मीडिया में बढ़ी नीतीश सरकार की सक्रियता, कामों का खूब हो रहा प्रचार-प्रसार

Nitish
अंकित सिंह । Feb 12 2021 3:08PM

बिहार की राजधानी पटना के चौक चौराहों पर पोस्टर वार की बहुत पुरानी परंपरा है। विपक्षी जहां आधिकारिक रूप से नीतीश सरकार पर हमला करने के लिए पोस्टर लगाते है तो वहीं जवाब में नीतीश की पार्टी की ओर से भी आरजेडी पर पलटवार किया जाता है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं या फिर जिनकी राजनीति में दिलचस्पी है वह इस बात को भलीभांति समझते हैं कि नीतीश कुमार अन्य नेताओं की तरह मीडिया फ्रेंडली नहीं है। समय-समय पर नीतीश कहते भी रहे हैं कि वह तो बस काम करते हैं, प्रचार में उनका विश्वास नहीं है। उन पर कोई आरोप-प्रत्यारोप करें तो वह तंज कसते हुए यह कहते थे कि लोगों को जब मीडिया की सुर्खियों में आना होता है तो वह कुछ भी कह देते हैं। अखबार, टीवी और सोशल मीडिया चैनलों पर भी देखे तो नीतीश कुमार की सक्रियता कम ही रहती है। ऐसे बहुत कम मौके आए है जब नीतीश कुमार ने किसी समाचार चैनल को अपना इंटरव्यू दिया हो। जब चुनाव आने के साथ राजनेता टीवी और अखबारों में छाने की कोशिश करते हैं उसी दौरान नीतीश मेन स्ट्रीम मीडिया से दूरी बनाकर लोगों के बीच जाना ज्यादा उचित समझते हैं। जानकार इसे नीतीश की अपनी कार्यशैली बताते हैं।

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बिहार की राजधानी पटना के चौक चौराहों पर पोस्टर वार की बहुत पुरानी परंपरा है। विपक्षी जहां आधिकारिक रूप से नीतीश सरकार पर हमला करने के लिए पोस्टर लगाते है तो वहीं जवाब में नीतीश की पार्टी की ओर से भी आरजेडी पर पलटवार किया जाता है। लेकिन नीतीश की पार्टी लगातार यह कहती रही है कि उनके कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जाता है। पार्टी इसे आधिकारिक तौर पर नहीं करती है। शायद नीतीश की कार्यशैली का उनकी पार्टी पर भी असर है। दूसरे प्रदेशों में देखें तो लगभग सभी मुख्यमंत्री अपनी योजनाओं का खूब प्रचार-प्रसार करते हैं। योजनाओं का बैनर और पोस्टर चौक चौराहों के साथ-साथ अखबारों और टीवी पर भी दिख जाते हैं। पर बिहार में ऐसा नहीं है। नीतीश अपनी योजनाओं का इन तरीकों से प्रचार-प्रसार करने में भी इतना विश्वास नहीं रखते हैं। तभी तो वहां की सड़कों पर और अखबारों में सरकारी योजनाओं से संबंधित विज्ञापन कम ही दिखाई देते है।

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नीतीश कुमार उन राजनेताओं में से हैं जिनसे ज्यादा उलझने पर मीडिया को उनकी आक्रामकता का भी सामना समय-समय पर करना पड़ जाता है। हाल में ही हमने रुपेश कुमार के मामले में यह देखा या फिर इससे पहले जब पटना में बाढ़ आई थी तब भी ऐसा ही हुआ था। बिहार में कोई भी मसला हो, विपक्ष मीडिया के जरिए चाहे सरकार पर कितनी भी आक्रमकता दिखा रहा हो, नीतीश कभी सामने आकर मीडिया के जरिए अपनी सफाई नहीं देते हैं। लेकिन अब नीतीश इस बार थोड़े बदले बदले नजर आ रहे हैं। जहां उनकी राजनीतिक कद को इस बार के चुनाव में नुकसान हुआ है तो वहीं जनता ने भी उनकी पार्टी को कम सीटें ही दी। हालांकि एनडीए को बहुमत मिली और वह एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने। लेकिन इस बार वह अब मीडिया में ज्यादा सक्रियता दिखा रहे हैं। वह खुद भी ज्यादा सक्रिय हैं और सरकार के कामों को भी सक्रियता से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं वह भी मीडिया के जरिए। 

 

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ताजा उदाहरण ही देख लें तो रूपेश कुमार से संबंधित मुद्दे पर जब मीडिया ने नीतीश से ताबड़तोड़ सवाल पूछते हुए वहां के डीजीपी को लेकर आरोप लगाया तब उन्होंने मीडिया के सामने ही डीजीपी को फोन मिला दिया। यह नीतीश की कार्यशैली का हिस्सा पहले नहीं था। अगर आप उनके ट्विटर प्रोफाइल को नजदीक से देखते रहे है तो यहां भी आपको फर्क नजर आएगा। पहले नीतीश शायद ही किसी विशेष मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखते थे लेकिन अब उनकी सक्रियता बढ़ गई है। अपने कामों के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रियता को दिखाने के लिए ट्विटर का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के जरिए अब नीतीश अपने कामों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश में हैं। इसका असर यह है कि अब विभाग के जरिए सरकार के कामों का पूरा विश्लेषण हर रोज मीडिया संस्थाओं को भेजी जा रही है। बकायदा इसमें उस दिन के सभी कामों का लेखा-जोखा रहता है जो सरकार और सरकार के मंत्रियों द्वारा किया जाता है।

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हालांकि, नीतीश कुमार में यह परिवर्तन ही यूं ही नहीं हुआ है। ट्विटर पर देखें तो मुख्यमंत्रियों की तुलना में नीतीश सबसे कम सक्रिय रहते हैं। लेकिन अब इस सोशल मीडिया के माहत्व को वह समझ रहे हैं। वह यह भी जानते हैं कि आज अगर बिहार में तेजस्वी की लोकप्रियता बढ़ी है तो उसमें सोशल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है। नीतीश की तुलना में देखें तो लालू यादव या फिर उनके बेटों तेजस्वी और तेजप्रताप दोनों ही मीडिया फ्रेंडली हैं और यही वजह है कि लालू की अनुपस्थिति में भी तेजस्वी नीतीश को कड़ी टक्कर देने में कामयाब हो गए। चाहे बजह जो भी हो लेकिन नीतीश अब अपने कामों को भी प्रचार कर रहे हैं और खुद भी ज्यादा सक्रियता दिखा रहे हैं। अधिकारी भी पहले की तुलना में सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक लगातार सरकार के कामों को पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह सक्रियता कब तक और कितने आगे तक जाती है।

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