CDS जनरल बिपिन रावत के बयान पर भड़का चीन, कहा- बढ़ सकता है टकराव

Bipin Rawat
अंकित सिंह । Nov 26, 2021 3:20PM
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा कि बिना किसी कारण के भारतीय अधिकारी ‘चीनी सैन्य खतरे’ पर अटकलें लगाते हैं, जो दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन का गंभीर उल्लंघन है कि चीन और भारत ‘एक दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं’।

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच लगातार टकराव की स्थिति है। इसी को लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का एक बयान काफी सुर्खियों में है। अपने बयान में जनरल रावत ने चीन को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा बताया था। इसी को लेकर चीन आप भड़क गया है। चीन ने भारत के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा कि बिना किसी कारण के भारतीय अधिकारी ‘चीनी सैन्य खतरे’ पर अटकलें लगाते हैं, जो दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन का गंभीर उल्लंघन है कि चीन और भारत ‘एक दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं’। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक टकराव को भड़काना गैर जिम्मेदाराना तथा खतरनाक है। 

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कर्नल वू हाल में जनरल रावत की कथित टिप्पणियों पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें कहा गया था कि ‘‘भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा चीन है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में ‘भरोसे’ की कमी है और ‘संदेह’ बढ़ता जा रहा है। इस पर चीन की क्या टिप्पणी है?’’ कर्नल वू ने कहा कि हम इस टिप्पणी का कड़ा विरोध करते हैं। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और भारतीय पक्ष के सामने कड़ा एतराज जताया है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि भारत के समक्ष चीन ने अपना विरोध कब दर्ज कराया है। चीन की ओर से कहा गया कि सीमा विवाद पर चीन का रुख साफ है और बॉर्डर क्षेत्र में हम शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

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आपको बता दें कि जनरल रावत ने हाल में ही कहा था कि भारत के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। आपकों बता दें कि लद्दाख में पिछले साल मई में गतिरोध तब शुरू हुआ जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पैंगोंग झील और अन्य क्षेत्रों में अपने सैनिकों को गोलबंद किया। पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक टकराव के बाद तनाव काफी बढ़ गया। तब से तनाव घटाने और विवादित क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर की कई वार्ता हो चुकी है।

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