किताब में बड़ा दावा, 2001 के संसद हमले से नाराज थे जाधव, ISI ने इस तरह अपने जाल में फंसाया

कुलभूषण जाधव जिन्हें भारतीय जासूस होने के आरोप में 2016 में बलूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था और जो तब से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। लेखक लिखते हैं कि आईएसआई ने कराची के उजैर बलूच के नेटवर्क का इस्तेमाल किया।
- पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) को पता था कि कुलभूषण जाधव "छोटी मछली" हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे बड़ी कामयाबी बताई।
- भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पहले हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के इलाके में घुसपैठ की और उनके नेटवर्क में विदेशी आतंकियों के शामिल होने का इंतजार किया।
- 26/11 के हमले पर, विदेशी एजेंसियों ने मुंबई में संभावित लक्ष्यों, हमलावरों की संख्या, उनके मार्ग और तरीके सहित 18 विस्तृत विवरण भेजे - लेकिन इस सभी खुफिया जानकारी को "काफी हद तक नजरअंदाज" किया गया था।
पत्रकार युगल एड्रियन लेवी और कैथी स्कॉट-क्लार्क की किताब स्पाई स्टोरीज़: इनसाइड द सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ़ द रॉ एंड द आईएसआई में ये सारे दावे किए गए हैं। इस किताब को जगरनॉट ने प्रकाशित किया है, जोकि भारतीय और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के कथित गुप्त खुलासों पर आधारित है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लेवी और क्लार्क ने छोटे-छोटे बिन्दुओं को जोड़कर किताब का रूप दिया है। जिसमें कई हाई प्रोफाइल सेवारत और सेनानिवृत्त जासूसों से बात की गई है। सूत्रों के मुताबिक आईएसआई अधिकारी ( जिसे डे ग्युरे ‘मेजर इफ्तिखार’ के रूप में लोग जानते थे) ने कई अहम जानकारी लेखकों को दी है।
कुलभूषण जाधव जिन्हें भारतीय जासूस होने के आरोप में 2016 में बलूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था और जो तब से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। लेखक लिखते हैं कि आईएसआई ने कराची के उजैर बलूच के नेटवर्क का इस्तेमाल किया। जिसके ईरानी बलूचिस्तान में गहरे संबंध हैं। आईएसआई ने इसका इस्तेमाल ईरानी बंदरगाह शहर चाबहार में जासूसी करने के लिए।
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आईएसआई ने धैर्यपूर्वक किया इंतजार
2014 में चाबहार के एक परिसर में आईएसआई ने उन पुरुषों की पहचान की जिन्हें वे रॉ अधिकारी मानते थे। पकड़े गए लोगों में से एक शख्स को वो हचान नहीं पा रहे थे। लेकिन वो आगंतुक बार-बार वहां आता जाता था। लेकिन ऐसा लगता है कि वह वहां से समुद्री माल ढुलाई का कारोबार करता है।' लेखकों ने आईएसआई के खुफिया विंग के कर्नल का जिक्र करते हुए कहा कि आईएसआई ने धैर्यपूर्वक इंतजार किया, ताकि जाधव को बड़ा कदम उठाए जिससे उसे पकड़ा जा सके।
संसद हमले से नाराज थे जाधव
किताब कहती है कि जाधव 2001 के संसद हमले से नाराज थे और उन्होंने भारतीय एजेंसियों की सहायता करने की पेशकश की। 26/11 के चार साल बाद जाधव ने बताया कि उनके बलूच परिवार के साथ अच्छे संबंध बन गए हैं और उनका संपर्क सीधे उजैर बलूच के भतीजे से हो गया। लेकिन जाधव को इसका पता ही नहीं चल पाया कि वो "आईएसआई के जाल में फंस रहे थे। दरअसल, जाधव ने जिस बलूच परिवार में घुसपैठ की थी वह आईएसआई के लिए ही काम कर रहा था।
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