Prabhasakshi NewsRoom: Kashmir में बड़ा Terror Attack, छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल, आतंकियों की खोज जारी

यह हमला कई मायनों में बेहद चिंताजनक है। दक्षिण कश्मीर में पिछले दस दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग शहर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) के एक पुलिसकर्मी की भी आतंकियों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी।
दक्षिण कश्मीर एक बार फिर आतंक की खूनी साजिश का गवाह बना है। कुलगाम जिले के किलाम गांव में ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों पर शुक्रवार को आतंकियों ने बेहद नजदीक से गोलियां बरसाईं। इस हमले में मौके पर ही दीपक की मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपिंदर ने शनिवार सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।
हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। घायल भूपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था जहां ऑपरेशन के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस रेफर किया गया था। हालांकि डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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यह हमला कई मायनों में बेहद चिंताजनक है। दक्षिण कश्मीर में पिछले दस दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग शहर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) के एक पुलिसकर्मी की भी आतंकियों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, अक्टूबर 2024 के बाद यह पहला मौका है जब आतंकियों ने प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया है।
देखा जाये तो बीते छह वर्षों के आंकड़े भी घाटी में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इस दौरान अलग-अलग आतंकी घटनाओं में 25 से अधिक प्रवासी मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे पहले 18 अक्टूबर 2024 को बिहार के 30 वर्षीय मजदूर अशोक चौहान की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसके महज दो दिन बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन जेड-मोड़ सुरंग के बेस कैंप पर हुए बड़े आतंकी हमले में छह प्रवासी मजदूरों और एक कश्मीरी डॉक्टर की मौत हो गई थी। ताजा हमला इस बात का संकेत है कि आतंकी संगठन एक बार फिर आम नागरिकों और रोजी-रोटी कमाने आए प्रवासी श्रमिकों को आसान निशाना बनाने की रणनीति पर लौट आए हैं।
घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान और तेज करने तथा उन्हें हर हाल में खत्म करने के निर्देश दिए हैं। उपराज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि हमले के दोषियों को जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
आतंकी हमले की राजनीतिक दलों ने भी एक स्वर में निंदा की। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसे "अकल्पनीय रूप से क्रूर" और "निरर्थक हिंसा" करार देते हुए कहा कि ये मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर कश्मीर आए थे, लेकिन उन्हें आतंक का शिकार बना दिया गया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद इस तरह की नृशंस हत्याएं बेहद चिंताजनक हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब भी आतंकी आम नागरिकों को निशाना बनाने में कैसे सफल हो रहे हैं। वहीं, अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने इस हमले को "दुखद और अमानवीय" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने भी निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने को घोर निंदनीय बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
देखा जाये तो कुलगाम की यह घटना एक बार फिर इस सच्चाई को सामने लाती है कि घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। लगातार प्रवासी मजदूरों और आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल होने के दावों की भी कड़ी परीक्षा ले रही हैं। अब पूरा ध्यान सुरक्षा बलों के उस अभियान पर है, जिसके जरिए हमलावरों को जल्द से जल्द पकड़ने या मार गिराने की कोशिश की जा रही है।
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