Delhi Government का ऐतिहासिक फैसला: बिजली कंपनियों (DISCOM) के CAG ऑडिट का आदेश, जानिए क्यों पड़ी इसकी जरूरत

अधिकारियों का कहना है कि ऑडिट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या बकाया राशि सही है, इसकी गणना कैसे की गई, और क्या किसी वित्तीय अनियमितता या अकाउंटिंग प्रैक्टिस से उपभोक्ताओं और सरकारी खजाने पर कोई असर पड़ा है।
दिल्ली की सियासत और बिजली सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम - DISCOMs) के खातों के CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) ऑडिट का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। बिजली विभाग के अतिरिक्त सचिव द्वारा जारी इस आदेश के तहत कैग को यह ऑडिट आगामी तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली के इतिहास में यह पहली बार है जब निजी बिजली कंपनियों के बही-खातों की जांच देश की सबसे बड़ी ऑडिट संस्था करेगी।
यह फैसला डिस्कॉम के खातों के स्वतंत्र ऑडिट की कई सालों से चली आ रही मांग के बाद लिया गया है। बिजली कंपनियों ने लगातार CAG ऑडिट का विरोध किया था, और अदालतों से कोई राहत न मिलने के बाद, दिल्ली सरकार ने अब औपचारिक रूप से ऑडिट का आदेश जारी कर दिया है।
ऑडिट मुख्य रूप से डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति की जांच करेगा, खासकर 38,000 करोड़ रुपये के बकाया रेगुलेटरी ड्यूज़ (नियामक बकाया) की। सरकार ने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी देनदारी कैसे जमा हो गई, जबकि कंपनियों ने लगातार मुनाफ़ा दिखाया है और दिल्ली सरकार को डिविडेंड (लाभांश) भी दिया है, जिसकी इन वितरण कंपनियों में हिस्सेदारी है।
अधिकारियों का कहना है कि ऑडिट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या बकाया राशि सही है, इसकी गणना कैसे की गई, और क्या किसी वित्तीय अनियमितता या अकाउंटिंग प्रैक्टिस से उपभोक्ताओं और सरकारी खजाने पर कोई असर पड़ा है।
यह पहली बार है जब दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों का CAG ऑडिट होगा।
ऑडिट की ज़रूरत क्यों पड़ी
दिल्ली सरकार का यह फैसला एक बुनियादी वित्तीय विरोधाभास पर आधारित है। जहां बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि वे मुनाफ़े में हैं और शेयरधारक के तौर पर सरकार को डिविडेंड देती रही हैं, वहीं वे यह भी दावा करती हैं कि रेगुलेटरी ड्यूज़ के तौर पर लगभग 38,000 करोड़ रुपये बकाया हैं।
इसे भी पढ़ें: राजधानी में 'कयामत' की साजिश! दिल्ली पुलिस ने नाकाम किया ISI का आत्मघाती प्लान, दहलने से बची दिल्ली
सरकार का तर्क है कि अगर डिस्कॉम मुनाफ़ा कमाने और डिविडेंड देने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो इतनी बड़ी जमा हुई देनदारी की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इसलिए, CAG ऑडिट का मकसद कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति का पता लगाना, बताए गए बकाया की वैधता की पुष्टि करना और दिल्ली के बिजली वितरण क्षेत्र के कामकाज में ज़्यादा पारदर्शिता लाना है।
इसे भी पढ़ें: Russia पर संकट आया तो दोस्त India ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया, तेल संकट से जूझते Putin की मदद के लिए Modi ने भेजा हजारों टन Petrol
यह मुद्दा कई सालों से सार्वजनिक चर्चा में रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने कार्यकाल के दौरान बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट की वकालत की थी, लेकिन ऐसा ऑडिट कभी नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, जिससे दिल्ली के बिजली सेक्टर की सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली वित्तीय जांचों में से एक के लिए मंच तैयार हो गया है।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
अन्य न्यूज़














