India AI Summit का डबल धमाका: बना World Record, जबरदस्त भीड़ के कारण बढ़ाई गई Expo की तारीख।

एआई इम्पैक्ट समिट ने जिम्मेदार एआई उपयोग के लिए 24 घंटे में 2,50,946 छात्रों की शपथ दर्ज कराकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जो तकनीकी विकास के साथ भारत के नैतिक नेतृत्व को रेखांकित करता है। इस सफल आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए एक्सपो को अब शनिवार, 21 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
नई दिल्ली में जारी एआई इम्पैक्ट समिट को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता दिख रहा है। भारी भीड़ और बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए आयोजकों ने एक्सपो को एक दिन के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब यह प्रदर्शनी 21 फरवरी 2026, शनिवार तक खुली रहेगी।
प्रेस वार्ता में आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि बहुपक्षीय बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों के कारण सुरक्षा व्यवस्थाएं सख्त थीं, जिससे आम आगंतुकों को शुरुआती दिनों में असुविधा हुई। मौजूद जानकारी के अनुसार, सप्ताह के दिनों में नहीं आ पाने वाले छात्र और पेशेवर अब शनिवार को अपेक्षाकृत आसान सुरक्षा प्रबंधों के बीच प्रदर्शनी देख सकेंगे।
बता दें कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में 400 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं, जिनमें स्टार्टअप, बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां, सरकारी संस्थाएं और शोधकर्ता शामिल हैं। सम्मेलन के पहले तीन दिनों में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई। विशेष रूप से 16 फरवरी को, जब कई हिस्सों में आम जनता का प्रवेश सीमित था, तब भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा। तीन दिन बाद भी आगंतुकों की संख्या में कमी नहीं आई, जिसके चलते अवधि बढ़ाने का फैसला लिया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी प्रदर्शक शनिवार तक अपने स्टॉल जारी रख पाएंगे या नहीं।
गौरतलब है कि 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं की पूर्ण बैठक के कारण एक्सपो आम जनता के लिए बंद रहेगा और अगले दिन फिर से खुलेगा।
इसी बीच सम्मेलन ने एक और उपलब्धि हासिल की है। ब्रिटेन की संस्था गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने पुष्टि की कि इस आयोजन के दौरान 24 घंटे के भीतर जिम्मेदार एआई उपयोग के लिए सर्वाधिक छात्र प्रतिज्ञाएं दर्ज की गईं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक प्रवीन पटेल ने घोषणा की कि कुल 2,50,946 प्रतिज्ञाएं प्राप्त हुईं, जबकि लक्ष्य 5,000 का था।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचकर जिम्मेदार एआई उपयोग की शपथ अभियान चलाना प्रधानमंत्री की सोच का परिणाम है। उनके अनुसार, यह पहल दर्शाती है कि भारत तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक और जिम्मेदार उपयोग पर भी समान रूप से जोर दे रहा है।
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