चुनावी राज्यों में भाजपा के लिए जमीन तैयार कर रहा संघ, सामने हैं कई बड़ी चुनौतियां

चुनावी राज्यों में भाजपा के लिए जमीन तैयार कर रहा संघ, सामने हैं कई बड़ी चुनौतियां

जाहिर सी बात है कि आने वाले चुनावों को लेकर संघ अपनी रणनीतिक तैयारी शुरू कर चुका होगा। लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां हैं और सबसे बड़ी चुनौती तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भाजपा की वापसी कराना है। इसको लेकर संघ अपनी तरफ से लगातार बैठकें कर रहा है और रणनीति बना रहा है।

अगले साल उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव होने है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। जबकि उसे पंजाब में अपने अस्तित्व को खड़ा करना है। पंजाब में इस बार प्रकाश सिंह बादल की पार्टी भाजपा से अलग हो गई है। ऐसे में उसे वहां अकेले ही चुनाव लड़ना है और आगे की राजनीति की ओर बढ़ना है। हमेशा से यह माना जाता रहा है कि भाजपा के लिए राजनीतिक तौर पर संघ ही जमीन तैयार करता है। जाहिर सी बात है कि आने वाले चुनावों को लेकर संघ अपनी रणनीतिक तैयारी शुरू कर चुका होगा। लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां हैं और सबसे बड़ी चुनौती तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भाजपा की वापसी कराना है। इसको लेकर संघ अपनी तरफ से लगातार बैठकें कर रहा है और रणनीति बना रहा है।

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उत्तर प्रदेश 

सीट के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है। यहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। लेकिन आने वाले चुनाव में भाजपा वापसी कर पाएगी या नहीं कर पाएगी यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन संघ के सामने योगी आदित्यनाथ की सरकार पर कोरोना महामारी के दौरान अव्यवस्था के जो आरोप लगे हैं उसे मिटाना एक बड़ी चुनौती है। विरोधी अगर ऐसा आरोप लगा रहे होते तो बड़ी बात नहीं होती लेकिन खुद भाजपा और संघ के लोग भी यह मानते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश में अव्यवस्था की स्थिति देखने को मिली और सोशल मीडिया पर भी योगी सरकार के खिलाफ जमकर सवाल किए गए। संघ पूरी तरह से उत्तर प्रदेश में डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है। लोगों तक लगातार पहुंचने की कोशिश कर रहा है। साथ ही साथ कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर हेल्थ वॉलिंटियर्स अभियान चला रहा है। इसके साथ ही संघ की कोशिश यह है कि वह लोगों तक पहुंचे और जो सरकार के खिलाफ माहौल बना है उसे ठीक किया जा सके। उत्तर प्रदेश में खासकर पश्चिमी इलाके में संघ को किसान आंदोलन की वजह से भी अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसान आंदोलन की वजह से भाजपा के खिलाफ बन रहे माहौल को कम करना संघ के लिए वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। जातीय समीकरण को साथ रखकर हिंदू वोट ना बंटे इसकी भी कोशिश संघ लगातार कर रहा है। 

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उत्तराखंड

भले ही उत्तराखंड छोटा राज्य है लेकिन हिंदुत्व और संघ के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर यहां भाजपा सत्ता में नहीं लौट पाई तो भगवा पार्टी के साथ-साथ संघ के लिए भी बड़ा झटका होगा। उत्तराखंड में हर 5 वर्षों में सत्ता बदलते रहती है लेकिन इस मिथक को संघ तोड़ने की प्रयास में कर रहा है। यही कारण है कि एन मौके पर मुख्यमंत्री तक को बदलना पड़ा ताकि जो नाराजगी है उसे कम किया जा सके। संकट के दौरान संघ जमीन पर काम कर रहा है। साथ ही साथ प्रशासन से भी इसी तरह की मदद दी जा रही है ताकि संघ के लोग आम जनों तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच सके।

पंजाब

पंजाब में भाजपा के लिए बहुत ज्यादा कुछ हासिल करने वाला तो नहीं है। लेकिन वहां भाजपा को खड़ा करना ही संघ के लिए चुनौती है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में ही हो रहा है। यही वजह है कि अकाली दल भी भाजपा का साथ छोड़ चुका है। ऐसे में भाजपा के लिए वहां अपने दम पर खड़ा होना ही बड़ी चुनौती है। अकाली दल और बसपा गठबंधन के अलावा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच खुद को वहां स्थापित करने के लिए भाजपा को संघ की मदद चाहिए और संघ वह करने की कोशिश भी कर रहा है। लेकिन संघ को यह पता है कि उसके लिए पंजाब में रास्ता आसान नहीं है। पंजाब में 117 विधानसभा की सीटें हैं और भाजपा 23 से 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

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गोवा और मणिपुर 

गोवा और मणिपुर छोटे राज्य हैं। हालांकि भाजपा के लिए बेहद जरूरी है। दोनों जगह भाजपा का शासन है। ऐसे में संघ के लिए भाजपा को दोबारा सत्ता में वापसी कराना बेहद चुनौती है। गोवा में कई मुद्दों को लेकर सरकार घिरी है। साथ ही साथ संघ के ही सुभाष वेलिंगकर लगातार भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वहीं मणिपुर में राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच भाजपा के लिए सत्ता वापसी का मार्ग प्रशस्त कराना संघ के लिए सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा है। संघ युवा टीम की बदौलत भाजपा के लिए जमीन तैयार कर रहा है। लगातार कोशिश में है कि कैसे भी करके कोरोना महामारी की वजह से सरकार की जो छवि खराब हुई है उसे कम किया जा सके और सत्ता का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।





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