DU ने MA History पाठ्यक्रम से दिल्ली सल्तनत का विषय हटाया, विरोध शुरू

दिल्ली विश्वविद्यालय ने 7 अगस्त को जारी एमए इतिहास के तीसरे सेमेस्टर के अंतिम पाठ्यक्रम से दिल्ली सल्तनत समेत कई ऐच्छिक विषयों को बाहर कर दिया है। इतिहास विभाग द्वारा प्रस्तावित 35 डीएसई विषयों में से केवल 16 को नए पाठ्यक्रम में जगह मिली है, जिसकी डीयू अकादमिक परिषद की सदस्य माया जॉन ने कड़ी आलोचना की है।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा एमए इतिहास कार्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर से कई ‘विषय विशिष्ट इलेक्टिव (डीएसई) विषयों को हटाने का फैसला आलोचनाओं के घेरे में आ गया है। हाल ही में जारी किए गए नए पाठ्यक्रम में जिन महत्वपूर्ण विषयों को अब शामिल नहीं किया गया है, उनमें द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मिडीवल नॉर्थ इंडिया (13वीं-14वीं शताब्दी) नामक विषय भी शामिल है। यह विषय विशेष रूप से दिल्ली सल्तनत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक ढांचे और मध्यकाल के दौरान सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन में आए बदलावों से संबंधित था।
इसके अलावा भारतीय इतिहास के अलग-अलग कालखंडों से जुड़े कई अन्य विषय भी तीसरे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं हैं। पीटीआई-द्वारा देखे गए आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इन विषयों को पहले पाठ्यक्रम मंजूरी प्रक्रिया के तहत मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा सात अगस्त को जारी की गई अंतिम अधिसूचना में ये नहीं थे। इतिहास विभाग द्वारा प्रस्तावित और जुलाई में अकादमिक परिषद की बैठक में रखे गए 35 डीएसई विषयों में से 16 को सात अगस्त को अधिसूचित तीसरे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
इन विषयों को पाठ्यक्रम से हटाए जाने को लेकर इतिहासकार और डीयू अकादमिक परिषद की सदस्य माया जॉन ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कई विषयों को हटाना विभाग की पाठ्यक्रम समिति (कमेटी ऑफ कोर्सेज) की स्वायत्तता का उल्लंघन है, इसमें पाठ्यक्रम तैयार करने में विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षाविद शामिल हैं। जॉन ने ‘विशेषज्ञ’ या ‘निगरानी समिति’ के गठन के तरीके पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी समिति का गठन विश्वविद्यालय की वैधानिक प्रणालियों के तहत किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर इसमें अकादमिक परिषद को भी शामिल किया जाना चाहिए।
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