श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन कर बिट्टा कराटे को फांसी देने की मांग की

श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन कर बिट्टा कराटे को फांसी देने की मांग की

हम आपको बता दें कि डॉ. संदीप मावा के पिता की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यही नहीं संदीप मावा पर भी हमला हो चुका है। कश्मीरी पंडितों को घाटी से भगाये जाने के 29 साल बाद डॉ. संदीप मावा वापस घाटी लौटे थे।

फिल्म द कश्मीर फाइल्स ने देश-दुनिया को कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्मों और उनको हुए दर्द का अहसास कराया है। इसके साथ ही देश के विभिन्न स्थानों पर रह रहे कश्मीरी पंडितों को अपने प्रति बढ़े जनसमर्थन से जल्द न्याय की उम्मीद भी जगी है। इसी के साथ ही कश्मीर में अब भी रह रहे पंडितों ने भी सरकार से गुहार लगाना शुरू कर दिया है कि हत्यारों को फांसी दी जाये। इसी क्रम में कश्मीरी पंडितों की वापसी का अभियान चलाने वाले डॉ. संदीप मावा ने श्रीनगर में आतंकवादी बिट्टा कराटे का पुतला जलाया और धरना देकर प्रशासन से मांग की कि बिट्टा कराटे को फांसी दी जाये। प्रभासाक्षी से बातचीत में डॉ. संदीप मावा ने कहा कि यदि सरकार उनकी बात नहीं मानती है तो वह आत्मदाह कर लेंगे।

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हम आपको बता दें कि डॉ. संदीप मावा के पिता की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यही नहीं संदीप मावा पर भी हमला हो चुका है। कश्मीरी पंडितों को घाटी से भगाये जाने के 29 साल बाद डॉ. संदीप मावा वापस घाटी लौटे थे और साल 2019 में अपने पिता की बंद दुकान को खोला था। दुकान खोले जाने के दौरान अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक भी संदीप मावा की दुकान पर पहुंचा था और घाटी लौटने के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। लेकिन डॉ. संदीप मावा को क्या पता था कि एक तरफ उनका स्वागत किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उन पर हमले की तैयारी भी की जा रही है। पिछले साल नवंबर में जब टारगेट किलिंग के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर डर का माहौल बनाया जा रहा था तब आतंकवादियों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया था। लेकिन गाड़ी उनकी दुकान पर काम करने वाला इब्राहिम नाम का शख्स चला रहा था जिसकी गोली लगने से मौत हो गयी। उस समय घाटी में अल्पसंख्यक पंडित समुदाय के बीच डर का माहौल हो गया था लेकिन उसके बावजूद डॉ. संदीप मावा ने कश्मीर छोड़ने से इंकार कर दिया था। हम आपको यह भी बता दें कि कश्मीरी पंडित रोशन लाल मावा के बेटे डॉ. संदीप मावा सुलह मोर्चा के अध्यक्ष हैं और कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए काम करते हैं।





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