Alakh Pandey Personality Rights: दिल्ली HC का बड़ा फैसला, Physics Wallah फाउंडर के खिलाफ अश्लील कंटेंट हटाने के निर्देश

पांडे की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए, कोर्ट ने वादी द्वारा पेश किए गए कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट की कैटेगरी-वाइज़ लिस्ट पर विचार करने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को 'फिजिक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडे को उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स'से जुड़े मामले में अंतरिम राहत दी। कोर्ट ने ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया जो पहली नज़र में अश्लील या मानहानि करने वाला हो, या बिना इजाज़त उनके व्यक्तित्व का कमर्शियल इस्तेमाल करता हो। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने Google, X और Telegram को यह भी निर्देश दिया कि वे उन अकाउंट्स और URLs की 'बेसिक सब्सक्राइबर इन्फॉर्मेशन' (BSI) का खुलासा करें जिनकी पहचान वादी (पांडे) ने की है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। पांडे की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए, कोर्ट ने वादी द्वारा पेश किए गए कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट की कैटेगरी-वाइज़ लिस्ट पर विचार करने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया।
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कोर्ट ने कहा कि कुछ खास तरह के कंटेंट के लिए अंतरिम सुरक्षा को सीमित करने के कारणों को बताते हुए एक विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मैं कुछ बातें बताऊंगा कि क्यों मैं अपने आदेश को कंटेंट के इन खास सेट तक सीमित कर रहा हूं। मैं अभी ये बातें नहीं बता रहा हूं। इस आदेश को तैयार होने में कुछ दिन लगेंगे। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी। सुनवाई के दौरान, पांडे की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक ने एक चार्ट पेश किया जिसमें कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले लिंक और उन प्रतिवादियों की पहचान की गई थी जिनके खिलाफ राहत मांगी गई थी।
रिकॉर्ड पर रखे गए मटीरियल को कोर्ट के सामने रखते हुए दीपक ने कहा कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है।
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सीनियर वकील ने "अलख सर लेक्चर्स" नाम के टेलीग्राम चैनल के ज़रिए कथित तौर पर किसी और का रूप धरने (इम्पर्सोनेशन) के मामलों की ओर भी इशारा किया और बताया कि पांडे के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल बिना इजाज़त के किया जा रहा था। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि लिंक्डइन और एक्स पर पांडे के नाम से कथित तौर पर फर्जी अकाउंट बनाए गए थे।
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