Chhattisgarh CM विष्णुदेव साय ने PM Narendra Modi से की मुलाकात, तीन परियोजनाओं के लिए मांगी मदद

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर राज्य की तीन प्रमुख विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहायता मांगी। साय ने राजनंदगांव में 10,500 करोड़ रुपये की प्रस्तावित गैस-आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने और 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने का अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने रायपुर या बस्तर में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना में तेजी लाने का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और 10,500 करोड़ रुपये की एक प्रस्तावित गैस-आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने तथा 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग की। साय ने प्रधानमंत्री से यह भी आग्रह किया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर या बस्तर में ‘अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान’ (एआईआईए) स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। छत्तीसगढ़ सरकार के एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।’’ राज्य सरकार के बयान के अनुसार, बैठक के दौरान साय ने बस्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए एक विस्तृत रूपरेखा पेश की और कई प्रमुख विकास पहलों के लिए केंद्र से सहयोग मांगा। साय ने तीन अहम प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री से सहायता मांगी। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस-आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी शामि है।
उन्होंने मोदी को बताया कि परियोजना के लिए जमीन पहले ही आवंटित कर दी गई है और राज्य-स्तर पर जरूरी सभी मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से किसानों को खाद की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करके काफी फायदा होगा और साथ ही इलाके में औद्योगिक वृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा। दूसरी परियोजना 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने से संबंधित है, जिसके लिए केंद्र से खास मदद मिलेगी।
सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में बसे ये गांव अब तक पारंपरिक बिजली नेटवर्क की पहुंच से दूर रहे हैं और फिलहाल ऑफ-ग्रिड बिजली प्रणालियों पर निर्भर हैं। साय ने जोर दिया कि ग्रिड कनेक्टिविटी से भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी और निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा, साथ ही इन इलाकों में लंबे समय के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। तीसरी परियोजना के तहत, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर या बस्तर में ‘अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान’ स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाना है।
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