गृह मंत्रालय ने JPC को बताया, 10 साल में FCRA पंजीकृत NGO घटे लेकिन विदेशी फंड बढ़ा

गृह मंत्रालय के अनुसार देश में सक्रिय एफसीआरए पंजीकृत गैर-सरकारी संगठनों की संख्या घटकर 14,466 रह गई है। इसके बावजूद विदेशों से मिलने वाला वार्षिक अंशदान बढ़कर 22,974 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सामने यह आधिकारिक आंकड़ा रखा गया।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की संख्या पिछले एक दशक में करीब आधी रह गई है, हालांकि विदेशों से मिलने वाला अंशदान बढ़ा है। गृह मंत्रालय ने एफसीआरए संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली बैठक में यह जानकारी दी। मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को बताया कि वर्ष 2024-25 में कुल 1,841 करोड़ रुपये के विदेशी अंशदान में से करीब तीन-चौथाई राशि ईसाई संगठनों को मिली।
इस विधेयक में गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी धन के संबंध में सरकार की निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के एक दल ने भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी को बताया कि 15 राज्यों में एफसीआरए के तहत 14,466 सक्रिय एनजीओ पंजीकृत हैं। तमिलनाडु 2,102 संगठनों के साथ शीर्ष पर है।
इसके बाद महाराष्ट्र (1,578), कर्नाटक (1,355), दिल्ली (1,218), आंध्र प्रदेश (1,022) और केरल (1,013) का स्थान है। विदेशी धन प्राप्त करने वाले सभी संगठनों के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण अनिवार्य है और गृह मंत्रालय इसका नोडल प्राधिकरण है। वर्ष 2015 में एफसीआरए के तहत 29,022 सक्रिय एनजीओ पंजीकृत थे।
एफसीआरए-पंजीकृत एनजीओ को विदेशों से मिलने वाला अंशदान 2015-16 में 17,832 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 22,974 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में सक्रिय एनजीओ की संख्या 29,022 से घटकर 14,466 रह गई। वर्ष 2024-25 में प्रमुख दानदाता देशों में अमेरिका सबसे आगे रहा, जिसने 12,113 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
इसके बाद ब्रिटेन (2,414 करोड़ रुपये), जर्मनी (1,782 करोड़ रुपये), स्विट्जरलैंड (733 करोड़ रुपये) और सिंगापुर (669 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। समिति को बताया गया कि 2024-25 में प्राप्त कुल राशि में से 5,150 करोड़ रुपये धार्मिक संगठनों को मिले। इनमें ईसाई संगठनों को सबसे अधिक 1,345 करोड़ रुपये मिले।
हिंदू एनजीओ को 328 करोड़ रुपये, गैर-धार्मिक श्रेणी के संगठनों को 60 करोड़ रुपये, बौद्ध एनजीओ को 51 करोड़ रुपये और मुस्लिम संगठनों को 19 करोड़ रुपये मिले। वर्ष 2024-25 में विदेशी धन प्राप्त करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली 5,834 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद कर्नाटक (3,164 करोड़ रुपये), महाराष्ट्र (2,385 करोड़ रुपये) और तमिलनाडु (2,313 करोड़ रुपये) का स्थान रहा।
केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक में विदेशी अंशदान का बड़ा हिस्सा ईसाई संगठनों को मिला, जबकि गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु में हिंदू एनजीओ को अधिक राशि मिली। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने जेपीसी को यह भी बताया कि 2024-25 में कुल 35,968 करोड़ रुपये के अप्रयुक्त विदेशी अंशदान में से 21,140 करोड़ रुपये सावधि जमा (एफडी) में, 8,394 करोड़ रुपये एनजीओ के उपयोग खातों में और 6,377 करोड़ रुपये निर्दिष्ट खातों में रखे हुए थे। वर्ष 2022 से 2024 के बीच एक एनजीओ को 500 करोड़ रुपये से अधिक, 14 एनजीओ को 100 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये के बीच और 294 एनजीओ को 10 करोड़ रुपये से 50 करोड़ रुपये के बीच विदेशी अंशदान मिला।
वहीं, 4,508 एनजीओ को पांच लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच राशि मिली। सरकार ने अब तक 21,983 एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण रद्द किया है। इनमें 91.3 प्रतिशत के खिलाफ कार्रवाई वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं करने, 7.9 प्रतिशत के खिलाफ निष्क्रिय रहने और 0.4 प्रतिशत के खिलाफ कानूनी उल्लंघन के कारण की गई।
बैठक के बाद जेपीसी अध्यक्ष जायसवाल ने कहा कि गृह सचिव ने सदस्यों को प्रस्तावित संशोधनों के औचित्य, उनके उद्देश्यों और विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ, संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, थिंक टैंक तथा अन्य संस्थाओं पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और सांसदों ने सवाल पूछे। हमारे पास शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपने का दायित्व है।
हम इसे पूरा करने में सफल होंगे। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने विधेयक के उस प्रावधान पर आपत्ति जताई जिसके तहत ऐसे एनजीओ की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को स्थायी रूप से कब्जा लेने का अधिकार होगा, जिनका पंजीकरण रद्द हो गया है, जिन्होंने पंजीकरण समर्पित कर दिया है या जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और विपक्षी दलों की लगातार मांग के बाद 12 अगस्त को इसे जेपीसी के पास भेज दिया गया।
जेपीसी में 31 सदस्य और दो विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। एफसीआरए विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे विपक्षी दलों का आरोप है कि इसके कुछ प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं और ईसाई एनजीओ तथा अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों के वैध वित्त पोषण को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्षी दलों को ऐसी एक भी धारा बताने की चुनौती दी है जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करती हो।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष से संबंधित नहीं है और इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान को विनियमित करना है। लोकसभा में विधेयक पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि कानून का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और विदेशों से प्राप्त धन के उचित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है। विपक्ष के विधेयक को खतरनाक बताए जाने के आरोपों का जवाब देते हुए राय ने कहा था कि यह कानून उन लोगों के लिए वास्तव में खतरनाक है जो विदेशी अंशदान का इस्तेमाल जबरन धर्मांतरण के लिए करते हैं या निजी लाभ के लिए विदेशी धन का दुरुपयोग करते हैं।
अन्य न्यूज़













