MRFA फाइटर जेट डील इसी वित्त वर्ष में संभव: एयर चीफ मार्शल AP Singh

वायुसेना दिवस से पहले एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि भारत इस वित्त वर्ष में बहुप्रतीक्षित एमआरएफए समझौते को पूरा कर सकता है। उन्होंने बताया कि घटते स्क्वाड्रनों को देखते हुए वायुसेना को हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम में देरी होने पर अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत इस वित्त वर्ष में बहुप्रतीक्षित बहु-उद्देशीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) सौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बशर्ते सब कुछ योजना के मुताबिक हो। भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद पहल के तहत फरवरी में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मूल रूप से करीब दो दशक पहले मंजूरी दी गई थी।
परियोजना से संबंधित कीमतों पर बातचीत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर फिलहाल चर्चा जारी है। एयर चीफ मार्शल ने वायुसेना दिवस से पहले एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि अगर उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम में देरी होती है तो वायुसेना को किसी अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “रूस ने हमें एसयू-57 लड़ाकू विमानों की पेशकश की है लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।” एयर चीफ मार्शल सिंह ने लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की घटती संख्या के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारतीय वायुसेना को अगले कुछ वर्षों में हर साल कम से कम 36 से 40 विमानों की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता के संदर्भ में वायु शक्ति महत्वपूर्ण बनी हुई है और भारत को अपनी वायु शक्ति को और बढ़ाने की जरूरत है। एयर चीफ मार्शल ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के बारे में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिए वायुसेना की क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा, “हमें कृत्रिम मेधा से सक्षम वायुसेना तैयार करनी होगी।” सिंह ने कहा कि समग्र युद्धक तैयारी के लिए आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है।
वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमान के इंजन का उत्पादन भारत में करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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