UP विधान परिषद का इतिहास अत्‍यंत गौरवशाली है, योगी आदित्यनाथ ने विधान मंडल को लोकतंत्र का मंदिर बताया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 20, 2021   10:15
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UP विधान परिषद का इतिहास अत्‍यंत गौरवशाली है, योगी आदित्यनाथ ने विधान मंडल को लोकतंत्र का मंदिर बताया

मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और सर्वाधिक सदस्य संख्या के साथ उत्तर प्रदेश का विधान मंडल देश का सबसे बड़ा विधान मंडल है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश यादव और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को विधान परिषद के सौंदर्यीकरण कार्यों का लोकार्पण एवं चित्र वीथिका के उद्घाटन के साथ ही परिषद के वर्तमान सदस्‍यों की पट्टिका का अनावरण भी किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और सर्वाधिक सदस्य संख्या के साथ उत्तर प्रदेश का विधान मंडल देश का सबसे बड़ा विधान मंडल है। 

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उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद का इतिहास अत्‍यंत गौरवशाली है। उन्होंने कहा, ‘‘विधान मंडल लोकतंत्र का मन्दिर व आस्था का केन्द्र है। राज्य के इस उच्च सदन में सौन्दर्यीकरण के लिए किये गये कार्य सराहनीय हैं।’’ आदित्यनाथ ने कहा कि इस विधान परिषद से महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, पूर्व मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत, पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्‍टर सम्पूर्णानन्द, सर तेज बहादुर सप्रू, प्रख्यात कवयित्रीमहादेवी वर्मा का जुड़ाव रहा है। विधान परिषद की प्रथम बैठक थॉर्न हिल मेमोरियल हॉल, प्रयागराज में हुई थी। 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि विधान परिषद में चित्र वीथिका से सबको प्रेरणा मिलेगी। सावरकर के बारे में आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘सावरकर जी का व्यक्तित्व प्रत्येक भारतवासी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सावरकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ-साथ एक बहुत बड़े दार्शनिक, लेखक, कवि भी थे।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा चार फरवरी, 2021 से चार फरवरी, 2022 तक चौरी चौरा के शताब्दी वर्ष के दौरान विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, विधान परिषद सदस्य व भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे।





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असंतुष्ट नेताओं को कांग्रेस पार्टी का जवाब, अच्छा होता चुनाव वाले राज्यों में अभियान चलाते

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 27, 2021   18:19
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असंतुष्ट नेताओं को कांग्रेस पार्टी का जवाब, अच्छा होता चुनाव वाले राज्यों में अभियान चलाते

अभिषेक मनु सिंघवी ने सभी को कांग्रेस परिवार का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि हम सभी की इज्जत करते हैं। कांग्रेस पार्टी समझती है कि जब पांच प्रांतों में चुनाव हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेस संघर्ष कर रही है। ज्यादा उपयुक्त होता कि ये सभी नेता इन प्रांतों में अभियान करते।

कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के जम्मू में जमावड़े को लेकर राजधानी दिल्ली में भी हलचल तेज हो गई। खबरों की माने तो कांग्रेस के जी-23 नेताओं के गोलबंद होने से राहुल गांधी खेमा नाखुश है। उनका मानना है कि विधानसभा चुनावों में प्रचार की बजाय वरिष्ठ नेता अपनी शिकायतों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं जबकि राहुल गांधी पार्टी को मजबूत करने के लिए जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताओं के इस कदम से राहुल गांधी खेमे के लोगों ने कांग्रेस की उम्मीदों को झटका लगने की आशंका व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस मोर्चाबंदी को कांग्रेस के वफादार सिपाहियों द्वारा कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही राहुल गांधी खेमे के लोगों ने इससे बीजेपी को ही फायदा होने की संभावना जताई है। 

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असंतुष्ट नेताओं को सिंघवी का जवाब 

अभिषेक मनु सिंघवी ने सभी को कांग्रेस परिवार का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि हम सभी की इज्जत करते हैं। कांग्रेस पार्टी समझती है कि जब पांच प्रांतों में चुनाव हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेस संघर्ष कर रही है। ज्यादा उपयुक्त होता कि ये सभी नेता इन प्रांतों में अभियान करते।  सिंघवी ने कहा कि गुलाम नबी आजाद सात बार सांसद रहे हैं। गुलाम नबी आजाद को सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री बनाया था। आजाद ने इससे पहले कभी शिकायत नहीं की थी।  

 जी-23 की जम्मू में मोर्चाबंदी

जम्मू में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा हुआ। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से रिटायर होने के बाद आजाद शुक्रवार को जम्मू पहुंचे। यहां उनके स्वागत में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उमड़े। इस दौरान जी-23 गुट के नेताओं की तरफ से कांग्रेस पार्टी को नसीहत भी दी गई। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि 1950 के बाद कभी ऐसा अवसर नहीं आया जब राज्य सभा में जम्मू-कश्मीर का कोई प्रतिनिधि न हो। यह दुरुस्त होगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में कांग्रेस कमजोर हुई है। हमारी आवाज पार्टी की बेहतरी के लिए है। इसके अलावा कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी को गुलाम नबी आजाद के अनुभव का लाभ उठाने की नसीहत देते हुए कहा कि कहा कि गुलाम नबी आज़ाद साहब की असली भूमिका क्या है? 

