कांग्रेस का आरोप, राजनैतिक हिंसा का जिलाबदर आरोपी घूम रहा खुले आम

Congress accused
दिनेश शुक्ल । Oct 25, 2020 9:39PM
मिश्रा ने कहा कि ग्वालियर सहित समूचे ग्वालियर-चंबल अंचल का जिला और पुलिस प्रशासन निष्पक्ष न होकर भाजपा और राज्य सरकार का गुलाम बनकर काम कर रहा है

ग्वालियर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी (ग्वालियर-चम्बल संभाग) के.के. मिश्रा ने रविवार को डबरा विधानसभा उपचुनाव निर्वाचन क्षेत्र के ग्राम सिरोही बरोठा में भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी के संरक्षण में पूर्व में जिलाबदर और हाल ही में हत्या के आरोप में जमानत पर छूटे आरोपी मुकेश परिहार सहित उसके चार भाईयों द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ता, उसके माता-पिता आदि के साथ घर में घुसकर की गई गंभीर मारपीट, तोडफोड और देहात थाना परिसर में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे को पुलिस के सामने की गई गाली-गलौच और जान से मारने की दी गई धमकी/फैलाई गई प्रायोजित हिंसा को गंभीर मामला बताते हुये कहा कि जब मुकेश परिहार जैसा कुख्यात व आदतन अपराधी हत्या का आरोपी होकर जमानत पर है व पूर्व में जिलाबदर भी रह चुका है तो पुलिस/जिला प्रशासन ने आदर्श आचार संहिता के परिपालन में उसे आतंक फैलाने की खुली छूट किसलिए, क्यों और किसके दबाब में दे रखी है।

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मिश्रा ने कहा कि ग्वालियर सहित समूचे ग्वालियर-चंबल अंचल का जिला और पुलिस प्रशासन निष्पक्ष न होकर भाजपा और राज्य सरकार का गुलाम बनकर काम कर रहा है, पूरे अंचल में भाजपा नेताओं के संरक्षण में कुख्यात भाजपाई गुंडे, आदतन अपराधी, जिलाबदर और हत्या जैसे गंभीर मामलों के अपराधी सत्ताधारी राजनेताओं के संरक्षण में खुलेआम गुंडागिर्दी करते हुये कांग्रेस नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला कर रहे है, उन्हें मार डालने की सरेआम धौंस दे रहे है और पुलिस/जिला प्रशासन उनका अंधभक्त होकर अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही न करते हुये कार्यवाही के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही सता रहा है। इस स्थिति को देखते हुये अंचल में निष्पक्ष और निर्भीक मतदान असंभव है, बडे स्तर पर सरकार के संरक्षण में और मौजूदा प्रशासन के सहयोग से बडी हिंसा की संभावनाएं बलवती हो रही है। लिहाजा, केंद्रीय निर्वाचन आयोग समूचे अंचल के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करे ताकि निष्पक्ष व निर्भीक मतदान हो सके। मिश्रा ने जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को भी कहा है कि वे अपने संवैधानिक प्रदत्त अधिकारों का ही निर्वहन करें किसी भी राजनैतिक दल का हिस्सा न बने तो उनके स्वास्थ के लिए बेहतर होगा।

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