अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार को शाहीन बाग में चलेगा बुलडोज़र! सुप्रीम कोर्ट पहुंची CPIM

अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार को शाहीन बाग में चलेगा बुलडोज़र! सुप्रीम कोर्ट पहुंची CPIM
ANI

दक्षिण दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में 13 मई तक बुलडोजर की कार्रवाई जारी रह सकती है। इसके लिए दक्षिण दिल्ली नगर निगम की ओर से भारी पुलिस बल की भी मांग की गई है। दावा यह भी है कि पुलिस बल मुहैया नहीं हो पाने की वजह से कार्यवाही में देरी हो रही है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 30 अप्रैल से अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर वाला कार्रवाई की जा रही है। 4 मई को इसमें गति देखने को मिली। अब तक तुगलकाबाद, कालिंदी कुंज मेन रोड समेत कई जगहों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। खबर के मुताबिक के अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार को शाहीन बाग में बुलडोजर की कार्रवाई की जा सकते हैं। आपको बता दें कि दक्षिण दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में 13 मई तक बुलडोजर की कार्रवाई जारी रह सकती है। इसके लिए दक्षिण दिल्ली नगर निगम की ओर से भारी पुलिस बल की भी मांग की गई है। दावा यह भी है कि पुलिस बल मुहैया नहीं हो पाने की वजह से कार्यवाही में देरी हो रही है। 

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मिल रही जानकारी के मुताबिक 9 मई को शाहीन बाग जी ब्लॉक से जसोला नहर और कालिंदी कुंज पार्क तक अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। 10 मई को एनएफसी बोधिधर्म मंदिर के नजदीक गुरुद्वारा रोड के पास से भी अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही की जाएगी। 11 मई को मेहरचंद मार्केट, लोधी रोड, साईं मंदिर और जवाहरलाल नेहरू मेट्रो स्टेशन के पास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर चलेगा। 12 मई को इस्कॉन मंदिर, धीरसेन मार्ग और कालका देवी मार्ग पर बुलडोजर चलेगा। 13 मई को कालिंदी कुंज के खाड़ा कॉलोनी में भी बुलडोजर की कार्यवाही देखने को मिल  सकती है। इन सबके बीच दक्षिण दिल्ली नगर निगम की ओर से लोगों को अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया है। अगर नहीं हटाया जाएगा तो सोमवार से उसके खिलाफ बुलडोजर चलेगा।

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माकपा, हॉकर्स यूनियन ने न्यायालय का रुख किया

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की दिल्ली इकाई और हॉकर्स यूनियन ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम द्वारा अतिक्रमण-विरोधी अभियान की आड़ में इमारतों को गिराये जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और इसे ‘‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, विधियों और संविधान का उल्लंघन’’ करार दिया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि वे अनधिकृत कब्जाधारी या अतिक्रमणकर्ता नहीं हैं, जैसा कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम और अन्य ने आरोप लगाये है। याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता के संज्ञान में आया है कि प्रतिवादी नंबर एक (एसडीएमसी) के सहायक आयुक्त कार्यालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एमसीडी कर्मचारियों को महिला पुलिस सहित आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए पत्र जारी किया है।’’ 





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