अपमानजनक आरोप लगाए...केजरीवाल-सिसोदिया की और बढ़ेगी मुश्किल, जस्टिस शर्मा ने कहा- अवमानना की कार्यवाही शुरू करेंगे

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अभिनय आकाश । May 14 2026 3:18PM

केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि वे न्यायाधीश के समक्ष लंबित कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद खत्म हो गई है। इसलिए मैंने महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का फैसला किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ मानहानिकारक पोस्ट करने के आरोप में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करेगा। न्यायालय आज शाम 5 बजे विस्तृत आदेश पारित करेगा। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आज मुझे एमिकस (अदालती वकील) नियुक्त करना था और मैंने इसके लिए प्रयास भी किए, कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए सहमति भी दे दी। लेकिन इसी बीच मुझे पता चला है कि कुछ प्रतिवादियों द्वारा मेरे और इस न्यायालय के खिलाफ बेहद अपमानजनक, बेहद अवमाननापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की जा रही है और मैं चुप नहीं रह सकती। मैंने कुछ प्रतिवादियों और कुछ अन्य अवमाननाकर्ताओं के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया है।

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केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि वे न्यायाधीश के समक्ष लंबित कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद खत्म हो गई है। इसलिए मैंने महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का फैसला किया है। केजरीवाल के बाद, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे भी उनकी अदालत में बिना वकील के पेश होंगे। न्यायमूर्ति शर्मा ने इससे पहले सीबीआई की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था। न्यायाधीश शर्मा ने इस मामले से खुद को अलग करने की याचिका खारिज करते हुए कहा अगर मैं इन (खुद को अलग करने की) याचिकाओं को स्वीकार करती, तो यह एक चिंताजनक मिसाल कायम करता।” उन्होंने यह भी कहा कि पक्षपात या भेदभाव का हर अप्रमाणित और निराधार आरोप न केवल किसी एक न्यायाधीश पर लगाया जाता है, बल्कि न्यायपालिका की सामूहिक अखंडता पर भी कलंक लगाता है। न्यायाधीश ने कहा कि जब भी जरूरत होगी, अदालत अपने और न्यायपालिका के लिए खड़ी होगी, भले ही यह मुश्किल लगे।

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