IAF Deputy Chief Tejpal Singh ने कहा- Modern Warfare में Information Advantage और OODA Loop ही दिलाएगा जीत

एयर फोर्स ऑडिटोरियम, सुब्रतो पार्क में इंडियन मिलिट्री रिव्यू (IMR) के साथ मिलकर आयोजित 'सर्विलांस, C4I2 और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स' पर एक जॉइंट सेमिनार में बोलते हुए, एयर मार्शल सिंह ने कहा कि आज की लड़ाई का तरीका जानकारी को प्रोसेस करने की क्षमता से तय हो रहा है।
एयर मार्शल तेजपाल सिंह, जो एयर स्टाफ के डिप्टी चीफ हैं, ने मंगलवार को कहा कि आज की लड़ाई में जानकारी में बढ़त, नेटवर्क-बेस्ड ऑपरेशन और पलक झपकते ही फैसले लेने की क्षमता सबसे अहम है। उन्होंने दुश्मन से आगे रहने के लिए OODA (ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट) लूप को छोटा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। एयर फोर्स ऑडिटोरियम, सुब्रतो पार्क में इंडियन मिलिट्री रिव्यू (IMR) के साथ मिलकर आयोजित "सर्विलांस, C4I2 और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स" पर एक जॉइंट सेमिनार में बोलते हुए, एयर मार्शल सिंह ने कहा कि आज की लड़ाई का तरीका जानकारी को प्रोसेस करने की क्षमता से तय हो रहा है।
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प्लेटफ़ॉर्म और हथियारों की लगातार अहमियत और साथ ही जानकारी और फैसले लेने की बढ़ती अहमियत पर बात करते हुए उन्होंने कहा आज के युद्ध के मैदान में, मुझे लगता है कि हम सभी, जो कई सेमिनार में शामिल होते हैं, प्लेटफ़ॉर्म और हथियारों पर ही ध्यान देते हैं। हालांकि प्लेटफ़ॉर्म और हथियारों की अहमियत कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन मुझे लगता है कि आज का युद्ध का मैदान और युद्ध का हवाई क्षेत्र जानकारी में बढ़त, नेटवर्क-बेस्ड ऑपरेशन और सबसे ज़रूरी, पलक झपकते ही फैसले लेने की क्षमता से तय होता है। इसलिए, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन में सफलता तभी मिल सकती है जब हम अपने OODA लूप, यानी ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट को छोटा कर सकें। मकसद यह है कि हम अपने OODA लूप को दुश्मन के लूप से छोटा बनाएं ताकि हम उसके कुछ करने से पहले ही फैसला ले सकें और कार्रवाई कर सकें।
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तीनों सेनाओं के लिए एक जैसे डिजिटल इकोसिस्टम की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, "सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और मिलकर काम करने की क्षमता (seamless jointness) हासिल करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि हमारे प्रोटोकॉल एक जैसे (standardised) हों। हमें आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम के मामले में आत्मनिर्भर बनने की ज़रूरत है। हमारे सभी कम्युनिकेशन सिस्टम, ज़मीनी सेंसर, प्लेटफॉर्म और हवाई ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही) एसेट्स को एक ही नेटवर्क और एक जैसे प्रोटोकॉल पर काम करना चाहिए और एक ही डिजिटल भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए; यह बहुत ज़रूरी है। इसलिए, इंटरऑपरेबिलिटी (अलग-अलग सिस्टम का एक साथ मिलकर काम कर पाना) को डिज़ाइन का एक अहम हिस्सा होना चाहिए, न कि बाद में सोची जाने वाली कोई चीज़। और आखिर में, लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि मिलिट्री लीडर्स के तौर पर हमें अपनी युद्ध योजनाओं और ऑपरेशनल प्लान में आधुनिक टेक्नोलॉजी को शामिल करने के लिए तैयार रहना होगा।
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