Calcutta High Court में TMC की रैली को मिली अनुमति के खिलाफ दायर याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई

पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की जनसभा के लिए निजी जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी को राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अदालत की खंडपीठ ने इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी, जिस पर 17 सितंबर को सुनवाई तय की गई है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक पीठ 17 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार की उस पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को हुगली ज़िले के श्रीरामपुर में एक निजी ज़मीन पर जनसभा करने की अदालत से मिली मंज़ूरी को चुनौती दी गई है। यह जनसभा 11 सितंबर को होनी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने मंगलवार को अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ की अनुमति से पुनर्विचार याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि पुनर्विचार याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई होगी। खंडपीठ ने राज्य सरकार और निजी जमीन के मालिक को पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। राज्य सरकार और ज़मीन के मालिक ने खंडपीठ के सामने यह सवाल उठाया कि क्या जगन्नाथ ज्यू ट्रस्टी बोर्ड की ज़मीन पर कोई राजनीतिक रैली, आंदोलन या बैठक की जा सकती है।
एकल पीठ के आदेश पर श्रीरामपुर में एक निजी ज़मीन पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा आयोजित की जानी थी। राज्य सरकार और निजी मालिक की अपील को वापस लिए जाने के आधार पर निपटाते हुए, खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश पीठ से अनुरोध किया कि अगर कोई पुनर्विचार याचिका दायर की जाती है, तो उस पर 25 सितंबर तक फैसला किया जाए। राज्य सरकार और निजी ज़मीन के मालिक ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें भीड़-भाड़ वाले जीटी रोड पर प्रस्तावित रैली के बजाय उसी ज़मीन पर बैठक करने की इजाज़त दी गई थी।
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