बाबू चेथरू सिंह की प्रतिमा का जमुई में हुआ अनावरण, स्वतंत्रता आंदोलन में था अहम योगदान

बाबू चेथरू सिंह की प्रतिमा का जमुई में हुआ अनावरण, स्वतंत्रता आंदोलन में था अहम योगदान

बाबू चेथरू सिंह की प्रतिमा का अनावरण कचहरी चौक स्थित ओवर ब्रिज के नीचे किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष विपिन कुमार सिन्हा के द्वारा किया गया।

स्वतंत्रता सेनानी बाबू चेथरू सिंह के प्रतिमा का जमुई में अनावरण किया गया। इस अवसर पर बिहार विधानसभा के आश्वासन समिति के अध्यक्ष दामोदर रावत और जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह मौजूद रहीं। बाबू चेथरू सिंह की प्रतिमा का अनावरण कचहरी चौक स्थित ओवर ब्रिज के नीचे किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष विपिन कुमार सिन्हा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर भाजपा नेता राज किशोर सिंह, डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह, अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, माधव सिंह, दयानंद सिं,ह सूरज कुमार, होरिल मांझी, राजकुमार पासवान, विदेसी साव, कारू सिंह और कपिल रावत मौजूद रहे। इसके अलावा बन्नी सिंह, गुड़िया सिंह, मुकुल सिंह, पुतुल देवी और नूतन देवी भी मौजूद रहीं।

कौन हैं बाबू चेथरू सिंह 

स्वतंत्रता सेनानी बाबू चेथरू सिंह का जन्म 25 दिसंबर 1988 को जमुई के बाघाखाड़ गांव में हुआ था। महज 5 वर्ष की उम्र में इनके माता-पिता का स्वर्गवास हो गया। उसके बाद इनका लालन-पालन, प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल में मामा कमला प्रसाद सिंह ने की। युवा अवस्था में इनके परम और गहरे मित्र स्वतंत्रा सेनानी कुमार कालिका सिंह, ग्राम मोहली एवं ग्राम दाबिल के स्वतंत्रता सेनानी रामधारी मंडल थे। यह तीनों मित्र त्रिमूर्ति के नाम से उस कालखंड में प्रसिद्ध हुए। यह तीनों मित्र ने जमाई के धरती पर 1917 ईस्वी में स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी। 29 दिसंबर 1929 को लाहौर कांग्रेस ने पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव पारित कर देश भर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का ऐलान किया। 

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उसी ऐलान के आलोक में 26 जनवरी 1930 ईस्वी को स्वतंत्रता सेनानी बाबू चेथरू सिंह, बाघाखाड़ में और कुमार कालिका ग्राम मोहली में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इसके लिए दोनों को एवं रामधारी मंडल को 4 माह की जेल की सजा भी काटनी पड़ी। वर्ष 1942 ईस्वी तक यह तीनों महापुरुष स्वतंत्रता आंदोलन जमुई में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे। वास्तव में जमुई की धरती के यह तीनों लाल महापुरुष राजकीय सम्मान के हकदार हैं। 





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