 





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संत रविदास ने सनातन धर्म को मजबूती प्रदान की: योगी आदित्‍यनाथ

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   17:55
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संत रविदास ने सनातन धर्म को मजबूती प्रदान की: योगी आदित्‍यनाथ

योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत करते हुए कहा आदमी न छोटा होता है, न बड़ा होता है, न ऊंचा होता है, न नीचा होता है, आदमी तो सिर्फ आदमी होता है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शनिवार को कृष्‍णानगर में संत रविदास मंदिर में उनकी प्रतिमा पर पुष्‍पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनपर्यन्त तमाम प्रकार के पाखण्डों का सामना करते हुए सनातन धर्म को मजबूती प्रदान की। योगी आदित्‍यनाथ ने शनिवार को प्रदेश वासियों को संत रविदास जयंती और माघी पूर्णिमा की हार्दिक बधाई और शुभकामना देते हुए कहा, रविदास जी ने कहा था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। यदि हम अन्तःकरण से शुद्ध हैं, तो साधना का प्रतिफल भी उसी रूप में प्राप्त होता है।

उन्‍होंने कहा कि सन्त रविदासने जीवनपर्यन्त तमाम प्रकार के पाखण्डों का सामना करते हुए सनातन धर्म को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया। यहां जारी एक सरकारी बयान के अनुसार इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजधानी लखनऊ के कैण्ट क्षेत्र के विधायक सुरेश चन्द्र तिवारी से कृष्‍णनगर में सन्त रविदास मन्दिर के सौन्दर्यीकरण की योजना बनाकर प्रस्तुत करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 645 वर्ष पूर्व महान सन्त रविदास का प्राकट्य हुआ था, जिन्होंने काशी की धरती पर जन्म लेकर भारत के सनातन धर्म की परम्परा को नयी ऊँचाइयां दीं। 

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योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत करते हुए कहा आदमी न छोटा होता है, न बड़ा होता है, न ऊंचा होता है, न नीचा होता है, आदमी तो सिर्फ आदमी होता है। यह भाव हम सब इस रूप में देख रहे हैं कि व्यक्ति अपने कर्मों के माध्यम से कैसे महानता हासिल करता है और कैसे लोकपूज्य हो सकता है। सन्त रविदास जी का जीवन चरित्र हम सबको इस बात की प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा काशी स्थित सन्त रविदास जी की जन्मस्थली का सौन्दर्यीकरण कराया जा रहा है।





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न्यायाधीशों के खिलाफ टिप्पणियां परेशान करने वाली एक नयी प्रवृत्ति: रविशंकर प्रसाद

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   17:51
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न्यायाधीशों के खिलाफ टिप्पणियां परेशान करने वाली एक नयी प्रवृत्ति: रविशंकर प्रसाद

प्रसाद ने पिछले साल कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौती का सामना करने में न्यायपालिका की भूमिका पर संतोष व्यक्त किया। इस साल 31 जनवरी तक देशभर में डिजिटल रूप से सुने जाने वाले मामलों की संख्या 76.38 लाख थी।

पटना। केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधिक कार्यकर्ताओं द्वारा उन न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने पर शनिवार को सख्त एतराज जताया जो उनकी याचिकाओं पर अनुकूल आदेश जारी नहीं करते हैं और इसे ‘‘परेशान करने वाली एक नयी प्रवृत्ति’’ करार दिया। प्रसाद भारत के प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे द्वारा पटना उच्च न्यायालय की एक नई इमारत के उद्घाटन के मौके पर यहां एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य भी मौजूद थे। प्रसाद ने जनहित याचिकाएं दायर करने वालों के अनुकूल फैसला नहीं आने पर उनके द्वारा न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘‘घोर अनुचित’’ टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम निश्चित रूप से एक फैसले के तर्क की आलोचना कर सकते हैं। लेकिन मैं एक नयी प्रवृत्ति देख रहा हूं जिस पर मैं आज बात करने की जरूरत समझता हूं।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी चिंताओं को सार्वजनिक करने की सोच रहा था। मैंने यहां ऐसा करने के बारे में फैसला किया।’’ केन्द्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए हाल ही में जारी किए गए दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम स्वतंत्रता के समर्थक हैं। हम आलोचना के समर्थक हैं। हम असहमति के भी समर्थक हैं। लेकिन, मुद्दा सोशल मीडिया के दुरुपयोग का है। सोशल मीडिया पर किसी के लिए भी शिकायत निवारण तंत्र होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि सरकार ‘‘एससी, एसटी और ओबीसी को उचित आरक्षण देने की इच्छा रखती है’’, जो न्यायपालिका को अधिक ‘‘समावेशी’’ बनाएगी। 

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प्रसाद ने पिछले साल कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौती का सामना करने में न्यायपालिका की भूमिका पर संतोष व्यक्त किया। इस साल 31 जनवरी तक देशभर में डिजिटल रूप से सुने जाने वाले मामलों की संख्या 76.38 लाख थी। इनमें से 24.55 लाख मामलों पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में, अन्य 51.83 लाख मामलों पर जिला अदालतों में और 22,353 मामलों पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रशंसा की बात है।





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