Kochi Metro के गोपनीय दस्तावेज सोशल मीडिया पर लीक, पुलिस ने दर्ज किया मामला

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कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के कॉरपोरेट कार्यालय से संवेदनशील दस्तावेज और वित्तीय विवरण चुराकर एक व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रसारित करने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को संदेह है कि इस डेटा चोरी में मेट्रो के कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।

कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) के गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज कथित रूप से चोरी कर सोशल मीडिया मंच पर प्रसारित किए जाने के संबंध में पुलिस ने सोमवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू की। केएमआरएल की शिकायत के आधार पर कोच्चि मेट्रो पुलिस ने 12 सितंबर को अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्राथमिकी के अनुसार, कुछ लोगों ने कथित तौर पर व्यक्तिगत और गैरकानूनी वित्तीय लाभ के लिए विश्वासघात और धोखाधड़ी करने के इरादे से कलूर जेएलएन मेट्रो स्टेशन की चौथी मंजिल स्थित केएमआरएल के कॉरपोरेट कार्यालय में कंप्यूटर प्रणालियों तक अनधिकृत पहुंच बनाई।

प्राथमिकी में कहा गया, ‘‘उन्होंने डेटा चोरी की और केएमआरएल के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग द्वारा आधिकारिक दस्तावेजों की छपाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईमेल आईडी को हैक कर लिया। डेस्कटॉप और मोबाइल फोन में अवैध रूप से लॉग इन कर उन्होंने बेहद गोपनीय दस्तावेज, कर्मचारियों की निजी जानकारी और कंपनी के वित्तीय विवरण लीक कर दिए।’’ इसमें कहा गया कि लीक किए गए दस्तावेजों को कथित तौर पर ‘यूनिफाइड कोच्चि मेट्रो रेल रिफॉर्म एंड डेवलपमेंट फोरम’ नाम के एक व्हाट्सऐप समूह पर अपलोड किया गया और प्रसारित किया गया, जिससे कंपनी की सुरक्षा और कर्मचारियों की निजता प्रभावित हुई। पुलिस के अनुसार, केएमआरएल को जब पता चला कि उसके कुछ गोपनीय दस्तावेज व्हाट्सऐप समूहों में प्रसारित किए जा रहे हैं, तब यह मामला सामने आया।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने व्हाट्सऐप समूह की जांच शुरू कर दी है और इसे संचालित करने वाले लोगों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं को केएमआरएल के कुछ कर्मियों के भी इस मामले में शामिल होने का संदेह है। जांच के दौरान उनकी भूमिका स्पष्ट की जाएगी।

यह व्हाट्सऐप समूह कोच्चि मेट्रो की परियोजनाओं, उनके संचालन और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बनाया गया था। मामला भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस व्हाट्सऐप समूह की जांच करने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए साइबर पुलिस की सहायता लेगी।

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