NRC पर केजरीवाल के बयान से मचा घमासान, बीजेपी का हल्ला बोल, कांग्रेस ने साधी चुप्पी

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अभिनय आकाश । Sep 26 2019 4:14PM

मनोज तिवारी ने बीते दिनों दिल्ली में भी एनआरसी को लागू किए जाने की मांग की थी। जिसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन में आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने तिवारी से पूछा कि क्या उनके पास दिल्ली में 1971 से निवास करने का सबूत है।

नई दिल्ली। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी कि एनआरसी का मामला अब असम और पश्चिम बंगाल के बाद देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गया है। एनआसी के मुद्दे ने दिल्ली की राजनीति में उबाल ला दिया है। एनआरसी पर सीएम अरविंद केजरीवाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर दिए गए बयान के बाद आक्रोशित बीजेपी की पूर्वांचल मोर्चा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने बीजेपी पूर्वांचल मोर्चा के सदस्यों को हिरासत में भी लिया। बताया जा रहा है कि ये कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। बता दें कि एक सवाल के जवाब में सीएम केजरीवाल ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय राजधानी में एनआरसी लागू हुआ तो सबसे पहले बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को शहर छोड़ना होगा। इस बयान पर मनोज तिवारी ने खुद भी बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी थी। तिवारी ने कहा था कि क्या केजरीवाल देश के लोगों को दिल्ली का नहीं समझते हैं।

तिवारी ने कहा, 'क्या वह यह कहना चाहते हैं कि पूर्वांचल के लोग घुसपैठिए हैं? क्या दूसरे राज्य के लोगों को सीएम विदेशी मानते हैं? मुझे लगता है कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। एक आईआरएस अफसर को कैसे नहीं पता कि एनआरसी क्या है?' वहीं पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने भी केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि मुख्यमंत्री को अधूरा ज्ञान है। उन्हें यह नहीं मालूम कि एनआरसी देश से बाहर के लोगों पर लागू होता है, न कि देश के अंदर के लोगों पर। गंभीर ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए लिखा कि खुद केजरीवाल हरियाणा के रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि मनोज तिवारी ने बीते दिनों दिल्ली में भी एनआरसी को लागू किए जाने की मांग की थी। जिसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन में आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने तिवारी से पूछा कि क्या उनके पास दिल्ली में 1971 से निवास करने का सबूत है। भारद्वाज ने संवाददाताओं से कहा, ''यदि उनके पास सबूत नहीं है तो उन्हें रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार से आये लोगों के लिए संकट नहीं पैदा करना चाहिए।" इस बीच गौर करने वाली बात है कि दिल्ली में 15 साल शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस न तो इसका सपोर्ट किया और न ही विरोध। 

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