कांग्रेस ने निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को घेरा, पूर्वजों की कमाई बेचने का लगाया आरोप

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त्रिवेदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए वापमंथी या पूंजीवादी मॉडल देखने की जरूरत नहीं है भारत के लिए राष्ट्रवादी मॉडल ही काफी है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के एम थंबीदुरई ने कहा कि कोविड-19 से पैदा हुई परिस्थितियों के बीच यह बजट आया है जिसमें विकास का दृष्टिकोण परिलक्षित होता है।
नयी दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस ने विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह ऐसी सरकार है जो पूर्वजों की कमाई को बेचकर खाती है। इस पर, भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि चीजों को सकारात्मक नजरिए से देखे जाने पर ‘‘बहुत कुछ’’ नजर आएगा। उच्च सदन में आम बजट 2021-22, जम्मू और कश्मीर विनियोग विधेयक और पुडुचेरी विनियोग विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने राष्ट्रीय राजधानी में सेंट्रल विस्टा परियोजना पर भी रोक लगाने की मांग की। विभिन्न सरकार उपक्रमों के विनियोग का विस्तृत विवरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वह बेटा ठीक नहीं होता जो बाप की कमाई संपत्ति को बेच कर खाता हो। बेच कर समृद्धि दिखाने से इस सरकार को बाहर निकलना होगा।’’ 

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गोहिल ने कहा कि बजट लोक कल्याण के लिए होता है और वह चुनावी भाषण नहीं होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विनियोग विधेयक में चुनावी राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है और उन्हें ‘‘लॉलीपोप’’ देने के जतन किए गए हैं। खाद की सब्सिडी कम करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार का किसानों के प्रति नकरात्मक रवैया क्यों है। जम्मू एवं कश्मीर विनियोग विधेयक पर अपनी बात रखते हुए गोहिल ने वहां से अनुच्छेद 370 हटाने का उल्लेख किया और पोरस के एक कथन का हवाला देते हुए कहा कि ताकत के बल पर किसी क्षेत्र पर कब्जा तो किया जा सकता है लेकिन वहां के लोगों का दिल जीते बगैर वहां शासन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक सभी प्रधानमंत्रियों ने कश्मीर के लोगों के दिलों की जीतने की कोशिश की। पुडुचेरी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद का देश में सम्मान किया जाना चाहिए। तत्कालीन उपराज्यपाल किरण बेदी और वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री वी नारायाणसामी के बीच लंबे समय तक चली अधिकारों की लड़ाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आंदोलनजीवियों को एलजी बनाकर चुनी हुई सरकारों का अपमान नहीं किया जा सकता है।’’ 

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चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद देश में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और मनरेगा जैसी योजनाओं को कोष बढ़ाया गया है। उन्होंने कांग्रेस सदस्यों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि सकारात्मक नजरिए से देखा जाए तो इस बजट में बहुत कुछ नजर आएगा। अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से जारी अनुमानों का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि यह भारत के विकास को लेकर विश्व का सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाता है। भाजपा नेता ने दावा किया कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में लोकतंत्र जमीनी स्तर पर पहुंचा है और वहां एक बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जिला विकास परिषद और ब्लॉक विकास परिषद के लिए आवंटित किए गए कोष का उल्लेख करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि वहां पहली बार ऐसा हुआ है कि जमीन पर पैसा पहुंच रहा है। उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को इसका ‘‘दर्द’’ है लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हिम्मत से कई पुराने दाग भी मिट गए। त्रिवेदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए वापमंथी या पूंजीवादी मॉडल देखने की जरूरत नहीं है भारत के लिए राष्ट्रवादी मॉडल ही काफी है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के एम थंबीदुरई ने कहा कि कोविड-19 से पैदा हुई परिस्थितियों के बीच यह बजट आया है जिसमें विकास का दृष्टिकोण परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है और बजट में इसकी भी चिंता की गई है। उन्होंने वस्तु एंव सेवा कर की दर कम करने और पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने कर मांग की।

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