सीमावर्ती गांवों की अन्य राज्यों में विलय की मांग महाराष्ट्र के हित में नहीं: रामदास आठवले

Athawale
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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा, ‘‘सीमा विवाद नया नहीं है, क्योंकि यह राज्य के गठन से पहले मौजूद था। हालांकि, अब नौबत यह आ गई है कि महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित कुछ गांव राज्य से अलग होना चाहते हैं। यह राज्य के लिए हित में नहीं है।’’

ठाणे। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि महाराष्ट्र के कुछ सीमावर्ती गांवों का कर्नाटक सहित अन्य पड़ोसी राज्यों में विलय की मांग करना प्रदेश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये गांव राज्य का हिस्सा बने रहें और उनके बाशिंदों को सभी सुविधाएं हासिल हों। ठाणे जिले के कल्याण में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम से इतर आठवले ने संवाददाताओं से कहा कि वह सीमा विवाद पर चर्चा के लिए जल्द मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे।

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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘सीमा विवाद नया नहीं है, क्योंकि यह राज्य के गठन से पहले मौजूद था। हालांकि, अब नौबत यह आ गई है कि महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित कुछ गांव राज्य से अलग होना चाहते हैं। यह राज्य के लिए हित में नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि सिर्फ कर्नाटक की सीमा से सटे महाराष्ट्र के गांवों के लोग ही असंतुष्ट नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा के पास स्थित गांवों के लोग भी पड़ोसी राज्यों में विलय के इच्छुक हैं।

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आठवले ने कहा कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘सीमा मुद्दा फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। लेकिन राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन सीमावर्ती गांवों को सभी सुविधाएं मिलें। उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये गांव राज्य का ही हिस्सा बने रहें। मैं इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जल्द शिंदे और फडणवीस से मिलूंगा।

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