देहरादून में EVM की जांच 23 अक्टूबर से, विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटा प्रशासन

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देहरादून के जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ईवीएम के प्रथम स्तरीय परीक्षण की योजना साझा की। प्रशासन ने पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दलों से जांच प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आग्रह किया है। इसके बाद मशीनों का विधानसभा और बूथवार रेंडमाइजेशन किया जाएगा।

उत्तराखंड में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत देहरादून जिले में ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों’ (ईवीएम) की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) जांच 23 अक्टूबर से शुरू होगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। देहरादून के जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने सोमवार को यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक कर उन्हें एफएलसी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी तथा उनसे ईवीएम की जांच प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य रूप से मौजूद रहकर निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सहयोग की अपील की।

ईवीएम की एफएलसी को निर्वाचन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण बताते हुए चौहान ने कहा कि इसके तहत मशीनों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की तकनीकी जांच की जाएगी, ताकि उनके सुचारु एवं त्रुटिरहित संचालन को सुनिश्चित करने के अलावा उनमें डेटा रिकॉर्डिंग की विश्वसनीयता को लेकर किसी प्रकार की आशंका न रहे। उन्होंने बताया कि एफएलसी का कार्य पूरा होने के बाद ईवीएम का विधानसभा क्षेत्रवार ‘रेंडमाइजेशन’ (किसी खास निर्वाचन क्षेत्र के लिए कोई खास ईवीएम का आवंटन नहीं) किया जाएगा। चौहान ने कहा कि इसके पश्चात प्रेक्षक की उपस्थिति में सॉफ्टवेयर के माध्यम से मशीनों का पुनः ‘रेंडमाइजेशन’ कर उन्हें बूथवार आवंटित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इससे निर्वाचन प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, निर्वाचन कार्यों के लिए तैनात नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के साथ एक अन्य बैठक में जिलाधिकारी ने उन्हें सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने कहा कि जिले के 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 2,045 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जिनमें से 766 ग्रामीण और 1,279 शहरी क्षेत्र में स्थित हैं।

उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने क्षेत्रों के मतदेय स्थलों पर बिजली, पेयजल, रैंप, शेड सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ ही मतदान केंद्रों के नामों का सत्यापन करने तथा चार-पांच बूथ वाले केंद्रों पर मतदाताओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्गों की व्यवस्था करने को कहा। जिलाधिकारी ने बताया कि मसूरी क्षेत्र के सात और चकराता क्षेत्र के 12 मतदान केंद्र अभी भी ‘शैडो एरिया’ में हैं जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं या कम है। उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

चौहान ने यह भी कहा कि फरवरी में जिले के 65 मतदान केंद्रों पर बर्फबारी की संभावना के दृष्टिगत उन क्षेत्रों के लिए अभी से आकस्मिकता योजना (कंटीजेंसी प्लान) तैयार कर लिया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि देहरादून की सीमाएं उत्तराखंड के चार जिलों के अलावा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से लगती है जिसे देखते हुए अंतरराज्यीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित करने तथा प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिले में कुल 11,94,797 मतदाता हैं जिनमें 6,17,041 पुरुष, 5,77,706 महिलाएं और 50 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

जिले में 10,201 दिव्यांग तथा 85 वर्ष से अधिक आयु के 7,845 मतदाता हैं।

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