लैंसेट के अध्यन में दावा, कोवैक्सीन 50 फिसदी ही असरदार

लैंसेट के अध्यन में दावा, कोवैक्सीन 50 फिसदी ही असरदार

लेसेंट ने हाल ही में प्रकाशित अपनी रीपोर्ट में देवा किया है कि, कोवैक्सीन केवल 50 फीसदी ही असरदार है। वहीम ॉऐपको बता दें कि, शोधकर्ताओँ नें दावा किया कि अध्यन अवधी के दौरान कोविड का डेल्टा संक्रमण हावी था। जो सभी पुष्टी किए गए covid19 मामलों में लगभग 80 प्रतिशत था।

कोवैक्सीन कोरोना से लडा़ई में 50 फिसदी ही असरदार है ऐसा दावा लैंसेट ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। लेसेंट ने हाल ही में प्रकाशित अपनी रीपोर्ट में ये कहा कि कोवैक्सीन की दो खुराक जिसे BBV152 के रूप में जाना जाता है  रोगसुचक के खिलाफ 78 प्रतिशत प्रभावी थी। अब नए अध्यन में जो 15 अप्रैल से 15 मई के बीच दिल्ली में AIMS के 2714 कर्मियों पर आकलन किया गया जिसमें ये बात सामने आई। शोधकर्ताओँ नें दावा किया कि अध्यन अवधी के दौरान कोविड का डेल्टा संक्रमण हावी था। जो सभी पुष्टी  किए  गए covid19 मामलों में लगभग 80 प्रतिशत था।

आपको बता दें कि कोवैक्सीन हैदराबाद स्थित भारत बायोटक के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरेलाॉजी और इडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से विकसित की गई है। जो एक वायरस टीका है जिसकी दो खुराक लेनी अनिवार्य है। इस साल जनवरी में भारत में 18 साल के और उससे उपर के लोगों पर इस वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे covid19 में उपयोगी माना और दूसरी लहर के उछाल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों पर इसका परिक्षण  किया गया है जिन्हें मुख्य रूप से कोवैक्सीन की पेशकश की गई थी। 

आंकड़ो के अनुसार कोवैक्साीन का टीका बिना किसी लक्षण वाले मरिजो पर 63 प्रतिशत की सुरक्षा प्रदान करता है. covid19 की दूसरी लहर के दौरान भी कोवैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 65 प्रतिशत और सार्स  सीवोवी 2 के सभी प्रकारों के खिलाफ 78 प्रतिशत तक कारगर है।  देश में निर्मित यह टीका covid19 के गंभीर लक्षणों के खिलाफ 93 प्रतिशत तक प्रभावी है।





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