Thalapathy Vijay के लिए Congress ने कराया बहुमत का जुगाड़, Tamil Nadu में पहली बार बनेगी TVK सरकार

Thalapathy Vijay
ANI

हम आपको बता दें कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके ने विजय की पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने कहा है कि वाम दल बाहर से समर्थन देंगे; वे विजय के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे।

अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलगा वेत्रि कडगम यानि टीवीके ने विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद अब सरकार गठन की दिशा में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। लंबे राजनीतिक गतिरोध, पर्दे के पीछे चली बातचीत और बदलते गठबंधन समीकरणों के बीच आखिरकार विजय की पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी समर्थन मिल गया है। बहुमत का जुगाड़ करने के बाद विजय ने आज शाम एक बार फिर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें बताया कि उनके पास सरकार गठन लायक बहुमत है। 

हम आपको बता दें कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके ने विजय की पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने कहा है कि वाम दल बाहर से समर्थन देंगे; वे विजय के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे। इन दलों के समर्थन से टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। हम आपको बता दें कि चुनाव में विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन दो सीटों से चुनाव लड़ने के कारण विजय को एक सीट छोड़नी होगी, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह गई। कांग्रेस के पांच विधायक तथा वामपंथी और वीसीके के कुल छह विधायकों के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 118 तक पहुंच गया।

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राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्वयं वाम दलों और वीसीके से बातचीत कर विजय की पार्टी का समर्थन करने के लिए राजी किया। कांग्रेस पहले ही डीएमके से अलग होकर विजय के साथ खड़ी हो चुकी थी। इसके बाद सरकार गठन के लिए जरूरी संख्या जुटाने का दबाव छोटे दलों पर बढ़ गया था।

वाम दलों का मानना है कि जनता के जनादेश को नजरअंदाज कर दोबारा चुनाव कराना उचित नहीं होगा। एक वाम नेता ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की स्थिति से बचना जरूरी है और जनता ने जिस बदलाव के पक्ष में मतदान किया है, उसका सम्मान होना चाहिए। वहीं वीसीके ने भी साफ संकेत दिया कि तमिलनाडु की राजनीति में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इन दलों की एक और बड़ी चिंता डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित अवसरवादी गठबंधन को लेकर रही। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि यदि विजय सरकार बनाने में विफल रहते हैं, तो दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी दल सत्ता के लिए साथ आ सकते हैं। हालांकि वाम दलों का कहना है कि जनता पहले ही डीएमके और एआईएडीएमके को नकार चुकी है, ऐसे में जनता की इच्छा के विरुद्ध कोई नया समीकरण स्वीकार्य नहीं होगा।

आज सुबह विजय की पार्टी के विधायक भी लगातार बैठकों में जुटे रहे। पार्टी नेताओं ने विश्वास जताया कि जिन दलों से समर्थन मांगा गया है, वे अंत तक साथ खड़े रहेंगे। दूसरी ओर वाम दलों ने भी राज्य स्तर पर बैठकों के बाद समर्थन का अंतिम फैसला लिया। इसके बाद वीसीके ने भी समर्थन देने की घोषणा कर दी।

तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐतिहासिक माना जा रहा है। दशकों से राज्य की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके के इर्दगिर्द घूमती रही है, लेकिन इस चुनाव में विजय की पार्टी के उभार ने सत्ता की राजनीति का पूरा संतुलन बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सरकार गठन का मामला नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।

इसी बीच, इस राजनीतिक बदलाव का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अपनी पार्टी के सांसदों के बैठने की व्यवस्था बदलने की मांग की है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने पत्र में कहा कि बदले हुए राजनीतिक हालात में कांग्रेस के साथ पहले जैसी बैठक व्यवस्था उचित नहीं रह गई है, क्योंकि दोनों दलों का गठबंधन समाप्त हो चुका है।

डीएमके का यह कदम विपक्षी गठबंधन इंडिया के भविष्य को लेकर भी बड़े संकेत दे रहा है। कांग्रेस और डीएमके के बीच दशकों पुराना गठबंधन टूटने से विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ विपक्षी दल कांग्रेस के फैसले को भाजपा और राजग को रोकने के लिए रणनीतिक कदम बता रहे हैं, जबकि कई नेता इसे राजनीतिक विश्वासघात करार दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बिना नाम लिए कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि वह मुश्किल समय में अपने सहयोगियों का साथ छोड़ने वालों में नहीं हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया यह बयान विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते समीकरणों की ओर संकेत माना जा रहा है।

देखा जाये तो तमिलनाडु में विजय की सरकार अब केवल राज्य की सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति, विपक्षी गठबंधनों और भविष्य की चुनावी रणनीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नया राजनीतिक समीकरण केवल तमिलनाडु तक सीमित रहता है या फिर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी बदल देता है।

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