West Asia तनाव का असर: घरों में LPG सिलेंडर की बिक्री घटी, Commercial Supply पर लगी रोक

LPG cylinders
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Apr 19 2026 9:15PM

मार्च 2026 में एलपीजी खपत में 13% की गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव और आयात बाधाएं हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संकट के बीच सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया, लेकिन पूरे वित्त वर्ष में 6% की कुल खपत वृद्धि स्वच्छ ईंधन की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

देश में रसोई गैस को लेकर हाल के आंकड़े एक बड़ा बदलाव दिखा रहे हैं और इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय हालात से जुड़ी बताई जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार मार्च 2026 में देश में एलपीजी की खपत में सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और आपूर्ति बाधाओं से जुड़ी मानी जा रही है।

बता दें कि मार्च 2026 में देश में कुल 23.79 लाख टन एलपीजी की खपत हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 27.29 लाख टन था। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा होरमुज स्ट्रेट के जरिए आता है। हाल के संघर्षों के कारण इस अहम समुद्री मार्ग पर असर पड़ा, जिससे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए केंद्र सरकार ने व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति में कटौती की। आंकड़ों के मुताबिक घरेलू सिलेंडर की बिक्री में 8.1 प्रतिशत की कमी आई और यह 22.19 लाख टन रही, जबकि व्यापारिक उपयोग में गिरावट और ज्यादा रही। खास तौर पर थोक बिक्री में 75 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि ये आंकड़े पहले दिए गए उन बयानों से अलग नजर आते हैं, जिनमें कहा गया था कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम करके एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं। इसका असर भी देखने को मिला और मार्च में घरेलू उत्पादन बढ़कर 14 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल 11 लाख टन था।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो देश में कुल एलपीजी उत्पादन बढ़कर 1.31 करोड़ टन हो गया, जो पिछले दो वर्षों के 1.28 करोड़ टन के आसपास था। वहीं खपत के स्तर पर भी पूरे साल में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल खपत 3.32 करोड़ टन तक पहुंची है। यह इस बात का संकेत है कि देश में स्वच्छ ईंधन की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस वैश्विक तनाव का असर विमान ईंधन पर भी पड़ा है। मार्च में विमान ईंधन की खपत लगभग स्थिर रही, जिसका कारण कई खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होना और उड़ानों में कमी बताया जा रहा है।

हालांकि दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की मांग में तेजी देखने को मिली है। मार्च में पेट्रोल की खपत 7.6 प्रतिशत बढ़कर 37.8 लाख टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 प्रतिशत बढ़कर 87.27 लाख टन दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन सकती है, हालांकि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से फिलहाल घरेलू जरूरतों को संतुलित रखने की कोशिश जारी है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़