80th Independence Day: Red Fort से पहली बार गूंजा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सेना के बैंड की धुन पर अतिथियों और उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का गायन किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित इस राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज के दोनों ओर 'वंदे मातरम्' लिखा गया था।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित होने वाले समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की विरासत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में लाल किले की प्राचीर पर की गई पुष्प सज्जा के केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज और उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभक्ति के जोश और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया।
समारोह में मौजूद अतिथियों के साथ सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाई और सभी ने राष्ट्रीय गीत गाया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गूंज रहा है और जब देश ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष मनाया जा रहा है, तब इससे बेहतर अवसर कुछ नहीं हो सकता।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का उद्घोष बन गया था। संविधान सभा ने 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था। सरकार ने पिछले नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की थी।
‘वंदे मातरम्’ की रचना पहले स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। इसे पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था। ‘वंदे मातरम्’ पहली बार सात नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।
बाद में चट्टोपाध्याय ने इसे अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ।
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