Rajat Sharma के Deepfake वीडियो हटाने का Delhi High Court ने दिया आदेश

Rajat Sharma के Deepfake वीडियो हटाने का Delhi High Court ने दिया आदेश
प्रतिरूप फोटो
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वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया मंचों को फर्जी सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की अदालत ने मेटा और गूगल को शिकायत मिलने के बाद 36 घंटे के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि प्रतिवादियों ने नोटिस के बावजूद समय पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कई फेसबुक और यूट्यूब खातों को पत्रकार रजत शर्मा के व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन करने से रोका है और इन मंचों को ऐसी सामग्री हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बने डीपफेक वीडियो भी शामिल हैं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने 24 अगस्त को इंडिया टीवी के चेयरमैन और प्रधान संपादक के पक्ष में और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ फैसला दिया। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि शर्मा ‘मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक’ और ‘गूगल एलएलसी’ (जो क्रमशः फेसबुक और यूट्यूब का संचालन करते हैं) से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं। वे ऐसी किसी भी सामग्री के खिलाफ संपर्क कर सकते हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उनके नाम, शक्ल-सूरत, छवि, आवाज, फ़ोटो, वीडियो या उनके व्यक्तित्व के किसी अन्य पहलू का दुरुपयोग, अनुचित इस्तेमाल या शोषण करती हो।

अदालत ने आदेश दिया, ‘‘संबंधित प्रतिवादी 24 घंटे के भीतर अनुरोध स्वीकार करेंगे और उसके बाद 36 घंटे के भीतर कार्रवाई करेंगे।’’ शर्मा के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल एक जाना-माना पत्रकार है जिसकी छवि बेदाग है और वह दो दशकों से अधिक समय से भारतीय टेलीविजन का चेहरा हैं। वकील ने अपनी दलील में कहा कि फेसबुक पर कई खातें गलत जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकी का गलत इस्तेमाल करके ऐसे वीडियो बनाए जा रहे हैं जिनमें वादी की बदली हुई या हेर-फेर की गई तस्वीरें, आवाज और व्यक्तित्व की अन्य विशेषताएं दिखाई या सुनाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ यूट्यूब चैनल भी डीपफेक वीडियो प्रसारित कर रहे है। अदालत ने संज्ञान में लिया कि प्रतिवादियों को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उन्होंने तय समय के भीतर मुकदमे का कोई जवाब दाखिल नहीं किया, और शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने इससे पहले शर्मा के व्यक्तित्व अधिकार की सुरक्षा के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया था और आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच बाधित करने तथा उसे हटाने का निर्देश दिया था।

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