्ली की ओर जाने पर जोर दिया।

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बार बार आग्रह के बावजूद निहंगों की अगुवाई में किसानों ने पुलिस पर हमला किया और पुलिस के अवरोधकों को तोड़ दिया।गाजीपुर एवं टीकरी सीमा से भी इसी तरह की घटना की खबरें हैं। इसमें कहा गया है कि आइटीओ पर गाजीपुर एवं सिंघू सीमा से आये किसानों के एक बड़े समूह ने लुटियन जोन की तरफ जाने का प्रयास किया। जब पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तो किसानों का एक वर्ग हिंसक हो गया। उन्होंने अवरोधक तोड़ दिये तथा वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया। पुलिस भीड़ को हटाने में कामयाब रही।





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टोपी पहनकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

  •  दिनेश शुक्ल
  •  जनवरी 26, 2021   23:22
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टोपी पहनकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा टोपी पहनकर संविदा शोषित व्यवस्था का विरोध किया गया। इनका कहना है कि संविदा के नाम पर कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है।

राजगढ़। मध्य प्रदेश में जिला चिकित्सालय राजगढ़, सिविल अस्पताल ब्यावरा, नरसिंहगढ़ सहित अन्य जगह गणतंत्र दिवस के अवसर पर नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने संविदा टोपी पहनी और झण्डावंदन कर प्रदर्शन किया। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा टोपी पहनकर संविदा शोषित व्यवस्था का विरोध किया गया। इनका कहना है कि संविदा के नाम पर कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है।

 

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इन कर्मचारियों का कहना है कि सालों से नियमितीकरण, नियमित कर्मचारियों का 90 प्रतिशत वेतन और निकाले गए कर्मचारियों की बहाली को लेकर मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। कम वेतन पर नियमित स्टाफ से अधिक काम लेकर कब तक शोषण किया जाएगा साथ ही अप्रैजल के बहाने कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करना कहां का न्याय है। चुनाव के पहले नियमित करने का सपना दिखाया जाता है और सरकार बनने के बाद संविदा कर्मचारियों का ही शोषण किया जाता रहा है।





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