मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, AC एक्टिविस्ट नहीं... इस्तीफे के बाद पहले रिएक्शन में ऐसा क्यों बोले धर्मेंद्र प्रधान

नीट परीक्षा घोटाले और व्यापक छात्र विरोध के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में वापसी पर आत्मविश्वास दिखाया। जयराम रमेश की सहानुभूति पर उन्होंने खुद को 'ज़मीनी स्तर पर लड़ने वाला नेता' बताया, जो उनके राजनीतिक भविष्य और बीजेपी में अगली अहम भूमिका की अटकलों को बढ़ा रहा है। यह बयान उनके इस्तीफे के बावजूद उनकी दृढ़ता और पार्टी में उनकी लगातार महत्ता को दर्शाता है।
छात्रों के ज़बरदस्त विरोध के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने के दो दिन बाद, धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को संसद पहुँचे। इस दौरान बीजेपी सांसदों ने ज़ोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। जब प्रधान के साथियों ने उनका स्वागत किया, तो वे मुस्कुराते हुए नज़र आए। बीजेपी के एक सांसद ने कहा कि शायद यह पहली बार है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप का सामना किए इस्तीफ़ा दिया है।
इसे भी पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान की सिर्फ मंत्री पद की कुर्सी गयी, राजनीतिक कद बरकरार है
इसी स्वागत-समारोह के दौरान जयराम रमेश प्रधान के पास पहुँचे और उनके इस्तीफ़े पर सहानुभूति जताई। कांग्रेस नेता ने उनसे कहा, "ऐसा होता रहता है।" प्रधान ने तुरंत जवाब दिया, "कुछ नहीं हुआ," और साथ ही कहा: "मैं ज़मीनी स्तर पर लड़ने वाला नेता हूँ, AC कमरे में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं।" बीजेपी नेताओं ने इस छोटी सी बातचीत को इस संकेत के तौर पर देखा कि कैबिनेट से हटने के बावजूद प्रधान राजनीतिक रूप से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं और अपनी अगली ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं।
इससे बीजेपी में उनकी अगली भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज़ हो गई हैं। ओडिशा में पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक होने के अलावा, प्रधान को बार-बार संगठन और चुनाव से जुड़ी अहम ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। छात्रों के हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) कर रही थी।
इसे भी पढ़ें: पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की मुलाकात, विकास और कानून-व्यवस्था पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकानी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्य बल के गठन की घोषणा की। इस कार्य बल का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करना है। आज सुबह सरकार ने लोकसभा में पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन करने के लिए एक विधेयक पेश किया, जिसमें 10 साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कदम NEET परीक्षा घोटाले के खिलाफ देशव्यापी छात्र प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है, जिसके चलते प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
अन्य न्यूज़














