UN में इमरान ने 10 बार लिया RSS का नाम, भारत और संघ को समानार्थी समझने के लिए सह-सरकार्यवाह ने दी बधाई

UN में इमरान ने 10 बार लिया RSS का नाम, भारत और संघ को समानार्थी समझने के लिए सह-सरकार्यवाह ने दी बधाई

यूएनजीए में भारत का नाम लेने के साथ इमरान ने करीब 10 बार आरएसएस का भी जिक्र किया। इस पर संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने चुटकी लेते हुए इमरान को बधाई तक दे डाली। कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर्यायवाची हैं। हम भी यही चाहते हैं कि दुनिया भारत और संघ को एक ही समझे।

नई दिल्ली। पाकिस्तान का कश्मीर राग तो बहुत पुराना है लेकिन इस विलाप में एक और नाम जुड़ गया है। पाकिस्तान के कप्तान इमराम खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच से झूठ की बारिश की और कश्मीर पर रोना रोते-रोते राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर भी आ गए। इमरान ने संघ को हिटलर और मुसोलिनी से प्रभावित बताते हुए कहा, “संघ ऐसा संगठन है, जो हिंदू नस्ल को ऊपर मानता है। उनके दिल में मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए घृणा है। उनका मानना है कि हिंदुओं के शासन का स्वर्णकाल मुस्लिमों की वजह से खत्म हुआ। संघ के संस्थापकों को देखिए गोलवलकर और सावरकर। इमरान खान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आजीवन सदस्य हैं। यूएन में अपने भाषण में आरएसएस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार के गृह मंत्री ने कहा था कि आरएसएस के कैंपों में आतंक की ट्रेनिंग दी जाती है।

यूएनजीए में भारत का नाम लेने के साथ इमरान ने करीब 10 बार आरएसएस का भी जिक्र किया। इस पर संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने चुटकी लेते हुए इमरान को बधाई तक दे डाली। कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर्यायवाची हैं। हम भी यही चाहते हैं कि दुनिया भारत और संघ को एक ही समझे। इमरान खान ने यह काम अच्छी तरह से किया है। उन्हें बधाई।” डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि संघ केवल भारत में है। हमारी कोई शाखा दुनिया में कहीं नहीं है, ऐसे में पाकिस्तान हमसे क्यों नाराज है? इसका मतलब है कि वह अगर संघ से नाराज है तो कहीं भारत से नाराज है। संघ के सह-सरकार्यवाह ने कहा कि दुनिया में जो-जो आतंकवाद से पीड़ित हैं, वे यह अनुभव करने लगे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आतंकवाद के विरोध में है। बिना कुछ किए हमें इतनी प्रसिद्धि मिल रही है। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।